19 अगस्त 2026
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इंदौर में साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़: ₹85 लाख की ठगी में सिम सप्लाई करने वाले तीन गिरफ्तार

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इंदौर में साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़: ₹85 लाख की ठगी में सिम सप्लाई करने वाले तीन गिरफ्तार

सारांश

इंदौर अपराध शाखा ने ऑपरेशन फास्ट 2.0 के तहत ₹85 लाख की साइबर ठगी में सिम कार्ड सप्लाई करने वाले तीन आरोपियों को दबोचा। गृह मंत्रालय की सूचना से शुरू हुई यह जाँच महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल तक फैले फ्रॉड नेटवर्क की 'सप्लाई चेन' तक पहुँची।

मुख्य बातें

इंदौर अपराध शाखा ने 19 अगस्त 2026 को ऑपरेशन फास्ट 2.0 के तहत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपी हैं — राजेन्द्र राऊत (दुकान संचालक, राऊत कलेक्शन), आनंद वासरे और सूरज सिंह ।
इन पर महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में हुई ₹85 लाख की साइबर ठगी में सिम कार्ड की आपूर्ति का आरोप है।
जाँच का सुराग केंद्रीय गृह मंत्रालय की सूचना से मिला; NCRP पोर्टल पर शिकायतों से नंबरों का मिलान हुआ।
अपराध शाखा अब सिम नेटवर्क के अन्य सदस्यों, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की जाँच कर रही है।

इंदौर पुलिस की अपराध शाखा ने ऑपरेशन फास्ट 2.0 के तहत 19 अगस्त 2026 को तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिन पर महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में हुई ₹85 लाख की साइबर ठगी में इस्तेमाल सिम कार्ड की आपूर्ति करने का आरोप है। यह कार्रवाई केंद्रीय गृह मंत्रालय से प्राप्त सूचना के आधार पर की गई, जिसमें साइबर अपराधों में प्रयुक्त मोबाइल नंबरों की सूची साझा की गई थी।

मामले का खुलासा कैसे हुआ

भोपाल स्थित राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय ने अपराध शाखा को उन मोबाइल नंबरों की सूची सौंपी जो साइबर फ्रॉड में प्रयुक्त पाए गए थे। जाँच में सामने आया कि इस सूची में शामिल तीन सिम कार्ड इंदौर से जारी हुए थे। अपराध शाखा ने मालवा मिल के पास यशवंत रोड स्थित राऊत कलेक्शन नामक दुकान की जाँच की, जहाँ दुकान संचालक राजेन्द्र राऊत की भूमिका संदिग्ध पाई गई।

गिरफ्तार आरोपी और तकनीकी साक्ष्य

जाँच के दौरान अपराध शाखा ने उक्त दुकान से जुड़े चार संदिग्ध मोबाइल नंबर चिन्हित किए। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुष्टि हुई कि इन नंबरों से संबंधित सिम कार्ड साइबर अपराधों में सक्रिय रूप से उपयोग किए गए। पुलिस ने राजेन्द्र राऊत, आनंद वासरे और सूरज सिंह को गिरफ्तार किया।

इन संदिग्ध नंबरों का मिलान NCRP पोर्टल पर दर्ज शिकायतों से किया गया, जिससे महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में हुई ₹85 लाख की साइबर ठगी से सीधा संबंध उजागर हुआ।

ऑपरेशन फास्ट 2.0 की व्यापक कार्रवाई

यह गिरफ्तारी ऑपरेशन फास्ट 2.0 के अंतर्गत की गई, जो केंद्र और राज्य की एजेंसियों के समन्वय से चलाया जा रहा अभियान है। गौरतलब है कि इस तरह के अभियान साइबर अपराध नेटवर्क की 'सिम सप्लाई चेन' को तोड़ने पर केंद्रित हैं — एक ऐसी कड़ी जो अक्सर मुख्य ठगों तक पहुँचने की राह खोलती है।

आगे की जाँच की दिशा

अपराध शाखा तीनों आरोपियों से पूछताछ कर सिम नेटवर्क के अन्य सदस्यों, संबंधित बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की कड़ियाँ खँगाल रही है। साथ ही, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की संबंधित पुलिस इकाइयों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि पीड़ितों की शिकायतों को मामले से जोड़ा जा सके। जाँच अधिकारियों के अनुसार, इस नेटवर्क में और भी संदिग्धों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या ये गिरफ्तारियाँ ऊपर तक की कड़ियाँ खोल पाती हैं — या केवल 'मध्यस्थ' पकड़े जाते हैं और मास्टरमाइंड बच निकलते हैं। NCRP पोर्टल का प्रभावी उपयोग एक सकारात्मक संकेत है, पर अंतर-राज्यीय समन्वय की धीमी गति अभी भी सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंदौर में साइबर फ्रॉड के आरोप में किन्हें गिरफ्तार किया गया?
इंदौर अपराध शाखा ने राजेन्द्र राऊत (राऊत कलेक्शन दुकान संचालक, यशवंत रोड), आनंद वासरे और सूरज सिंह को गिरफ्तार किया। तीनों पर महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में हुई ₹85 लाख की साइबर ठगी में उपयोग किए गए सिम कार्ड की आपूर्ति करने का आरोप है।
ऑपरेशन फास्ट 2.0 क्या है?
ऑपरेशन फास्ट 2.0 इंदौर अपराध शाखा द्वारा केंद्र और राज्य की एजेंसियों के समन्वय से चलाया जा रहा साइबर अपराध-विरोधी अभियान है। इसका उद्देश्य साइबर फ्रॉड नेटवर्क में सिम कार्ड सप्लाई चेन को तोड़ना और अपराधियों तक पहुँचना है।
इस साइबर फ्रॉड में कितनी रकम की ठगी हुई और किन राज्यों में?
महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में पीड़ितों से कुल लगभग ₹85 लाख की साइबर ठगी हुई। NCRP पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का मिलान इंदौर से जारी संदिग्ध सिम नंबरों से किया गया, जिससे यह संबंध उजागर हुआ।
पुलिस को इन आरोपियों तक कैसे पहुँची?
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य साइबर सेल को साइबर फ्रॉड में प्रयुक्त मोबाइल नंबरों की सूची सौंपी। जाँच में तीन सिम इंदौर से जारी मिले, जिसके बाद यशवंत रोड स्थित राऊत कलेक्शन दुकान की जाँच हुई और चार संदिग्ध नंबर चिन्हित किए गए।
आगे की जाँच में क्या होगा?
अपराध शाखा तीनों आरोपियों से पूछताछ कर सिम नेटवर्क के अन्य सदस्यों, संबंधित बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की जाँच कर रही है। महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की पुलिस इकाइयों के साथ भी समन्वय जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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