31 जुलाई 2026
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क्या राजस्थान में 1100 करोड़ रुपए की साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ? 5 गिरफ्तार

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क्या राजस्थान में 1100 करोड़ रुपए की साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ? 5 गिरफ्तार

सारांश

क्या राजस्थान में पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया है? जानें कैसे 1,100 करोड़ रुपए की ठगी हुई और इस गिरोह के मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इस घटना ने कई राज्यों को प्रभावित किया है।

मुख्य बातें

साइबर सुरक्षा की जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
कानून प्रवर्तन एजेंसियों को तकनीकी सहायता की आवश्यकता है।
इस तरह के साइबर अपराध से बचने के लिए सतर्क रहना चाहिए।
सामाजिक मीडिया पर फर्जी निवेश योजनाओं से सावधान रहें।
गिरोहों के कार्यों की पहचान करना ज़रूरी है।

जयपुर, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पुलिस ने साइबर अपराध के एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। राजस्थान के जोधपुर कमिश्नरेट पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसमें 1,100 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी की गई थी।

यह गिरोह भारत, कंबोडिया, सिंगापुर और मलेशिया में सक्रिय था, और इसका मुख्यालय कंबोडिया में था। इस विशेष कार्रवाई का नेतृत्व पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश ने किया।

जांच में सामने आया कि अपराधियों ने भारतीय सिम कार्ड का अवैध उपयोग कर व्हाट्सएप के माध्यम से लोगों से संपर्क किया और उन्हें नकली निवेश तथा ऑनलाइन ट्रेडिंग योजनाओं में फंसाया। तकनीकी जांच से पता चला कि ये कॉल और संदेश कंबोडिया के प्रीआ सिहानूक से भेजे गए थे, भले ही भारतीय मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया गया था।

पुलिस ने लगभग 2.30 लाख मोबाइल सिम कार्ड्स के रिकॉर्ड की समीक्षा की और पाया कि लगभग 36,000 भारतीय सिम कंबोडिया में रोमिंग कर रहे थे। इनमें से 5,300 सिम कार्ड्स का उपयोग भारत के कई राज्यों में 1,100 करोड़ रुपए के फ्रॉड के लिए किया गया।

गिरोह की कार्यप्रणाली यह थी कि ग्राहक को केवल एक सिम दिया जाता था, जबकि दूसरा सिम गिरोह अपने पास रखता था। बाद में ये अतिरिक्त सिम कार्ड्स महंगी कीमत पर बेचे जाते और मलेशियाई नागरिकों के जरिए कंबोडिया भेजे जाते, जहां उनका उपयोग साइबर फ्रॉड के लिए किया जाता था।

अब तक पांच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें हेमंत पंवार (सिम वितरक, नागौर), रामावतार राठी (सिम बिक्री एजेंट), हरीश मलाकार (अजमेर), मोहम्मद शरीफ (जोधपुर), और संदीप भट्ट (लुधियाना, पंजाब) शामिल हैं।

चार मलेशियाई नागरिकों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया है, जिनके जरिए सिम कार्ड कंबोडिया भेजे गए थे।

साइबर फ्रॉड से प्रभावित राज्यों में महाराष्ट्र: 248.21 करोड़ रुपए, तमिलनाडु: 225.50 करोड़ रुपए, दिल्ली: 73.67 करोड़ रुपए, तेलंगाना: 73.43 करोड़ रुपए, कर्नाटक: 71.79 करोड़ रुपए, और राजस्थान: 25.71 करोड़ रुपए शामिल हैं।

पुलिस अब लगभग 5,000 संदिग्ध सिम कार्ड्स और उनके व्हाट्सएप अकाउंट्स को ब्लॉक करने की प्रक्रिया में है। इसके साथ ही, एक विशेष जांच टीम बनाई गई है, जो मामले की गहन जांच करेगी और अन्य आरोपियों, लाभार्थियों और वित्तीय लेनदेन का पता लगाएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह साइबर फ्रॉड रैकेट किस प्रकार काम करता था?
यह रैकेट भारतीय सिम कार्ड का अवैध उपयोग करते हुए व्हाट्सएप के जरिए लोगों से संपर्क करके उन्हें नकली निवेश योजनाओं में फंसाता था।
कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
अब तक कुल पांच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
कौन से राज्य इस साइबर फ्रॉड से प्रभावित हुए हैं?
इस साइबर फ्रॉड से महाराष्ट्र , तमिलनाडु , दिल्ली , तेलंगाना , कर्नाटक , और राजस्थान प्रभावित हुए हैं।
पुलिस द्वारा क्या कार्रवाई की जा रही है?
पुलिस लगभग 5,000 संदिग्ध सिम कार्ड्स और उनके व्हाट्सएप अकाउंट्स को ब्लॉक करने की प्रक्रिया में है।
क्या इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं?
जी हां, विशेष जांच टीम मामले की गहन जांच कर रही है, जिससे और आरोपियों का पता लगाया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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