लोकतंत्र का मजबूत विपक्ष: ओम बिरला की महत्वपूर्ण बातें
सारांश
Key Takeaways
- लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण है।
- सदन की कार्यवाही नियमों के अनुसार होती है।
- सभी सांसदों को बोलने का अवसर दिया जाता है।
- नियमों का उल्लंघन सदन की गरिमा को प्रभावित करता है।
- ओम बिरला ने लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने का वादा किया।
नई दिल्ली, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को लोकसभा में अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र में एक मजबूत विपक्ष का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि संसद में सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है और सदन की कार्यवाही हमेशा नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार ही संचालित होती है।
ओम बिरला ने उन सभी सांसदों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने उनकी कार्यप्रणाली से संबंधित मुद्दे उठाए। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे संसद में संवैधानिक गरिमा और मर्यादा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
विपक्ष द्वारा यह आरोप लगाए जाने पर कि उन्हें सदन में बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया, लोकसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि लोकसभा की कार्यवाही निर्धारित नियमों के अंतर्गत चलती है। उन्होंने कहा कि किसी भी सदस्य को सदन में बोलने से पहले स्पीकर की अनुमति लेना अनिवार्य है।
ओम बिरला ने यह भी बताया कि संसद में किसी भी फोटो, दस्तावेज, उद्धरण या छपी हुई सामग्री को पेश करने से पहले स्पीकर की अनुमति आवश्यक होती है। उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष ने कई बार इन नियमों का पालन नहीं किया, जिसके कारण उन्हें कठिन निर्णय लेने पड़े।
उन्होंने कहा कि भारत के लोकतंत्र और उसके संविधान पर सभी को गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा, "सदन में सहमति और असहमति की एक महान परंपरा है। मैंने हमेशा कोशिश की है कि सदन में संतुलन बना रहे और सभी की आवाज़ सुनी जाए।"
उन्होंने यह भी कहा कि संसद में सभी के लिए नियम समान हैं और किसी को भी नियमों से ऊपर नहीं रखा जा सकता। ओम बिरला ने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को भी सदन में बोलने से पहले नोटिस देना पड़ता है।
स्पीकर ने स्पष्ट किया कि नियमों से परे जाकर किसी को बोलने का अधिकार नहीं दिया जा सकता और सदन केवल प्रक्रिया के अनुसार ही चलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि चेयर के पास ऐसा कोई बटन नहीं होता जिससे किसी सांसद का माइक बंद या चालू किया जा सके। सदस्य तभी बोल सकते हैं जब उनकी बारी आती है।
सांसदों के निलंबन को लेकर उठे सवालों पर ओम बिरला ने कहा कि वे किसी भी सदस्य को निलंबित करना नहीं चाहते, लेकिन कभी-कभी सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए कठिन निर्णय लेने पड़ते हैं।
उन्होंने कहा, "मुझे ऐसे फैसले लेने में दुख होता है, लेकिन यह भी देखना चाहिए कि आखिर निलंबन की नौबत क्यों आती है। जब संसद के नियमों का उल्लंघन होता है, तब मुझे अपनी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है।"
उन्होंने बताया कि नियम 377 के तहत स्पीकर के पास सदन में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने की शक्ति होती है।
विपक्ष की महिला सांसदों के विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए स्पीकर ने कहा कि जब कुछ सांसद तख्तियां लेकर ट्रेजरी बेंच की ओर बढ़े, तब संसद की गरिमा की रक्षा के लिए उन्हें कार्रवाई करनी पड़ी।
ओम बिरला ने कहा कि उन्होंने हमेशा सदन की गरिमा बढ़ाने और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने की कोशिश की है और आगे भी इसी भावना के साथ काम करते रहेंगे।