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संबलपुर साइबर पुलिस का फर्जी सिम रैकेट पर शिकंजा, 3 गिरफ्तार; जामताड़ा कनेक्शन की जांच

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संबलपुर साइबर पुलिस का फर्जी सिम रैकेट पर शिकंजा, 3 गिरफ्तार; जामताड़ा कनेक्शन की जांच

सारांश

संबलपुर साइबर पुलिस ने फर्जी सिम कार्ड रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए 3 आरोपियों को दबोचा। आरोपी ग्राहकों के दस्तावेजों से एकाधिक सिम बनाकर झारखंड के जामताड़ा में साइबर अपराधियों को बेचते थे। 120 सीलबंद सिम कार्ड समेत अहम सामग्री जब्त।

मुख्य बातें

संबलपुर साइबर पुलिस ने 24 सितंबर 2026 को फर्जी सिम रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपी हैं — सूरज बाग (24) , मालती ओराम उर्फ माला (29) और पापू उर्फ शेख परवेज (32) ।
आरोपी ग्राहकों के दस्तावेजों से एक नंबर पर कई सिम बनाते थे; कुछ सिम झारखंड के जामताड़ा में साइबर ठगी के लिए उपयोग होते थे।
जब्त सामग्री में 120 सीलबंद एयरटेल सिम , 4 मोबाइल फोन , बैंक पासबुक, आधार कार्ड और QR कोड स्कैनर शामिल।
यह मामला केस नंबर 34/26 के तहत संबलपुर साइबर पुलिस स्टेशन में 22 सितंबर 2026 को दर्ज हुआ था।
पुलिस अन्य संदिग्धों, कुल सिम की संख्या और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है।

ओडिशा के संबलपुर में साइबर पुलिस ने 24 सितंबर 2026 को एक फर्जी सिम कार्ड रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोप है कि ये लोग ग्राहकों के पहचान दस्तावेजों का दुरुपयोग कर एक ही नंबर पर कई सिम कार्ड बनाते थे और उन्हें साइबर अपराधियों को बेचते थे। जांच में कथित तौर पर झारखंड के जामताड़ा से इस रैकेट के तार जुड़े होने की बात सामने आई है।

कौन हैं गिरफ्तार आरोपी

संबलपुर जिला पुलिस ने जिन तीन आरोपियों को हिरासत में लिया, उनकी पहचान सूरज बाग (24), मालती ओराम उर्फ माला (29) और पापू उर्फ शेख परवेज (32) के रूप में की गई है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई 22 सितंबर 2026 को संबलपुर साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज केस नंबर 34/26 की जांच के दौरान हुई।

रैकेट का तरीका

अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ग्राहकों के पहचान दस्तावेजों का उपयोग कर एक ही नंबर पर एकाधिक सिम कार्ड तैयार करते थे। एक सिम असली ग्राहक को दे दिया जाता था, जबकि शेष सिम कार्ड इस गिरोह द्वारा अपने पास रखकर अन्य लोगों को बेचे जाते थे।

जांच में यह भी पता चला कि इनमें से कुछ सिम कार्ड का उपयोग कथित तौर पर झारखंड के जामताड़ा में साइबर ठगी के लिए किया जा रहा था। जामताड़ा देश में साइबर अपराध के एक प्रमुख केंद्र के रूप में पहले भी राष्ट्रीय जांच एजेंसियों की निगाह में रहा है। पुलिस ने बताया कि रैकेट से अर्जित कमाई गिरोह के सदस्यों के बीच बांटी जाती थी।

जब्त सामग्री

पुलिस ने आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन, चार सक्रिय सिम कार्ड, 120 सीलबंद खाली एयरटेल सिम कार्ड, तीन बैंक पासबुक, एक चेकबुक, एक आधार कार्ड, एक फोनपे QR कोड स्कैनर, चार हलफनामे, एक मकान किराया समझौता, 10 एयरटेल पैम्फलेट और चार एयरटेल 5G Plus साइनबोर्ड बरामद किए हैं। बरामद सामग्री से स्पष्ट है कि आरोपी एयरटेल के प्राधिकृत रिटेलर के रूप में काम करने का दिखावा कर रहे थे।

जांच की दिशा और विशेषज्ञ दृष्टिकोण

अधिकारियों ने बताया कि जांच का दायरा अब रैकेट में शामिल अन्य लोगों, बनाए और वितरित किए गए सिम कार्डों की कुल संख्या, उन्हें खरीदने वाले व्यक्तियों और इसमें शामिल वित्तीय लेनदेन तक फैला दिया गया है। जामताड़ा से कथित संबंधों की जांच इस मामले का सबसे संवेदनशील पहलू बनकर उभरी है।

गौरतलब है कि फर्जी और धोखाधड़ी से प्राप्त सिम कार्ड साइबर अपराधियों के सबसे प्रमुख हथियारों में से एक हैं। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार और दूरसंचार विभाग (DoT) फर्जी सिम कार्ड पर लगाम कसने के लिए कड़े सत्यापन नियम लागू कर रहे हैं।

आगे क्या

पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और अन्य संदिग्धों की पहचान की प्रक्रिया चल रही है। झारखंड पुलिस के साथ समन्वय की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है। इस मामले में आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो 120 सीलबंद सिम कार्ड एक छोटे से गिरोह के पास कैसे पहुँचे। इस मामले में एयरटेल की वितरण श्रृंखला में कहीं न कहीं चूक की जांच भी उतनी ही जरूरी है जितनी गिरोह के बाकी सदस्यों की। बिना वितरण-स्तर की जवाबदेही के, ऐसे रैकेट नए रूप में फिर उभरते रहेंगे।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संबलपुर फर्जी सिम रैकेट क्या है?
यह एक आपराधिक गिरोह है जो ग्राहकों के पहचान दस्तावेजों का दुरुपयोग कर एक ही मोबाइल नंबर पर कई सिम कार्ड बनाता था। असली ग्राहक को एक सिम देकर बाकी सिम साइबर अपराधियों को बेच दिए जाते थे।
इस रैकेट में जामताड़ा का क्या कनेक्शन है?
जांच में कथित तौर पर पता चला है कि इस रैकेट से प्राप्त कुछ सिम कार्ड झारखंड के जामताड़ा में साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे। पुलिस इस कनेक्शन की विस्तृत जांच कर रही है।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
गिरफ्तार तीन आरोपी हैं — सूरज बाग (24), मालती ओराम उर्फ माला (29) और पापू उर्फ शेख परवेज (32)। इन पर ग्राहकों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी सिम बनाने और बेचने का आरोप है।
पुलिस ने क्या सामग्री जब्त की?
पुलिस ने 120 सीलबंद एयरटेल सिम कार्ड, 4 मोबाइल फोन, 4 सक्रिय सिम, बैंक पासबुक, आधार कार्ड, फोनपे QR कोड स्कैनर, हलफनामे और एयरटेल के साइनबोर्ड व पैम्फलेट जब्त किए हैं।
फर्जी सिम कार्ड साइबर अपराध में कैसे इस्तेमाल होते हैं?
फर्जी सिम कार्ड साइबर अपराधियों को गुमनाम रहकर ठगी करने में मदद करते हैं। ये सिम असली व्यक्ति के नाम पर होते हैं, इसलिए अपराधी आसानी से पकड़ में नहीं आते। अधिकारियों के अनुसार, ऑनलाइन धोखाधड़ी के अधिकांश मामलों में ऐसे फर्जी सिम की भूमिका होती है।
राष्ट्र प्रेस
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