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लोकसभा में ओम बिरला को हटाने का प्रस्ताव पेश, 10 घंटे की चर्चा का किया गया निर्णय

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लोकसभा में ओम बिरला को हटाने का प्रस्ताव पेश, 10 घंटे की चर्चा का किया गया निर्णय

सारांश

लोकसभा में ओम बिरला को हटाने के लिए कांग्रेस द्वारा पेश किया गया अविश्वास प्रस्ताव, 10 घंटे की बहस का कार्यक्रम। जानिए इस विवाद के पीछे के कारण और सदन में उठे मुद्दे।

मुख्य बातें

कांग्रेस ने ओम बिरला को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया।
सदन में इस प्रस्ताव पर 10 घंटे की बहस होगी।
विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है।
सदन की कार्यवाही जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में चल रही है।
ओवैसी ने प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नियमों का हवाला दिया।

नई दिल्ली, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में मंगलवार को एक तीव्र बहस शुरू हुई जब कांग्रेस ने स्पीकर ओम बिरला को उनके पद से हटाने के लिए एक अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव के पेश होते ही सदन में प्रक्रिया और नियमों पर गहन बहस छिड़ गई, और अंततः सदन ने इस प्रस्ताव पर चर्चा करने की अनुमति दी। इस मुद्दे पर 10 घंटे की बहस की योजना बनाई गई।

कांग्रेस के सांसद मोहम्मद जावेद ने औपचारिक रूप से यह प्रस्ताव पेश किया, जिसमें 118 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर शामिल हैं। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही के दौरान 'पक्षपातपूर्ण रवैया' अपनाया है। उनका कहना है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने का मौका नहीं दिया गया, जिसके चलते असंतोष बढ़ा।

प्रस्ताव के पेश होने के बाद सदन में एक नया विवाद उत्पन्न हो गया। सवाल यह उठाया गया कि जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन है, तो सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कौन करेगा। उस समय सदन की कार्यवाही जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में चल रही थी।

इस मुद्दे पर एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी और तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया। ओवैसी ने संसदीय नियमों का हवाला देते हुए कहा कि जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव चर्चा में हो, तो स्पीकर या उनके द्वारा नामित व्यक्ति को कार्यवाही नहीं चलानी चाहिए।

ओवैसी ने यह भी कहा कि लोकसभा में उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) की नियुक्ति नहीं हुई है। ऐसे में जो सदस्य चेयर पर हैं, उन्हें स्पीकर की स्वीकृति से ही नामित किया गया है। इसलिए उनके द्वारा इस प्रस्ताव पर चर्चा कराना उचित नहीं होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि बहस शुरू होने से पहले सदन को इस बात पर सहमति बनानी चाहिए कि कार्यवाही की अध्यक्षता कौन करेगा।

भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया भी आई। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि संसदीय नियमों के अनुसार चेयर पर बैठा कोई भी सदस्य स्पीकर के समान अधिकारों का प्रयोग करते हुए कार्यवाही चला सकता है।

संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने भी भाजपा सांसद दुबे की बात का समर्थन किया और कहा कि नियम स्पष्ट रूप से चेयर को यह अधिकार देते हैं।

वहीं, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अभी तक डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति नहीं की गई है, जो एक गंभीर मुद्दा है। उन्होंने कहा कि बहस आगे बढ़ाने से पहले सदन को इस बात पर सहमति बनानी चाहिए कि कार्यवाही कौन संचालित करेगा।

इस दौरान भाजपा सांसद रवि शंकर प्रसाद ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि जो सदस्य चेयर पर बैठा है, उसे सदन की कार्यवाही संचालित करने का पूरा अधिकार है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पाल ने कहा कि स्पीकर का पद खाली नहीं है, इसलिए चेयर को कार्यवाही चलाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी बताया कि स्पीकर ओम बिरला ने खुद इस बहस के दौरान सदन की अध्यक्षता न करने का निर्णय लिया है।

जगदंबिका पाल ने कहा कि स्पीकर ने नोटिस में मौजूद शुरुआती तकनीकी गलतियों को सुधारने में उदारता दिखाई और आवश्यक सुधारों की सूचना खुद जारी की।

कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने औपचारिक रूप से स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव सदन में पेश किया। अंत में यह तय किया गया कि लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 10 घंटे तक चर्चा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें कांग्रेस ने स्पीकर ओम बिरला को हटाने का प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव के पीछे विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है। यह घटनाक्रम राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और इसके परिणाम दूरगामी हो सकते हैं।
RashtraPress
16 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस ने ओम बिरला को हटाने का प्रस्ताव क्यों पेश किया?
कांग्रेस का आरोप है कि ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है।
इस प्रस्ताव पर चर्चा कब होगी?
इस प्रस्ताव पर कुल 10 घंटे की बहस की योजना बनाई गई है।
इस प्रस्ताव पर कितने सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं?
इस प्रस्ताव पर 118 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर हैं।
क्या स्पीकर ओम बिरला इस बहस में शामिल होंगे?
स्पीकर ओम बिरला ने खुद इस बहस के दौरान सदन की अध्यक्षता न करने का निर्णय लिया है।
सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कौन करेगा?
सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता इस समय जगदंबिका पाल कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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