ओम बिरला का सांसदों के नाम खुला पत्र: संसद की गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता

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ओम बिरला का सांसदों के नाम खुला पत्र: संसद की गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता

सारांश

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सांसदों को एक पत्र में संसद की गरिमा बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने इसे 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतीक बताया। इस पत्र में संसद परिसर की पवित्रता और मर्यादा बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है।

मुख्य बातें

संसद का परिसर एक पवित्र स्थल है।
लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना आवश्यक है।
सदन में अनुशासन और उच्च नैतिक आचरण होना चाहिए।
सभी सांसदों की जिम्मेदारी है कि वे गरिमा को बनाए रखें।
संसदीय लोकतंत्र में जनता का विश्वास महत्वपूर्ण है।

नई दिल्ली, 15 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला ने सभी सांसदों के लिए एक ओपन लेटर जारी कर संसद की गरिमा और मर्यादा बनाए रखने की गंभीर अपील की है। इस पत्र में उन्होंने संसद को देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था बताते हुए कहा कि यह 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है और इसका परिसर सभी के लिए पवित्र स्थल है।

ओम बिरला ने कहा, "भारत की संसद देश के 140 करोड़ नागरिकों की संप्रभु आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करने वाली सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है। संसद में व्यक्त होने वाली हर आवाज देश के करोड़ों नागरिकों की आशाओं, आकांक्षाओं और अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है। संसद भवन परिसर हम सब के लिए एक पवित्र स्थल है। सदन चर्चा, संवाद, सहमति-असहमति, विभिन्न विचारों एवं दृष्टिकोणों का प्रतिनिधित्व करती है। इस सदन की हमेशा उच्च मर्यादा एवं गौरवशाली परंपरा रही है। देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था के सदस्य होने के कारण देश की समस्त लोकतांत्रिक संस्थाओं की मर्यादा एवं प्रतिष्ठा बनाए रखने की हमारी जिम्मेदारी और भी अधिक हो जाती है।"

उन्होंने कहा, "लोकसभा के अध्यक्ष के रूप में मैं आपको यह पत्र केवल एक औपचारिक संवाद के रूप में नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति हमारी साझा जिम्मेदारी की भावना से लिख रहा हूँ। पिछले कुछ समय से हमारे कुछ माननीय सदस्यों द्वारा संसद परिसर में सभागृह के अंदर और बाहर हमारे संसदीय लोकतंत्र की गरिमा और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई जा रही है। सभागृह और संसद भवन परिसर के अंदर जिस प्रकार के बैनर, प्लेकार्ड और तख्तियों को प्रदर्शित किया जा रहा है, जिस प्रकार के शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है, जिस तरह का आचरण और व्यवहार किया जा रहा है, यह हम सभी के लिए गहरी चिन्ता का विषय है। इस स्थिति पर हम सभी को व्यक्तिगत एवं सामूहिक रूप से गंभीर चिंतन और विश्लेषण करने की आवश्यकता है।"

बिरला ने कहा कि हमारे सदन में सदैव मर्यादित चर्चा संवाद की गौरवशाली परंपरा रही है। पूर्व में भी जब-जब सदन के अंदर आचरण व्यवहार के स्तर में हास का अनुभव किया गया तब समय-समय पर सभी राजनीतिक दलों तथा अन्य हितधारकों द्वारा सम्मेलन आयोजित किए गए जिनमें हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और प्रतिष्ठा के संरक्षण और संवर्धन के विषय पर चर्चा संवाद हुआ। पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में भी इस विषय पर चर्चा की गई और संकल्प भी पारित किए गए। मैंने भी कई बार आपसे कार्य मंत्रणा समिति एवं राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठकों में और अन्य अवसरों पर आचरण और व्यवहार के उच्च मानक बनाए रखने के विषय पर आग्रह किया है।

सभी सांसदों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि मेरा आपसे विनम्र आग्रह है कि हमारे आचरण व्यवहार को पूरा देश देखता है एवं भारत की संसद से देश की समस्त लोकतांत्रिक संस्थाओं में संदेश जाता है। अब समय आ गया है जब हमें अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं की उच्च गरिमा और प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए गंभीर चिंतन व आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। विशेषकर, सभी राजनीतिक दलों के शीर्ष नेतृत्व एवं सदन में सभी दलों के नेताओं को, अपने-अपने सदस्यों में सभागृह और संसद भवन परिसर के अंदर अनुशासन और उच्च नैतिक आचरण एवं व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए, विशेष प्रयास करने होंगे।

उन्होंने आगे कहा कि यदि हम सब मिलकर इस दिशा में प्रयास करेंगे, तो निश्चित ही देश की जनता का संसदीय लोकतंत्र में विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा तथा सदन की प्रतिष्ठा और मर्यादा में निरंतर वृद्धि होगी। मुझे विश्वास है कि आप सभी इस महान संस्था की गौरवशाली परंपराओं को बनाए रखने में अपना पूर्ण सहयोग देंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे सभी सांसदों और राजनीतिक दलों के लिए चिंतन का विषय हैं। यदि सांसद इस पत्र पर ध्यान देते हैं, तो यह लोकतांत्रिक संस्थाओं की मर्यादा को मजबूत बनाने में मदद करेगा।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओम बिरला ने सांसदों को क्या लिखा है?
ओम बिरला ने सांसदों को एक ओपन लेटर में संसद की गरिमा और मर्यादा बनाए रखने की अपील की है।
संसद की गरिमा का क्या महत्व है?
संसद की गरिमा भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली का प्रतीक है, जो देश के 140 करोड़ नागरिकों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है।
राष्ट्र प्रेस
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