आरबीआई ने सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द किया, 98% जमाकर्ताओं को मिलेगा पूरा पैसा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 12 मई 2026 को मुंबई स्थित सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने बताया कि यह कदम बैंक की कमज़ोर वित्तीय स्थिति, पर्याप्त पूँजी की कमी और भविष्य में आय की खराब संभावनाओं के कारण उठाया गया है। यह निर्णय 12 मई को कारोबार बंद होने के बाद से तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
लाइसेंस रद्द करने की वजह
RBI ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति में स्पष्ट किया कि सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के तहत निर्धारित नियमों का पालन करने में विफल रहा। केंद्रीय बैंक के अनुसार, मौजूदा हालात में बैंक का संचालन जारी रखना जमाकर्ताओं के हित में नहीं था। लाइसेंस रद्द होते ही बैंक को जमा स्वीकार करने और ग्राहकों को राशि लौटाने सहित सभी बैंकिंग गतिविधियाँ तुरंत बंद करने का निर्देश दिया गया है।
लिक्विडेशन की प्रक्रिया
RBI ने महाराष्ट्र के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार को बैंक बंद करने की प्रक्रिया शुरू करने और एक लिक्विडेटर नियुक्त करने का निर्देश दिया है। लिक्विडेटर बैंक की समस्त संपत्तियों और देनदारियों का निपटान करेगा। केंद्रीय बैंक ने माना है कि मौजूदा वित्तीय स्थिति में बैंक अपने सभी जमाकर्ताओं की पूरी राशि लौटाने में सक्षम नहीं है।
जमाकर्ताओं को कितना पैसा मिलेगा
हालाँकि, जिन खाताधारकों की जमा राशि ₹5 लाख तक है, उनका पैसा डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (DICGC) के माध्यम से वापस किया जाएगा। RBI के अनुसार, बैंक के लगभग 98.36 प्रतिशत जमाकर्ता ऐसे हैं जिन्हें DICGC के ज़रिए उनकी पूरी जमा राशि वापस मिल जाएगी। उल्लेखनीय है कि 31 मार्च 2026 तक DICGC बैंक के ग्राहकों को बीमित जमा राशि के रूप में करीब ₹26.72 करोड़ का भुगतान पहले ही कर चुका है।
शहरी सहकारी बैंकों पर आरबीआई की सख्ती
हाल के वर्षों में RBI वित्तीय रूप से कमज़ोर शहरी सहकारी बैंकों के विरुद्ध लगातार कड़ी कार्रवाई कर रहा है। केंद्रीय बैंक का ध्यान जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा और बेहतर बैंकिंग प्रशासन सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। इससे पहले, अप्रैल में केंद्रीय बैंक ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड का लाइसेंस भी रद्द कर दिया था, यह कहते हुए कि बैंक ने लाइसेंस से जुड़े आवश्यक नियमों का पालन नहीं किया। उस मामले में RBI ने आश्वस्त किया था कि बैंक के पास अपने सभी ग्राहकों की जमा राशि लौटाने के लिए पर्याप्त तरलता (लिक्विडिटी) मौजूद है।
आगे क्या होगा
सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक के मामले में अब लिक्विडेटर की नियुक्ति के बाद संपत्तियों की बिक्री और देनदारियों के निपटान की प्रक्रिया शुरू होगी। DICGC के दायरे से बाहर आने वाले जमाकर्ताओं को लिक्विडेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आनुपातिक भुगतान मिल सकता है। यह घटना एक बार फिर शहरी सहकारी बैंकों में प्रशासन और पारदर्शिता की ज़रूरत को रेखांकित करती है।