24 अगस्त 2026
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पटना साइबर फ्रॉड गिरोह का भंडाफोड़: संजय कुमार और अभिषेक कुमार गिरफ्तार, करोड़ों के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा

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पटना साइबर फ्रॉड गिरोह का भंडाफोड़: संजय कुमार और अभिषेक कुमार गिरफ्तार, करोड़ों के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा

सारांश

पटना पुलिस ने जकरियापुर में छापेमारी कर साइबर फ्रॉड गिरोह के दो सदस्यों को दबोचा। आरोपी सरकारी योजनाओं का झाँसा देकर फर्जी बैंक खाते खुलवाते थे और उनसे करोड़ों की ठगी करते थे। 11 मोबाइल, 12 ATM कार्ड और 13 चेकबुक बरामद; नेटवर्क में एक महिला समेत अन्य संदिग्धों की जांच जारी।

मुख्य बातें

पटना साइबर थाना पुलिस ने 23 मई 2026 को जकरियापुर में छापेमारी कर संगठित साइबर फ्रॉड गिरोह का भंडाफोड़ किया।
गिरफ्तार आरोपी: नालंदा के संजय कुमार और नवादा के अभिषेक कुमार ।
बरामदगी में 11 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 12 ATM कार्ड, 13 चेकबुक और 1 पासबुक शामिल।
प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपए के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के प्रमाण मिले।
गिरोह सरकारी योजनाओं और आसान लोन का झाँसा देकर फर्जी करेंट अकाउंट खुलवाता था।
जांच में एक महिला समेत अन्य संदिग्धों की संलिप्तता के संकेत; पूछताछ जारी।

पटना के साइबर थाना पुलिस ने 23 मई 2026 को एक संगठित साइबर फ्रॉड गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। रामकृष्णानगर थाना क्षेत्र के जकरियापुर इलाके में छापेमारी के दौरान पुलिस ने 11 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 12 एटीएम कार्ड, 13 चेकबुक और एक पासबुक बरामद की। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपए के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के प्रमाण सामने आए हैं।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नालंदा जिले के नूरसराय निवासी संजय कुमार और नवादा जिले के पकड़ी बरवा निवासी अभिषेक कुमार के रूप में की है। दोनों आरोपी पटना के जकरियापुर स्थित एक मकान से साइबर अपराध की गतिविधियाँ संचालित कर रहे थे। फिलहाल दोनों से पूछताछ जारी है।

ठगी का तरीका: सरकारी योजनाओं का झाँसा

डीएसपी सह साइबर थाना प्रभारी नीतीश चंद्र धारिया ने बताया कि गिरोह के सदस्य लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और आसान लोन उपलब्ध कराने का झाँसा देकर उनके नाम पर बैंकों में करेंट अकाउंट खुलवाते थे। इसके बाद वे उन खातों से जुड़ी पासबुक, एटीएम कार्ड, बैंक डिटेल और सिम कार्ड अपने कब्जे में रख लेते थे। फिर इन्हीं खातों का उपयोग साइबर ठगी और ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए किया जाता था।

जांच का दायरा और विशेष टीम

मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) के पर्यवेक्षण में साइबर थाना की एक विशेष टीम गठित की गई, जिसका नेतृत्व डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया ने किया। तकनीकी और मानवीय सूचना के आधार पर जांच शुरू की गई, जिसके बाद जकरियापुर में छापेमारी की गई। बरामद डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की गहन जांच अभी जारी है।

नेटवर्क का विस्तार और अन्य संदिग्ध

पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में एक महिला समेत अन्य लोगों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं। जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि गिरोह ने किन-किन राज्यों में लोगों को निशाना बनाया और कुल कितने पीड़ितों से ठगी की गई। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में साइबर अपराध के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। आगे की कार्रवाई जारी है और अन्य संदिग्धों की गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह गिरोह की कार्यप्रणाली एक बड़ी प्रणालीगत कमज़ोरी को उजागर करती है — बैंकों की केवाईसी प्रक्रिया में इतनी खामियाँ कि अनजान लोगों के नाम पर करेंट अकाउंट खुल जाएं और महीनों तक संदेह न हो। गौरतलब है कि बिहार में साइबर अपराध के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, और अधिकांश गिरोह झारखंड के जामताड़ा मॉडल से प्रेरित होकर अब राज्य के भीतर ही सक्रिय हो रहे हैं। दो गिरफ्तारियाँ शुरुआत हैं, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि पुलिस उन बैंक कर्मचारियों तक पहुँचती है या नहीं जिन्होंने बिना उचित सत्यापन के ये खाते खोले।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पटना में गिरफ्तार साइबर फ्रॉड आरोपी कौन हैं?
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नालंदा जिले के नूरसराय निवासी संजय कुमार और नवादा जिले के पकड़ी बरवा निवासी अभिषेक कुमार के रूप में हुई है। दोनों को 23 मई 2026 को पटना के जकरियापुर इलाके में छापेमारी के दौरान गिरफ्तार किया गया।
यह साइबर गिरोह किस तरह से ठगी करता था?
गिरोह के सदस्य लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और आसान लोन का झाँसा देकर उनके नाम पर बैंकों में करेंट अकाउंट खुलवाते थे। फिर उन खातों की पासबुक, ATM कार्ड और सिम कार्ड अपने पास रखकर उनका उपयोग ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए करते थे।
छापेमारी में पुलिस ने क्या बरामद किया?
पुलिस ने आरोपियों के पास से 11 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 12 ATM कार्ड, 13 चेकबुक और 1 पासबुक बरामद की। इन डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की जांच जारी है और कई बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपए के संदिग्ध लेनदेन के प्रमाण मिले हैं।
क्या इस गिरोह में और लोग भी शामिल हैं?
प्रारंभिक जांच में एक महिला समेत अन्य लोगों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने किन-किन राज्यों में लोगों को निशाना बनाया। आगे की गिरफ्तारियाँ संभव हैं।
इस मामले की जांच कौन कर रहा है?
नगर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) के पर्यवेक्षण में साइबर थाना की विशेष टीम गठित की गई है, जिसका नेतृत्व डीएसपी सह साइबर थाना प्रभारी नीतीश चंद्र धारिया कर रहे हैं। आरोपियों से पूछताछ जारी है और मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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