आरबीआई ने सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द किया, 98% जमाकर्ताओं को मिलेगा पूरा पैसा

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आरबीआई ने सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द किया, 98% जमाकर्ताओं को मिलेगा पूरा पैसा

सारांश

RBI ने 12 मई 2026 को मुंबई के सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया — कमज़ोर वित्तीय स्थिति और पूँजी की कमी के चलते। 98.36% जमाकर्ताओं को DICGC के ज़रिए ₹5 लाख तक की राशि वापस मिलेगी, जबकि ₹26.72 करोड़ का भुगतान पहले ही हो चुका है।

मुख्य बातें

RBI ने 12 मई 2026 को सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, मुंबई का बैंकिंग लाइसेंस रद्द किया।
कारण: कमज़ोर वित्तीय स्थिति, पर्याप्त पूँजी की कमी और भविष्य में आय की खराब संभावनाएँ।
बैंक के 98.36% जमाकर्ताओं को DICGC के तहत ₹5 लाख तक की पूरी जमा राशि वापस मिलेगी।
31 मार्च 2026 तक DICGC ग्राहकों को ₹26.72 करोड़ का भुगतान पहले ही कर चुका है।
महाराष्ट्र के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार को लिक्विडेटर नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है।
इससे पहले अप्रैल में पेटीएम पेमेंट्स बैंक का लाइसेंस भी रद्द किया जा चुका है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 12 मई 2026 को मुंबई स्थित सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने बताया कि यह कदम बैंक की कमज़ोर वित्तीय स्थिति, पर्याप्त पूँजी की कमी और भविष्य में आय की खराब संभावनाओं के कारण उठाया गया है। यह निर्णय 12 मई को कारोबार बंद होने के बाद से तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

लाइसेंस रद्द करने की वजह

RBI ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति में स्पष्ट किया कि सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के तहत निर्धारित नियमों का पालन करने में विफल रहा। केंद्रीय बैंक के अनुसार, मौजूदा हालात में बैंक का संचालन जारी रखना जमाकर्ताओं के हित में नहीं था। लाइसेंस रद्द होते ही बैंक को जमा स्वीकार करने और ग्राहकों को राशि लौटाने सहित सभी बैंकिंग गतिविधियाँ तुरंत बंद करने का निर्देश दिया गया है।

लिक्विडेशन की प्रक्रिया

RBI ने महाराष्ट्र के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार को बैंक बंद करने की प्रक्रिया शुरू करने और एक लिक्विडेटर नियुक्त करने का निर्देश दिया है। लिक्विडेटर बैंक की समस्त संपत्तियों और देनदारियों का निपटान करेगा। केंद्रीय बैंक ने माना है कि मौजूदा वित्तीय स्थिति में बैंक अपने सभी जमाकर्ताओं की पूरी राशि लौटाने में सक्षम नहीं है।

जमाकर्ताओं को कितना पैसा मिलेगा

हालाँकि, जिन खाताधारकों की जमा राशि ₹5 लाख तक है, उनका पैसा डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (DICGC) के माध्यम से वापस किया जाएगा। RBI के अनुसार, बैंक के लगभग 98.36 प्रतिशत जमाकर्ता ऐसे हैं जिन्हें DICGC के ज़रिए उनकी पूरी जमा राशि वापस मिल जाएगी। उल्लेखनीय है कि 31 मार्च 2026 तक DICGC बैंक के ग्राहकों को बीमित जमा राशि के रूप में करीब ₹26.72 करोड़ का भुगतान पहले ही कर चुका है।

शहरी सहकारी बैंकों पर आरबीआई की सख्ती

हाल के वर्षों में RBI वित्तीय रूप से कमज़ोर शहरी सहकारी बैंकों के विरुद्ध लगातार कड़ी कार्रवाई कर रहा है। केंद्रीय बैंक का ध्यान जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा और बेहतर बैंकिंग प्रशासन सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। इससे पहले, अप्रैल में केंद्रीय बैंक ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड का लाइसेंस भी रद्द कर दिया था, यह कहते हुए कि बैंक ने लाइसेंस से जुड़े आवश्यक नियमों का पालन नहीं किया। उस मामले में RBI ने आश्वस्त किया था कि बैंक के पास अपने सभी ग्राहकों की जमा राशि लौटाने के लिए पर्याप्त तरलता (लिक्विडिटी) मौजूद है।

आगे क्या होगा

सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक के मामले में अब लिक्विडेटर की नियुक्ति के बाद संपत्तियों की बिक्री और देनदारियों के निपटान की प्रक्रिया शुरू होगी। DICGC के दायरे से बाहर आने वाले जमाकर्ताओं को लिक्विडेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आनुपातिक भुगतान मिल सकता है। यह घटना एक बार फिर शहरी सहकारी बैंकों में प्रशासन और पारदर्शिता की ज़रूरत को रेखांकित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि नियामक निगरानी इतनी देर से क्यों सक्रिय होती है कि बैंक की वित्तीय हालत पहले ही बेकाबू हो जाती है। DICGC की ₹5 लाख की सीमा छोटे जमाकर्ताओं के लिए राहत ज़रूर है, लेकिन इससे ऊपर की राशि वाले खाताधारकों के लिए लिक्विडेशन प्रक्रिया लंबी और अनिश्चित हो सकती है। पेटीएम पेमेंट्स बैंक के बाद यह दूसरा बड़ा मामला है, जो बताता है कि बैंकिंग क्षेत्र में अनुपालन की खामियाँ अभी भी व्यापक हैं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस क्यों रद्द किया गया?
RBI ने बैंक की कमज़ोर वित्तीय स्थिति, पर्याप्त पूँजी की कमी और भविष्य में आय की खराब संभावनाओं के कारण 12 मई 2026 को यह लाइसेंस रद्द किया। बैंक बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के नियमों का पालन करने में भी विफल रहा था।
सर्वोदय बैंक के जमाकर्ताओं को उनका पैसा कैसे मिलेगा?
₹5 लाख तक की जमा राशि वाले खाताधारकों को DICGC (डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन) के माध्यम से पूरी राशि वापस मिलेगी। RBI के अनुसार बैंक के 98.36% जमाकर्ता इस श्रेणी में आते हैं।
DICGC ने अब तक कितनी राशि का भुगतान किया है?
31 मार्च 2026 तक DICGC सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक के ग्राहकों को बीमित जमा राशि के रूप में करीब ₹26.72 करोड़ का भुगतान पहले ही कर चुका है।
बैंक बंद होने के बाद आगे क्या होगा?
महाराष्ट्र के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार एक लिक्विडेटर नियुक्त करेंगे, जो बैंक की संपत्तियों और देनदारियों का निपटान करेगा। DICGC की सीमा से अधिक राशि वाले जमाकर्ताओं को लिक्विडेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आनुपातिक भुगतान मिल सकता है।
क्या RBI ने पहले भी किसी बैंक का लाइसेंस रद्द किया है?
हाँ, इससे पहले अप्रैल में RBI ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड का लाइसेंस रद्द किया था, यह कहते हुए कि बैंक ने लाइसेंस से जुड़े आवश्यक नियमों का पालन नहीं किया। उस मामले में RBI ने आश्वस्त किया था कि बैंक के पास सभी जमाकर्ताओं की राशि लौटाने के लिए पर्याप्त तरलता है।
राष्ट्र प्रेस