विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला की निष्पक्षता पर उठाए सवाल, कहा- "भाजपा का पक्ष ले रहे हैं"
सारांश
Key Takeaways
- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं।
- विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया है।
- महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की आवश्यकता है।
- भाजपा पर पक्षपात का आरोप लगाया गया है।
- संसद में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मांग की गई है।
नई दिल्ली, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाए जा रहे अविश्वास प्रस्ताव ने संसद के राजनीतिक माहौल को उत्तेजित कर दिया है। विपक्षी दलों के नेताओं ने जहां एक ओर स्पीकर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी ओर सत्र के दौरान अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता जताई है।
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव आ रहा है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण कई अन्य मुद्दे हैं जिन पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ओम बिरला जानबूझकर भाजपा का पक्ष ले रहे हैं, जबकि स्पीकर को इस तरह का कार्य नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर भारत की नीति स्पष्ट होनी चाहिए। देश को यह जानने का अधिकार है कि भारत सरकार और विदेश मंत्रालय इस मुद्दे पर क्या कदम उठा रहे हैं।
कांग्रेस सांसद रजनी पाटिल ने आरोप लगाया कि स्पीकर ने अलोकतांत्रिक तरीके से विपक्ष के नेता को सदन में बोलने का मौका नहीं दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर जवाब मांगेगा और इसी कारण स्पीकर को पद से हटाने की मांग की जा रही है।
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने भी स्पीकर की निष्पक्षता पर प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि स्पीकर का पद पूरी तरह निष्पक्ष होना चाहिए, लेकिन वर्तमान स्थिति में ऐसा नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के राहुल गांधी से राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन वह विपक्ष के नेता हैं और उन्हें सदन में अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने कहा कि मौजूदा स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव इसलिए लाया जा रहा है क्योंकि विपक्ष के नेताओं को सदन में बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संसद की सबसे बड़ी जिम्मेदारी महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुली और निष्पक्ष बहस कराना है।
इसी मुद्दे पर कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष को अविश्वास प्रस्ताव लाने का अधिकार है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इस मुद्दे पर उचित और विस्तृत चर्चा सुनिश्चित करे। साथ ही, उन्होंने मध्य-पूर्व के हालात को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीयों और वहां काम करने वाले लोगों की सुरक्षा और आजीविका को लेकर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।