आरबीआई ने यशवंत को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द किया, 99% जमाकर्ताओं को पूरी राशि वापस मिलने की उम्मीद

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आरबीआई ने यशवंत को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द किया, 99% जमाकर्ताओं को पूरी राशि वापस मिलने की उम्मीद

सारांश

RBI ने 19 मई 2026 को यशवंत को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया — पर्याप्त पूंजी न होने और जमाकर्ताओं के हित खतरे में पड़ने का हवाला देते हुए। एक सप्ताह में यह दूसरा सहकारी बैंक है जिसका लाइसेंस केंद्रीय बैंक ने रद्द किया है। 99.02% जमाकर्ताओं को पूरी राशि वापस मिलने की उम्मीद है।

मुख्य बातें

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 19 मई 2026 को यशवंत को-ऑपरेटिव बैंक का बैंकिंग लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द किया।
बैंक की सभी गतिविधियाँ — जमा स्वीकार करना और राशि लौटाना — पर तत्काल रोक लगाई गई।
प्रत्येक जमाकर्ता को DICGC से अधिकतम ₹5 लाख तक की बीमा राशि मिलेगी।
बैंक के आँकड़ों के अनुसार लगभग 99.02% जमाकर्ताओं को पूरी जमा राशि वापस मिलने की संभावना है।
20 अप्रैल 2026 तक DICGC पहले ही ₹106.96 करोड़ का भुगतान कर चुकी है।
12 मई 2026 को सर्वोदय सहकारी बैंक का लाइसेंस रद्द होने के एक सप्ताह बाद यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 19 मई 2026 को यशवंत को-ऑपरेटिव बैंक का बैंकिंग लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी और आय की संभावनाएँ नहीं हैं, और उसका संचालन जारी रखना जमाकर्ताओं के हितों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। इस निर्णय के साथ ही बैंक की सभी बैंकिंग गतिविधियाँ — जमा स्वीकार करना और राशि लौटाना — पर तत्काल रोक लगा दी गई है।

लाइसेंस रद्द होने के बाद क्या होगा

RBI ने महाराष्ट्र के सहकारिता आयुक्त और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार को बैंक बंद करने तथा एक परिसमापक (Liquidator) नियुक्त करने का आदेश जारी करने के निर्देश दिए हैं। 19 मई 2026 को कारोबार बंद होने के बाद से बैंक किसी भी प्रकार की बैंकिंग गतिविधि संचालित करने के लिए अधिकृत नहीं होगा।

केंद्रीय बैंक के अनुसार, मौजूदा वित्तीय स्थिति में यशवंत को-ऑपरेटिव बैंक अपने जमाकर्ताओं की पूरी राशि लौटाने में सक्षम नहीं है, इसलिए इसे आगे कारोबार जारी रखने की अनुमति देना जनहित के विरुद्ध होता।

जमाकर्ताओं को कितनी राशि मिलेगी

बैंक के परिसमापन की स्थिति में प्रत्येक जमाकर्ता को जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (DICGC) से अधिकतम ₹5 लाख तक की बीमा राशि प्राप्त करने का अधिकार होगा। बैंक द्वारा उपलब्ध कराए गए आँकड़ों के अनुसार लगभग 99.02 प्रतिशत जमाकर्ताओं को उनकी पूरी जमा राशि वापस मिलने की संभावना है।

उल्लेखनीय है कि 20 अप्रैल 2026 तक DICGC पहले ही ₹106.96 करोड़ का भुगतान कर चुकी है, जो प्रभावित जमाकर्ताओं को राहत देने की दिशा में एक अहम कदम है।

बैंकिंग विनियमन अधिनियम का उल्लंघन

RBI ने अपने बयान में कहा कि यशवंत को-ऑपरेटिव बैंक बैंकिंग विनियमन अधिनियम के प्रावधानों का पालन करने में विफल रहा है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक, बैंक की वित्तीय स्थिति इस हद तक कमज़ोर हो चुकी थी कि वह अपने दायित्वों को पूरा करने में असमर्थ था।

सर्वोदय बैंक के बाद एक और लाइसेंस रद्द

गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब RBI ने महज एक सप्ताह पहले, 12 मई 2026 को, सर्वोदय सहकारी बैंक का लाइसेंस भी पर्याप्त पूंजी और आय की संभावनाओं की कमी का हवाला देते हुए रद्द किया था। एक सप्ताह के भीतर दो सहकारी बैंकों के लाइसेंस रद्द होना इस क्षेत्र में बढ़ती वित्तीय अनियमितताओं की ओर संकेत करता है।

सहकारी बैंकिंग क्षेत्र लंबे समय से कमज़ोर प्रशासन, अपर्याप्त पूंजी आधार और नियामकीय अनुपालन की कमी जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। RBI की यह कार्रवाई उसकी उस नीति का हिस्सा मानी जा रही है जिसके तहत वह जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए कमज़ोर वित्तीय संस्थाओं पर शिकंजा कस रहा है।

आगे देखें तो परिसमापक की नियुक्ति और शेष जमाकर्ताओं को राशि के वितरण की प्रक्रिया नियामकीय निगरानी में पूरी की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल अनुत्तरित रहता है कि नियामकीय निगरानी इतनी देर से क्यों सक्रिय होती है। पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक संकट के बाद सुधारों के बावजूद, छोटे सहकारी बैंकों में पूंजी पर्याप्तता और प्रशासन की समस्याएँ बनी हुई हैं — और इसकी सबसे बड़ी कीमत वे आम जमाकर्ता चुकाते हैं जो इन बैंकों पर भरोसा करते हैं।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यशवंत को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस क्यों रद्द किया गया?
RBI ने यशवंत को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस इसलिए रद्द किया क्योंकि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी और आय की संभावनाएँ नहीं थीं और वह बैंकिंग विनियमन अधिनियम के प्रावधानों का पालन करने में विफल रहा। केंद्रीय बैंक के अनुसार, बैंक का संचालन जारी रखना जमाकर्ताओं के हितों के लिए हानिकारक होता।
यशवंत को-ऑपरेटिव बैंक के जमाकर्ताओं को उनका पैसा कैसे मिलेगा?
बैंक के परिसमापन के बाद प्रत्येक जमाकर्ता को DICGC से अधिकतम ₹5 लाख तक की जमा बीमा राशि मिलेगी। बैंक के आँकड़ों के अनुसार लगभग 99.02% जमाकर्ताओं को उनकी पूरी जमा राशि वापस मिलने की संभावना है।
DICGC ने अब तक कितना भुगतान किया है?
20 अप्रैल 2026 तक DICGC पहले ही ₹106.96 करोड़ का भुगतान कर चुकी है। यह भुगतान परिसमापन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही प्रभावित जमाकर्ताओं को राहत देने के लिए किया गया।
क्या हाल ही में किसी और सहकारी बैंक का लाइसेंस भी रद्द हुआ है?
हाँ, RBI ने 12 मई 2026 को सर्वोदय सहकारी बैंक का लाइसेंस भी पर्याप्त पूंजी और आय की संभावनाओं की कमी का हवाला देते हुए रद्द किया था। यशवंत को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस उसके ठीक एक सप्ताह बाद 19 मई 2026 को रद्द किया गया।
बैंक के परिसमापन की प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ेगी?
RBI ने महाराष्ट्र के सहकारिता आयुक्त और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार को बैंक बंद करने और एक परिसमापक नियुक्त करने का आदेश जारी करने के निर्देश दिए हैं। परिसमापक की निगरानी में शेष जमाकर्ताओं को राशि के वितरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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