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कोलकाता पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी रैकेट का खुलासा, दर्जनों गिरफ्तार

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कोलकाता पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी रैकेट का खुलासा, दर्जनों गिरफ्तार

सारांश

कोलकाता पुलिस ने एक बड़े साइबर धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश किया, जिसने सीबीआई अधिकारी बनकर लोगों को ठगा। इस रैकेट ने लाखों रुपये की ठगी की है, और कई आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। जानें इस मामले के सभी विवरण।

मुख्य बातें

कोलकाता पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश किया।
आरोपियों ने सीबीआई अधिकारी बनकर ठगी की।
पुलिस ने सिम बॉक्स सिस्टम को बरामद किया।
जांच जारी है और अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
सतर्क रहना आवश्यक है, फर्जी कॉल से बचें।

कोलकाता, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कोलकाता पुलिस ने एक विशाल साइबर धोखाधड़ी रैकेट का खुलासा किया है, जो अवैध सिम बॉक्स सिस्टम का इस्तेमाल करके सीबीआई अधिकारियों का नकली रूप धारण कर रहा था। इस रैकेट ने 'डिजिटल गिरफ्तारी' के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपए की ठगी की है।

5 अक्टूबर 2025 से पहले, आरोपियों ने परनाश्री के निवासी, सेवानिवृत्त इंजीनियर बिधान घोष दस्तीदार को फोन किया और खुद को सीबीआई अधिकारी बताया। उन्होंने एक फर्जी पार्सल मामले में फंसाने की धमकी दी और जाली दस्तावेज दिखाकर गिरफ्तारी का डर दिखाया। इस डर के कारण पीड़ित ने 3.01 करोड़ रुपए का लेन-देन किया। यह धोखाधड़ी, जबरन वसूली और आईटी एक्ट की धारा 66सी/66डी और बीएनएस 2023 की विभिन्न धाराओं (61(2), 204, 308, 319(2), 318(4), 336(2), 336(3), 338, 340(2)) के तहत दर्ज की गई है।

जांच में दो बीएसएनएल नंबरों से आए कॉल का तकनीकी विश्लेषण किया गया, जिसमें सिम बॉक्स सेटअप की मौजूदगी का पता चला। मुख्य आरोपी अबीर शेख उर्फ मोनिरुल इस्लाम साजिब को 15 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया। उसके बयान पर अम्हर्स्ट स्ट्रीट थाना क्षेत्र के पटवारी बागान में छापेमारी की गई।

परिसर संख्या 12/4/डी, पटवारी बागान लेन, कोलकाता में एक पूरी तरह कार्यरत सिम बॉक्स सिस्टम बरामद हुआ। वहां से 12 सिम बॉक्स उपकरण, 2000 से अधिक सिम कार्ड, कई मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और राउटर जब्त किए गए। इस दौरान कोलकाता निवासी मो. अमजद (38 वर्ष) को भी गिरफ्तार किया गया।

17 मार्च 2026 को अबीर शेख के जब्त लैपटॉप का फॉरेंसिक विश्लेषण होने पर उत्तर 24 परगना के अशोकनगर, मानिकतला क्षेत्र में छापा मारा गया। यहां से अर्पण सिकदर (24 वर्ष) को गिरफ्तार किया गया। कार्टन बॉक्स में छिपाकर रखे गए 6 चालू सिम बॉक्स, 130 सक्रिय बीएसएनएल सिम कार्ड, 3 मोबाइल फोन, 4 राउटर, थिन क्लाइंट और अन्य सामान बरामद हुए।

सिम बॉक्स एक अवैध टेलीकॉम डिवाइस है, जिसमें कई सिम कार्ड लगाकर अंतरराष्ट्रीय वीओआईपी कॉल को स्थानीय जीएसएम कॉल में बदला जाता है। इससे कॉल सस्ती पड़ती है और कॉल का असली स्रोत (ज्यादातर विदेश) छिप जाता है। विदेशी कॉल सेंटर से काम करने वाले ठग भारतीय एजेंसियों का रूप धरकर 'डिजिटल गिरफ्तारी' का डर दिखाते हैं। इससे टेलीकॉम कंपनियों को राजस्व का भारी नुकसान होता है और आम नागरिक ठगे जाते हैं।

कोलकाता पुलिस ने बताया कि जांच अभी जारी है। क्रिप्टो लेन-देन, कूरियर लिंक, सिम आपूर्ति श्रृंखला और अन्य सहयोगियों की तलाश की जा रही है। पूरे देश में ऐसे जुड़े मामलों की भी जांच की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन समाज के सभी वर्गों को सतर्क रहना होगा।
RashtraPress
16 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या यह साइबर धोखाधड़ी नया मामला है?
नहीं, ऐसी धोखाधड़ी के मामले अक्सर सामने आते हैं, लेकिन यह रैकेट बड़ा और संगठित है।
सिम बॉक्स क्या होता है?
सिम बॉक्स एक अवैध टेलीकॉम डिवाइस है, जिसमें कई सिम कार्ड लगाकर अंतरराष्ट्रीय कॉल को स्थानीय कॉल में बदला जाता है।
क्या पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया?
मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन जांच अभी भी जारी है।
क्या आम नागरिक इस धोखाधड़ी से सुरक्षित हैं?
नागरिकों को सतर्क रहना होगा और ऐसे फर्जी कॉल का शिकार नहीं होना चाहिए।
पुलिस की अगली कार्रवाई क्या होगी?
पुलिस अन्य सहयोगियों की तलाश कर रही है और पूरे देश में जुड़े मामलों की जांच की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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