26 सितंबर 2026
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कोलकाता में सिम कार्ड फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़: साल्ट लेक से आंध्र-तेलंगाना के 7 गिरफ्तार, कुल 11 आरोपी हिरासत में

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कोलकाता में सिम कार्ड फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़: साल्ट लेक से आंध्र-तेलंगाना के 7 गिरफ्तार, कुल 11 आरोपी हिरासत में

सारांश

कोलकाता के साल्ट लेक में फर्जी कॉल सेंटर की आड़ में चल रहा सिम कार्ड ठगी का अंतर-राज्यीय रैकेट ध्वस्त। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से लाए गए 7 आरोपी गिरफ्तार, कुल 11 हिरासत में। पीड़ितों से लाखों की ठगी का आरोप, मुख्य सूत्रधार की तलाश जारी।

मुख्य बातें

कोलकाता पुलिस ने 26 सितंबर 2026 को साल्ट लेक से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 7 संदिग्धों को गिरफ्तार किया।
इस मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या 11 हो गई है; पहली गिरफ्तारी 17 सितंबर को हुई थी।
आरोपी 'तौसीफ टेलीकॉम' जैसी फर्जी कंपनियों की आड़ में फर्जी दस्तावेजों से सिम कार्ड बनाकर ठगी करते थे।
साल्ट लेक के मकान में फर्जी कॉल सेंटर स्थापित था; छापे में कई स्मार्टफोन और कीपैड फोन बरामद।
पीड़ितों से लाखों रुपये की ठगी का आरोप; मुख्य सूत्रधार सुंदर की तलाश जारी।

कोलकाता पुलिस ने 26 सितंबर 2026 को साल्ट लेक स्थित एक मकान पर छापा मारकर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के सात संदिग्धों को गिरफ्तार किया, जो फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए सिम कार्ड हासिल कर साइबर ठगी का रैकेट चला रहे थे। इस कार्रवाई के साथ इस मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या 11 हो गई है।

मामले की शुरुआत कैसे हुई

यह जाँच नारकेलडांगा थाने के सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद अब्बासुद्दीन बिस्वास की रिपोर्ट के बाद शुरू हुई थी। पुलिस ने 17 सितंबर को नारकेलडांगा निवासी तौसीफ आलम को पहले गिरफ्तार किया था, जिसकी पूछताछ में इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलीं। इसके बाद कुछ ही दिनों में तीन और संदिग्धों को हिरासत में लिया गया, और फिर शनिवार को एक साथ सात लोगों को पकड़ा गया।

रैकेट का तरीका और नेटवर्क

साइबर सेल के अनुसार, आरोपी विभिन्न लोगों से दस्तावेज़ एकत्र करते, उन्हें जाली बनाते और फिर उन पर सिम कार्ड जारी कराते थे। अलग-अलग समय पर अलग-अलग सिम कार्ड का इस्तेमाल कर ये ठगी को अंजाम देते थे, जिससे पकड़ में आना मुश्किल होता था।

पुलिस के मुताबिक आरोपी 'तौसीफ टेलीकॉम' और इसी तरह की अन्य कंपनियों की आड़ में काम कर रहे थे। साल्ट लेक के मकान में एक फर्जी कॉल सेंटर स्थापित किया गया था, जहाँ से ये लोन कंपनी के प्रतिनिधि बनकर पीड़ितों से संपर्क करते थे। इस रैकेट में पीड़ितों से लाखों रुपये की ठगी और वसूली का आरोप है।

पश्चिम बंगाल तक कैसे पहुँचा गैंग

पुलिस की जाँच में सामने आया कि सुंदर नाम का एक व्यक्ति इन सातों आरोपियों को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से पश्चिम बंगाल लेकर आया था। यहाँ साल्ट लेक में ठिकाना बनाकर इन्होंने ऑपरेशन शुरू किया। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर अंतर-राज्यीय साइबर अपराध गिरोहों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है, और ये गिरोह प्रायः उन राज्यों में ठिकाना बनाते हैं जो उनके मूल राज्य से दूर हों।

बरामद सामग्री

छापे के दौरान पुलिस ने मकान से कई स्मार्टफोन और कीपैड फोन बरामद किए। जाँचकर्ताओं के अनुसार इन उपकरणों का इस्तेमाल बारी-बारी से अलग-अलग सिम कार्ड डालकर ठगी के लिए किया जाता था, ताकि कोई एक नंबर ट्रेस न हो सके।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि नारकेलडांगा थाने में दर्ज मामले के आधार पर जाँच जारी है। पुलिस अब सुंदर नामक मुख्य सूत्रधार की तलाश में है, जिसने आरोपियों को पश्चिम बंगाल लाने की व्यवस्था की थी। साइबर सेल इस पूरे नेटवर्क के और सदस्यों की पहचान करने में जुटी है, और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ताकि स्थानीय पहचान मुश्किल हो। फर्जी सिम कार्ड आधारित ठगी का यह तरीका देशभर में साइबर अपराध की एक बड़ी चुनौती बन चुका है, लेकिन दूरसंचार कंपनियों के KYC तंत्र की खामियाँ इस समस्या की जड़ हैं, जो अक्सर मुख्यधारा की कवरेज में अनदेखी रह जाती हैं। मात्र गिरफ्तारियाँ पर्याप्त नहीं हैं — असली सवाल यह है कि फर्जी दस्तावेज़ों पर सिम कार्ड जारी करने वाले सिस्टम में आखिर कौन सी चूक है और उसे कौन जवाबदेह ठहराएगा।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता में सिम कार्ड फ्रॉड रैकेट क्या था?
यह एक अंतर-राज्यीय साइबर ठगी का रैकेट था, जिसमें आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लोग कोलकाता के साल्ट लेक में फर्जी कॉल सेंटर चला रहे थे। आरोपी फर्जी दस्तावेजों से सिम कार्ड हासिल कर पीड़ितों को लोन कंपनी के प्रतिनिधि बनकर ठगते थे।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
अब तक कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पहली गिरफ्तारी 17 सितंबर को तौसीफ आलम की हुई थी, इसके बाद तीन और, और फिर 26 सितंबर को सात आरोपी पकड़े गए।
आरोपियों का तरीका क्या था?
आरोपी विभिन्न लोगों के दस्तावेज़ इकट्ठा कर उन्हें जाली बनाते और उनसे सिम कार्ड जारी कराते थे। फिर अलग-अलग फोन पर बारी-बारी से ये सिम लगाकर ठगी करते थे, ताकि ट्रेसिंग मुश्किल हो। वे 'तौसीफ टेलीकॉम' जैसे नामों की आड़ में काम करते थे।
जाँच की शुरुआत कैसे हुई?
नारकेलडांगा थाने के सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद अब्बासुद्दीन बिस्वास की रिपोर्ट के आधार पर जाँच शुरू हुई। 17 सितंबर को तौसीफ आलम की गिरफ्तारी और उसकी पूछताछ ने इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया।
क्या और गिरफ्तारियाँ होंगी?
पुलिस मुख्य सूत्रधार सुंदर की तलाश कर रही है, जो इन आरोपियों को पश्चिम बंगाल लाया था। साइबर सेल नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान में जुटी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ होने की संभावना जताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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