क्या सुनियोजित व्यवधान लोकतंत्र के लिए हानिकारक है? लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

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क्या सुनियोजित व्यवधान लोकतंत्र के लिए हानिकारक है? लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

सारांश

नई दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में चल रहे व्यवधानों पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सुनियोजित व्यवधान लोकतंत्र के लिए हानिकारक है। आइए जानते हैं उनके विचार और सदन की कार्यवाही पर उनके संदेश।

मुख्य बातें

सुनियोजित व्यवधान लोकतंत्र के लिए हानिकारक हैं।
सदन में चर्चा के लिए सही तरीका अपनाना चाहिए।
तख्तियां और नारेबाजी कार्यवाही को बाधित करते हैं।
लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन संसदीय परंपरा का पालन होना चाहिए।
सदन की कार्यवाही को गंभीरता से लेना चाहिए।

नई दिल्ली, २५ जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। मानसून सत्र के पांचवे दिन शुक्रवार को सदन में विपक्षी सांसदों द्वारा जोरदार हंगामा किया गया, जिसके कारण लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दोपहर दो बजे तक सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया। उन्होंने कहा कि सुनियोजित व्यवधान लोकतंत्र के लिए अच्छे नहीं होते हैं।

ओम बिरला ने कहा, "मैंने हमेशा यह प्रयास किया है कि सदन सुचारू रूप से चले, विशेष रूप से प्रश्नकाल के दौरान। मेरा हमेशा यही प्रयास रहता है कि प्रश्नकाल माननीय सदस्यों का समय होता है, और इस दौरान व्यापक चर्चा होनी चाहिए, जिसमें सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित हो। लेकिन पिछले कुछ दिनों से मैं देख रहा हूं कि सदन को जानबूझकर बाधित किया जा रहा है। तख्तियां लहराई जा रही हैं और नारेबाजी हो रही है।"

उन्होंने आगे कहा, "यदि आप किसी मुद्दे या विषय पर चर्चा करना चाहते हैं, तो आप आएं। मैं हर मुद्दे पर सरकार से बात करके चर्चा का रास्ता निकाल सकता हूं। लेकिन सदन के अंदर या बाहर केवल तख्तियां लहराकर और नारेबाजी करके बाधा डालना उचित नहीं है। यदि आपको लगता है कि कोई मुद्दा महत्वपूर्ण है, तो आएं, मैं सरकार के प्रतिनिधियों और आपको बुलाकर मुद्दों पर चर्चा करवाऊंगा। लेकिन यह तरीका ठीक नहीं है।"

ओम बिरला ने कहा, "दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में हमारे पीछे लाखों लोग बड़ी आशाओं के साथ सदन की कार्यवाही को देखते हैं। वे उम्मीद करते हैं कि उनके मुद्दों, उनकी आकांक्षाओं और उनकी चिंताओं पर सदन में चर्चा होगी। तख्तियां लेकर नारेबाजी करना उचित नहीं है। यदि आप सदन नहीं चलाना चाहते और चर्चा में हिस्सा नहीं लेना चाहते, तो यह नियोजित गतिरोध लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।"

उन्होंने कहा, "मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप आएं और हर विषय पर चर्चा के लिए मैं आपकी सहमति बनाऊंगा। लेकिन प्रश्नकाल के दौरान केवल उन माननीय सदस्यों को बोलने का अवसर दिया जाता है जिनका प्रश्न होता है। यह हमारी अच्छी परंपरा रही है, और हमें इसका पालन करना चाहिए। यदि किसी विषय पर गतिरोध हो, तो हमें इस परंपरा को बनाए रखना चाहिए।"

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अंत में कहा, "लोकतंत्र में आपको अपनी असहमति दर्ज कराने का अधिकार है। लेकिन असहमति को संसदीय लोकतंत्र की परंपराओं और मर्यादाओं के अनुसार व्यक्त करना चाहिए।"

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह जनता की उम्मीदों पर भी पानी फेरते हैं। हमें यह समझना होगा कि असहमति और बहस का अधिकार सभी को है, लेकिन इसे सही तरीके से व्यक्त करना चाहिए।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओम बिरला ने क्या कहा?
ओम बिरला ने सदन में व्यवधानों की निंदा करते हुए कहा कि सुनियोजित व्यवधान लोकतंत्र के लिए हानिकारक है।
क्या सदन की कार्यवाही स्थगित की गई थी?
हाँ, विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही को स्थगित किया गया।
ओम बिरला ने सदन के सदस्यों से क्या आग्रह किया?
उन्होंने सदस्यों से चर्चा के लिए आने का आग्रह किया और कहा कि तख्तियों और नारेबाजी से कोई समाधान नहीं निकलता।
राष्ट्र प्रेस
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