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'तुम हो ना' शो में राजीव खंडेलवाल भावुक, पिता के 2005 के हार्ट अटैक का दर्दनाक किस्सा साझा किया

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'तुम हो ना' शो में राजीव खंडेलवाल भावुक, पिता के 2005 के हार्ट अटैक का दर्दनाक किस्सा साझा किया

सारांश

'तुम हो ना' शो में कंटेस्टेंट सरोज की कहानी ने राजीव खंडेलवाल को 2005 के उस दर्दनाक दौर में ले गई जब उनके पिता को हार्ट अटैक आया था और बायपास सर्जरी हुई थी। ऑपरेशन थिएटर के बाहर का वह इंतज़ार — जिसे राजीव ने 'ज़िंदगी की असली नाज़ुकता' कहा — आज भी उन्हें याद है।

मुख्य बातें

राजीव खंडेलवाल अपने शो 'तुम हो ना' के एक एपिसोड में भावुक हो गए।
कंटेस्टेंट सरोज के पति के हार्ट अटैक की कहानी सुनकर राजीव को अपने 2005 के दर्दनाक अनुभव की याद आई।
राजीव के पिता को 2005 में हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद बायपास सर्जरी की गई थी।
राजीव ने दिल्ली में पिता के पास पहुँचकर ऑपरेशन थिएटर के बाहर इंतज़ार करने के डर और बेबसी को खुलकर बयान किया।
अभिनेता ने कहा कि ऐसे अनुभव इंसान को ज़िंदगी की अहमियत और परिवार की क़ीमत समझाते हैं।

टीवी और फिल्म अभिनेता राजीव खंडेलवाल इन दिनों अपने रियलिटी शो 'तुम हो ना' की वजह से सुर्खियों में हैं। शो के एक हालिया एपिसोड में कंटेस्टेंट सरोज ने जब अपने पति के हार्ट अटैक से जुड़ा दर्दभरा अनुभव साझा किया, तो राजीव खुद को रोक नहीं पाए और उन्होंने अपने जीवन के सबसे कठिन दौर को याद किया — जब 2005 में उनके पिता को हार्ट अटैक आया था।

सरोज की कहानी ने तोड़ा भावनात्मक बाँध

शो में कंटेस्टेंट सरोज ने अपने पति की गंभीर बीमारी और उस दौरान परिवार पर पड़े असर को बेहद मार्मिक तरीके से बयान किया। उनकी बात सुनकर राजीव खंडेलवाल की आँखें नम हो गईं और उन्होंने स्वीकार किया कि यह अनुभव उन्हें उनके अपने अतीत की याद दिला गया।

पिता की बायपास सर्जरी का वह दर्दनाक दौर

राजीव खंडेलवाल ने कहा, 'साल 2005 में मेरे पापा को हार्ट अटैक आया था। उनकी हालत काफी गंभीर थी और डॉक्टरों ने तुरंत बायपास सर्जरी करने का फैसला किया था। जब मैं दिल्ली में अपने पिता के पास पहुँचा, तो वहाँ हर पल मेरे लिए बेहद भारी था।'

अभिनेता ने कहा कि जीवन में कभी-कभी ऐसे क्षण आते हैं जब इंसान पूरी तरह असहाय हो जाता है और केवल ईश्वर से प्रार्थना ही एकमात्र सहारा बचती है।

ऑपरेशन थिएटर के दरवाज़े का वह डरावना लम्हा

अपनी भावनाओं को साझा करते हुए राजीव ने कहा, 'मुझे आज भी वो पल साफ-साफ याद है, जब डॉक्टर मेरे पापा को ऑपरेशन थिएटर के अंदर ले जा रहे थे। वह बेहोश थे और मैं सिर्फ दरवाज़े के पास खड़ा होकर उन्हें देख रहा था। उस वक्त मेरे मन में हज़ारों सवाल चल रहे थे — मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ। मैं सिर्फ यही सोच रहा था कि इस दरवाज़े के बंद होने के बाद क्या होगा। ये डर आज भी मुझे याद है।'

उन्होंने आगे कहा, 'वह पल मेरी ज़िंदगी के सबसे डरावने पलों में से एक था। जब किसी अपने की जान खतरे में होती है, तब इंसान खुद को बेहद असहाय महसूस करता है। उस दिन मैंने पहली बार ज़िंदगी की असली नाज़ुकता को महसूस किया था।'

परिवार और ज़िंदगी की अहमियत का एहसास

राजीव खंडेलवाल ने कहा, 'अस्पताल के बाहर इंतज़ार करना और हर मिनट किसी खबर का इंतज़ार करना बेहद मुश्किल होता है। परिवार के लोग बाहर से चाहे कितने भी मज़बूत दिखें, लेकिन अंदर से वे पूरी तरह टूट चुके होते हैं। ऐसे अनुभव इंसान को ज़िंदगी की अहमियत समझा देते हैं और परिवार के करीब ले आते हैं।'

यह पल शो के लिए एक भावनात्मक मोड़ साबित हुआ और दर्शकों के दिलों को भी छू गया। 'तुम हो ना' के आने वाले एपिसोड में और भी ऐसी मार्मिक कहानियाँ सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राजीव खंडेलवाल का यह खुलासा इसलिए अलग है क्योंकि यह एक कंटेस्टेंट की असल पीड़ा के जवाब में स्वाभाविक रूप से सामने आया — न कि किसी प्रमोशनल स्क्रिप्ट के तहत। यह शो की उस संरचना को रेखांकित करता है जो आम लोगों की ज़िंदगी को केंद्र में रखती है और मेज़बान को भी इंसानी धरातल पर लाती है। हालाँकि, दर्शकों को यह भी देखना होगा कि क्या यह भावनात्मक गहराई शो की नियमित पहचान बनती है या महज़ टीआरपी का एक पड़ाव।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजीव खंडेलवाल का शो 'तुम हो ना' क्या है?
'तुम हो ना' एक टीवी शो है जिसे अभिनेता राजीव खंडेलवाल होस्ट करते हैं। इसमें आम लोग अपनी ज़िंदगी की भावनात्मक और प्रेरणादायक कहानियाँ साझा करते हैं।
राजीव खंडेलवाल के पिता को हार्ट अटैक कब आया था?
राजीव खंडेलवाल के अनुसार उनके पिता को 2005 में हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद डॉक्टरों ने तुरंत बायपास सर्जरी का फैसला किया था।
शो में कंटेस्टेंट सरोज ने क्या कहानी सुनाई?
कंटेस्टेंट सरोज ने अपने पति के हार्ट अटैक से जुड़ा दर्दनाक अनुभव साझा किया, जिसे सुनकर राजीव खंडेलवाल भावुक हो गए और उन्होंने अपने पिता की बीमारी का किस्सा सुनाया।
राजीव खंडेलवाल ने ऑपरेशन थिएटर के बाहर के अनुभव को कैसे बताया?
राजीव ने कहा कि जब डॉक्टर उनके पिता को ऑपरेशन थिएटर में ले जा रहे थे तब वे बेहोश थे और राजीव दरवाज़े के पास खड़े होकर देख रहे थे। उन्होंने इसे अपनी ज़िंदगी के सबसे डरावने पलों में से एक बताया।
राजीव खंडेलवाल ने इस अनुभव से क्या सीखा?
राजीव ने कहा कि ऐसे कठिन पल इंसान को ज़िंदगी की असली नाज़ुकता और परिवार की अहमियत का एहसास कराते हैं। उन्होंने माना कि अस्पताल में इंतज़ार करना परिवार को अंदर से तोड़ देता है, भले ही वे बाहर से मज़बूत दिखें।
राष्ट्र प्रेस
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