डिजिटल अरेस्ट से ₹85 लाख की ठगी: नोएडा साइबर सेल ने गुरुग्राम से POS एजेंट को दबोचा

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डिजिटल अरेस्ट से ₹85 लाख की ठगी: नोएडा साइबर सेल ने गुरुग्राम से POS एजेंट को दबोचा

सारांश

नोएडा साइबर सेल ने ₹85 लाख की डिजिटल अरेस्ट ठगी के मामले में POS एजेंट सूरज को गुरुग्राम से गिरफ्तार किया। आरोपी ने भारतीय सिम को ई-सिम में बदलकर कंबोडिया के साइबर अपराधियों को सौंपा, जिन्होंने पीड़ित को CBI अधिकारी बनकर ₹85 लाख ठगे।

मुख्य बातें

गौतमबुद्धनगर साइबर क्राइम टीम ने 18 मई 2026 को गुरुग्राम से आरोपी सूरज पुत्र फूल सिंह (26 वर्ष, पानीपत) को गिरफ्तार किया।
आरोपी ने POS एजेंट के रूप में भारतीय सिम को ई-सिम में बदलकर कंबोडिया स्थित साइबर अपराधियों को सक्रिय किया।
इस सिम का उपयोग कर पीड़ित को पुलिस, CBI अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट की धमकी देकर ₹85 लाख ठगे गए।
आरोपी के खिलाफ थाना साइबर क्राइम नोएडा में IT अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज।
पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी; नागरिकों को अनजान कॉल पर OTP, बैंक डिटेल्स साझा न करने की सलाह।

गौतमबुद्धनगर पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने 19 मई 2026 को डिजिटल अरेस्ट के ज़रिए ₹85 लाख की ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह के एक प्रमुख आरोपी को गुरुग्राम, हरियाणा से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान सूरज पुत्र फूल सिंह, निवासी पानीपत, हरियाणा, उम्र 26 वर्ष, के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, आरोपी एक मोबाइल कंपनी का POS एजेंट था जिसने भारतीय सिम को ई-सिम के रूप में सक्रिय कर कंबोडिया में बैठे साइबर अपराधियों तक पहुँचाया।

मुख्य घटनाक्रम

थाना साइबर क्राइम नोएडा में दर्ज एक शिकायत की जाँच के दौरान यह मामला सामने आया। पीड़ित को खुद को पुलिस, CBI और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताकर डराया गया और डिजिटल अरेस्ट की धमकी देकर ₹85 लाख की ठगी की गई। जाँच में पता चला कि ठगी में इस्तेमाल मोबाइल नंबर एक भारतीय सिम थी, जिसे ई-सिम में बदलकर विदेश में सक्रिय किया गया था।

आरोपी की भूमिका और गिरफ्तारी

पुलिस के मुताबिक, सूरज ने लालच में आकर अपने POS एजेंट के अधिकार का दुरुपयोग करते हुए भारतीय सिम को ई-सिम के रूप में एक्टिवेट किया और उसे कंबोडिया स्थित साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराया। इस सिम का इस्तेमाल वहाँ से डिजिटल अरेस्ट जैसे गंभीर साइबर अपराध को अंजाम देने में किया गया। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और मैनुअल इंटेलिजेंस के आधार पर पुलिस 18 मई को गुरुग्राम पहुँची और आरोपी को हिरासत में लिया। आरोपी 10वीं पास बताया गया है।

कानूनी कार्रवाई

गौतमबुद्धनगर के थाना साइबर क्राइम में आरोपी के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जाँच जारी रखे हुए है।

आम जनता के लिए सतर्कता

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर खुद को पुलिस, CBI या ED अधिकारी बताकर पैसे माँगने वालों पर विश्वास न करें। किसी भी अज्ञात लिंक, स्क्रीन-शेयरिंग ऐप या मोबाइल एक्सेस रिक्वेस्ट को स्वीकार न करें। OTP, बैंक डिटेल्स, UPI पिन और पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

क्या होगा आगे

पुलिस इस अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क की पूरी कड़ी उजागर करने में जुटी है। यह मामला भारत-कंबोडिया साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को रेखांकित करता है, जहाँ देश के भीतर के एजेंट विदेशी अपराधियों के लिए 'गेटवे' बन रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

सिम डीलर — अनजाने या लालच में अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क की रीढ़ बन रहे हैं। कंबोडिया और दक्षिण-पूर्व एशिया से संचालित डिजिटल अरेस्ट घोटाले अब केवल तकनीकी अपराध नहीं, बल्कि संगठित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक उद्योग हैं। असली सवाल यह है कि ई-सिम एक्टिवेशन की मौजूदा KYC प्रक्रिया इतनी कमज़ोर क्यों है कि एक 10वीं पास एजेंट उसे आसानी से दरकिनार कर सके — और दूरसंचार नियामक इस खामी को कब तक नज़रअंदाज़ करेगा।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डिजिटल अरेस्ट ठगी क्या होती है?
डिजिटल अरेस्ट एक साइबर धोखाधड़ी है जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI या ED अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर पीड़ित को 'गिरफ्तार' होने की धमकी देते हैं और पैसे ऐंठते हैं। इस मामले में पीड़ित से इसी तरीके से ₹85 लाख की ठगी की गई।
गिरफ्तार आरोपी सूरज की इस ठगी में क्या भूमिका थी?
आरोपी सूरज एक मोबाइल कंपनी का POS एजेंट था। पुलिस के अनुसार, उसने भारतीय सिम को ई-सिम के रूप में एक्टिवेट कर कंबोडिया में बैठे साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराया, जिन्होंने उस सिम का उपयोग डिजिटल अरेस्ट ठगी में किया।
पुलिस ने आरोपी को कैसे पकड़ा?
गौतमबुद्धनगर साइबर क्राइम टीम ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और मैनुअल इंटेलिजेंस के ज़रिए ठगी में इस्तेमाल मोबाइल नंबर को ट्रेस किया। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस 18 मई को गुरुग्राम पहुँची और आरोपी को गिरफ्तार किया।
इस साइबर ठगी से बचने के लिए क्या सावधानियाँ बरतें?
पुलिस ने सलाह दी है कि किसी भी अनजान कॉल पर खुद को सरकारी अधिकारी बताने वाले पर भरोसा न करें। OTP, बैंक डिटेल्स, UPI पिन या पासवर्ड किसी से साझा न करें और किसी भी अज्ञात स्क्रीन-शेयरिंग ऐप या लिंक को स्वीकार न करें।
क्या इस गिरोह में और लोग भी शामिल हैं?
पुलिस के अनुसार जाँच अभी जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। आरोपी के खिलाफ IT अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज है और पूरे नेटवर्क को उजागर करने का प्रयास किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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