लोकतंत्र की रक्षा के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाना पड़ा: गौरव गोगोई
सारांश
Key Takeaways
- अविश्वास प्रस्ताव का उद्देश्य लोकतंत्र की रक्षा करना है।
- गौरव गोगोई ने व्यक्तिगत संबंधों को महत्व दिया।
- 118 विपक्षी सांसदों ने प्रस्ताव का समर्थन किया।
- सदन की कार्यवाही में अध्यक्षता का मुद्दा विवादित बना।
- स्पीकर ओम बिरला ने बहस के दौरान अध्यक्षता न करने का निर्णय लिया।
नई दिल्ली, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस ने मंगलवार को लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को उनके पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि हमें यह प्रस्ताव लाने में खुशी नहीं हो रही है क्योंकि ओम बिरलाजी के साथ हमारे व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं। फिर भी, लोकतंत्र की रक्षा के लिए हमें ऐसा कदम उठाना आवश्यक हो गया है। यह ओम बिरला जी पर कोई व्यक्तिगत आरोप नहीं है।
गोगोई ने यह भी कहा कि सदन के हर सदस्य का यह कर्तव्य है कि वह संसद की गरिमा, उसके कानूनों और नियमों की रक्षा करे। इसी कर्तव्य के तहत आज हम यह अविश्वास प्रस्ताव पेश कर रहे हैं। व्यक्तिगत स्तर पर ओम बिरला जी पर हम कोई हमला नहीं करना चाहते। यह कदम सदन की गरिमा, संविधान की रक्षा और भारत के लोगों के लोकतंत्र पर विश्वास को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने इस अविश्वास प्रस्ताव को औपचारिक रूप से सदन में पेश किया। इस प्रस्ताव पर 118 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर हैं। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही के दौरान 'पक्षपातपूर्ण रवैया' अपनाया है। विपक्ष का कहना है कि राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे असंतोष बढ़ा है।
प्रस्ताव पेश होने के बाद सदन में नया विवाद खड़ा हो गया। सवाल यह उठा कि जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन है, तब सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कौन करेगा। उस समय सदन की कार्यवाही जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में चल रही थी। इस मुद्दे पर एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी और तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया। ओवैसी ने संसदीय नियमों का हवाला देते हुए कहा कि जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव चर्चा में हो, तो स्पीकर या उनके द्वारा नामित व्यक्ति को कार्यवाही नहीं चलानी चाहिए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पाल ने कहा कि स्पीकर का पद खाली नहीं है, इसलिए चेयर को कार्यवाही चलाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी बताया कि स्पीकर ओम बिरला ने खुद इस बहस के दौरान सदन की अध्यक्षता न करने का निर्णय लिया है।