स्पीकर ओम बिरला ने सदन की गरिमा बढ़ाने का किया संकल्प, अविश्वास प्रस्ताव पर दी प्रतिक्रिया

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स्पीकर ओम बिरला ने सदन की गरिमा बढ़ाने का किया संकल्प, अविश्वास प्रस्ताव पर दी प्रतिक्रिया

सारांश

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अविश्वास प्रस्ताव के बाद सदन में अपने विचार साझा किए, जिसमें उन्होंने सदन की गरिमा और मर्यादा बढ़ाने के अपने प्रयासों का उल्लेख किया।

मुख्य बातें

सदन की गरिमा की वृद्धि पर जोर सभी सदस्यों को विचार व्यक्त करने का अवसर लोकतंत्र की मजबूती के लिए बोलने का महत्व संविधान के अनुच्छेद 93 का उल्लेख सदन में विचारों की विविधता को स्वीकार करना

नई दिल्ली, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के खारिज होने के बाद, स्पीकर ओम बिरला ने गुरुवार को अपना आसन ग्रहण किया। उन्होंने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि मेरा निरंतर प्रयास है कि सदन की गरिमा, मर्यादा और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती रहे।

लोकसभा स्पीकर ने आगे कहा, "मैंने हमेशा यह सुनिश्चित किया कि सदन के सभी सदस्य नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अपने विचार साझा करें। मैं सभी सदस्यों को पर्याप्त अवसर देने का प्रयास करता हूं। मेरा उद्देश्य है कि यह सदन समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज बने। मैंने उन सदस्यों को भी प्रेरित करने का प्रयास किया जो बोलने में संकोच करते हैं। मैंने अपने दोनों कार्यकाल में सदन में बोलने के लिए सदस्यों को आमंत्रित किया है, क्योंकि सदन में बोलना लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है और सरकार की जवाबदेही को सुनिश्चित करता है।"

उन्होंने यह भी कहा, "यह सदन विचारों और चर्चाओं का जीवंत मंच है। हमारे संसदीय लोकतंत्र में सहमति और असहमति की महान परंपरा रही है। जब संविधान निर्माताओं ने स्वतंत्र भारत के लिए संविधान का निर्माण किया, तब संसदीय लोकतंत्र की व्यवस्था को अपनाया गया। आज, संसदीय लोकतंत्र शासन चलाने की सबसे प्रभावी विधि है। यह संसद केवल कानून बनाने का मंच नहीं है, बल्कि राष्ट्र की लोकतांत्रिक चेतना का केंद्र भी है।"

स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 93 में अध्यक्ष के निर्वाचन का प्रावधान है। मुझे इस सदन ने दूसरी बार अध्यक्ष पद का दायित्व सौंपा है। मैंने सदन की कार्यवाही को निष्पक्षता, अनुशासन और संतुलन के साथ संचालित करने का प्रयास किया है।

अविश्वास प्रस्ताव पर उन्होंने कहा, "मंगलवार को विपक्ष के कुछ सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया। मैं अपने नैतिक कर्तव्यों का पालन करते हुए सदन की कार्यवाही से अलग रहा। पिछले दो दिनों में सदन ने लोकतंत्र की महत्वपूर्ण प्रक्रिया को पूरा किया। इस चर्चा में कई विचार, दृष्टिकोण और भावनाएं सदन के सामने रखी गईं, और मैंने सभी सदस्यों की बातों को गंभीरता से सुना।"

अपने संबोधन में, स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि स्वतंत्र भारत के संसदीय इतिहास में तीसरी बार लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में दो दिन चर्चा हुई। 12 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई, ताकि सभी सदस्यों के विचार, तर्क और चिंताएं सदन के समक्ष आ सकें। उन्होंने कहा, "विपक्ष के नेताओं ने निष्पक्षता के अभाव की बात की। कुछ सदस्यों ने संसदीय लोकतंत्र की व्याख्या की और सदन की गरिमापूर्ण परंपराओं पर अपने विचार रखे।"

उन्होंने यह भी कहा कि यह सदन भारत के 140 करोड़ नागरिकों की संप्रभु इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है। यहां उपस्थित हर सदस्य लाखों नागरिकों के जनादेश के साथ आता है और उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को दूर करने की आशा भी लेकर आता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

स्पीकर ओम बिरला ने सदन की गरिमा और लोकतंत्र की मजबूती पर जोर दिया। उनका मानना है कि सभी सदस्यों को खुलकर अपने विचार रखने का अवसर मिलना चाहिए, जिससे लोकतंत्र और सशक्त बनता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओम बिरला ने सदन में क्या कहा?
ओम बिरला ने सदन की गरिमा बढ़ाने और सभी सदस्यों को अपने विचार व्यक्त करने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया।
अविश्वास प्रस्ताव पर बिरला का क्या दृष्टिकोण था?
उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव के दौरान नैतिक कर्तव्यों का पालन करते हुए सदन की कार्यवाही से अलग रहने का निर्णय लिया।
राष्ट्र प्रेस
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