रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी के संसद और विदेश में आचरण पर उठाए गंभीर सवाल

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रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी के संसद और विदेश में आचरण पर उठाए गंभीर सवाल

सारांश

भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि संसदीय उपायों का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी के आचरण पर भी सवाल उठाए, जो राजनीतिक चर्चाओं में गरमी ला सकता है।

Key Takeaways

  • संसदीय दुरुपयोग का मुद्दा महत्वपूर्ण है।
  • रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी के आचरण पर सवाल उठाए।
  • आपातकाल के दौरान कांग्रेस की भूमिका पर चर्चा हुई।
  • संसद ने अपनी गरिमा को बनाए रखा।
  • समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण की स्थिति को याद किया गया।

नई दिल्ली, ११ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्ष की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के संसदीय उपायों का उपयोग राजनीतिक या व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं होना चाहिए।

लोकसभा में अपनी बात रखते हुए, प्रसाद ने कहा कि अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव पेश करने की प्रक्रिया को किसी समूह के नेता के अहंकार को संतुष्ट करने के लिए नहीं इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ विपक्ष का हथियार किसी नेता के अहंकार को संतुष्ट करने के लिए नहीं होना चाहिए। यह एक महत्वपूर्ण बात है।"

रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधा, उनके संसद के भीतर और विदेश यात्रा के दौरान के आचरण पर सवाल उठाते हुए। उन्होंने कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता को संसदीय आचरण की शिक्षा की आवश्यकता है।

प्रसाद ने कहा, "वेणुगोपाल को राहुल गांधी को विपक्ष के आचरण के बारे में सिखाना चाहिए।" उन्होंने विपक्ष के नेता द्वारा पूर्व सेना प्रमुख के अप्रकाशित संस्मरण के अंश पढ़ने की भी कड़ी आलोचना की। हालांकि, प्रसाद की टिप्पणियों पर विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी।

प्रसाद ने यह भी कहा कि संसद ने कई संकट भरे क्षणों का सामना किया है, लेकिन उसने अपनी गरिमा को बनाए रखा है और संकटों से उबरने में सफल रही है।

उन्होंने अतीत के विवादों का हवाला देते हुए बताया कि कैसे सांसदों को दुर्व्यवहार के लिए निष्कासित किया गया था। प्रसाद ने कहा, "कल चर्चा में ११ सांसदों को सदन से निष्कासित किया गया क्योंकि उन्होंने सवाल पूछने के लिए पैसे लिए थे और सदन में काली मिर्च भी फेंकी गई थी। फिर भी, संसद ने हमेशा अपनी गरिमा को बनाए रखा है।"

उन्होंने आपातकाल के दौरान कांग्रेस पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया और कहा कि उस समय विपक्ष के सभी सदस्य जेल में थे। इससे सदन का कार्यकाल बढ़ा दिया गया था।

प्रसाद ने न्यायमूर्ति एचआर खन्ना के बारे में भी चर्चा की, जिन्होंने आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों के निलंबन पर असहमति जताई थी। उन्होंने कहा, "साहसी न्यायाधीश एचआर खन्ना, जिन्होंने यह फैसला सुनाया कि जनता के मौलिक अधिकारों को छीना नहीं जा सकता, उनकी असहमति को विश्वभर में सराहा गया।"

भाजपा सांसद ने समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण के प्रति भी स्मरण किया और बताया कि उन्हें आपातकाल के दौरान गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा था।

प्रसाद ने कहा, "जयप्रकाश नारायण को अक्टूबर १९७५ में हिरासत में गुर्दे की विफलता का पता चला था और उन्हें जीवनभर डायलिसिस से गुजरना पड़ा।"

उन्होंने बताया, "बॉम्बे के जसलोक अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने कहा था कि उनके लिए प्रतिदिन एक घंटा धूप में बैठना आवश्यक है। हालांकि, इसकी अनुमति नहीं दी गई क्योंकि लोग उन्हें देख सकते थे।"

Point of View

यह स्पष्ट है कि राजनीतिक आलोचना में कई पहलू महत्वपूर्ण होते हैं। रविशंकर प्रसाद की टिप्पणियां विपक्ष की रणनीति और संसद के आचरण पर एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करती हैं। यह निश्चित रूप से एक ऐसा मुद्दा है, जिसे व्यापक स्तर पर समझने की आवश्यकता है।
NationPress
12/03/2026

Frequently Asked Questions

रविशंकर प्रसाद ने किस मुद्दे पर बात की?
रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष की संसदीय कार्यप्रणाली और राहुल गांधी के आचरण पर चर्चा की।
क्या प्रसाद ने किसी विशेष नेता पर निशाना साधा?
हां, उन्होंने राहुल गांधी पर विशेष रूप से निशाना साधा।
क्या प्रसाद ने कांग्रेस पर आरोप लगाए?
हां, उन्होंने कांग्रेस पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया।
क्या संसद में किसी सांसद को निष्कासित किया गया?
हां, प्रसाद ने बताया कि ११ सांसदों को सदन से निष्कासित किया गया।
आपातकाल के दौरान जयप्रकाश नारायण की स्थिति क्या थी?
जयप्रकाश नारायण को आपातकाल के दौरान गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा था।
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