10 अगस्त 2026
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नोएडा में लॉटरी ठगी गिरोह का भंडाफोड़: 10 साइबर अपराधी गिरफ्तार, 20 मोबाइल ज़ब्त

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नोएडा में लॉटरी ठगी गिरोह का भंडाफोड़: 10 साइबर अपराधी गिरफ्तार, 20 मोबाइल ज़ब्त

सारांश

नोएडा पुलिस ने फेसबुक-इंस्टाग्राम पर ₹12 लाख की फर्जी लॉटरी का झांसा देकर दक्षिण भारतीयों को ठगने वाले 10 सदस्यीय गिरोह को दबोचा। कर्नाटक और बिहार के ये आरोपी जाली आयकर व RBI प्रमाण पत्रों से विश्वास जीतते थे। 20 मोबाइल और ₹10,200 नकद बरामद।

मुख्य बातें

नोएडा पुलिस और साइबर सेल ने 18 जून 2026 को सेक्टर-121 में छापा मारकर 10 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया।
बरामदगी में 20 मोबाइल फोन , ₹10,200 नकद और 4 डेबिट कार्ड शामिल हैं।
गिरोह फेसबुक और इंस्टाग्राम पर विज्ञापन पोस्ट कर पीड़ितों को ₹12 लाख की फर्जी लॉटरी का झांसा देता था।
आरोपी कर्नाटक और बिहार के निवासी हैं; मुख्य रूप से दक्षिण भारतीय लोगों को निशाना बनाते थे।
एनसीआरपी पर लगभग 18 शिकायतें कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में दर्ज थीं।
मामला आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत दर्ज; गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी।

नोएडा पुलिस ने 18 जून 2026 को सोशल मीडिया पर फर्जी लॉटरी का झांसा देकर ठगी करने वाले एक संगठित साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया। फेस-3 थाने और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने सेक्टर-121, नोएडा में छापा मारकर 10 शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से 20 मोबाइल फोन, ₹10,200 नकद तथा 4 डेबिट कार्ड बरामद किए। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई बीट पुलिसिंग और गोपनीय सूचना के आधार पर गुरुवार को की गई।

कैसे काम करता था गिरोह

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फर्जी लॉटरी एवं इनाम जीतने से जुड़े विज्ञापन पोस्ट करते थे। विज्ञापन में दिए गए नंबर पर संपर्क करने वाले लोगों को मात्र ₹50 में कथित लॉटरी टिकट भेजा जाता था। इसके बाद पीड़ितों को ₹12 लाख की लॉटरी लगने का झांसा दिया जाता था।

रकम दिलाने के नाम पर पीड़ितों से टीडीएस, जीएसटी, एनओसी, इनकम टैक्स क्लियरेंस, आरबीआई क्लियरेंस और फाइनल ट्रांसफर चार्ज जैसे विभिन्न शुल्कों के नाम पर अलग-अलग किस्तों में पैसे जमा करवाए जाते थे। यह धनराशि गिरोह द्वारा संचालित फर्जी बैंक खातों में स्थानांतरित कराई जाती थी।

दक्षिण भारतीयों को बनाया जाता था निशाना

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी कर्नाटक और बिहार के विभिन्न जिलों के निवासी हैं। गिरोह मुख्य रूप से दक्षिण भारत के लोगों को निशाना बनाता था और स्थानीय भाषाओं में बातचीत कर उनका विश्वास अर्जित करता था। ठगी को विश्वसनीय बनाने के लिए फर्जी आयकर विभाग और भारतीय रिज़र्व बैंक के जाली प्रमाण पत्र तैयार कर व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे जाते थे।

गौरतलब है कि एनसीआरपी और समन्वय पोर्टल पर पिछले करीब दो महीनों से इस गिरोह से जुड़े संदिग्ध मोबाइल नंबरों, आईएमईआई नंबरों और बैंक खातों के संबंध में लगातार शिकायतें आ रही थीं — जिनमें से लगभग 18 शिकायतें कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में दर्ज थीं।

साक्ष्य मिटाने की कोशिश

पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह के सदस्य पकड़ से बचने के लिए लगातार मोबाइल नंबर, सिम कार्ड और बैंक खाते बदलते रहते थे। उपयोग किए गए सिम कार्ड नष्ट कर दिए जाते थे ताकि डिजिटल साक्ष्य मिटाए जा सकें। यह ऐसे गिरोहों की एक सुनियोजित कार्यप्रणाली है जो साइबर जांच को जटिल बनाती है।

कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच

पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध थाना फेस-3 में आईटी एक्ट की धारा 66डी के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया है। अब पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, फर्जी बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले व्यक्तियों की तलाश में जुटी है। नोएडा पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी लॉटरी, इनाम या पुरस्कार संबंधी संदेश पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें और संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल साइबर हेल्पलाइन या निकटतम पुलिस थाने को दें।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो NCRP-पुलिस समन्वय में मौजूद खामियों को उजागर करता है। केवल गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं — फर्जी बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाली आपूर्ति-श्रृंखला को तोड़े बिना ऐसे गिरोह फिर उभर आते हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा में पकड़े गए साइबर ठग किस तरह लोगों को फंसाते थे?
ये ठग फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फर्जी लॉटरी विज्ञापन पोस्ट करते थे और संपर्क करने वाले लोगों को ₹50 में टिकट भेजकर ₹12 लाख की लॉटरी लगने का झांसा देते थे। इसके बाद टीडीएस, जीएसटी, RBI क्लियरेंस जैसे कई बहानों से किस्तों में पैसे वसूले जाते थे।
गिरफ्तार आरोपी कहाँ के रहने वाले हैं और इन्होंने किसे निशाना बनाया?
गिरफ्तार 10 आरोपी कर्नाटक और बिहार के विभिन्न जिलों के निवासी हैं। पुलिस के अनुसार गिरोह मुख्य रूप से दक्षिण भारत के लोगों को निशाना बनाता था और स्थानीय भाषाओं में बातचीत कर उनका विश्वास जीतता था।
आरोपियों के खिलाफ कौन-सी धारा में मामला दर्ज हुआ है?
पुलिस ने थाना फेस-3, नोएडा में आईटी एक्ट की धारा 66डी के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया है। अब गिरोह के अन्य सदस्यों और फर्जी बैंक खाते व सिम कार्ड उपलब्ध कराने वालों की तलाश जारी है।
इस ठगी से बचने के लिए नागरिकों को क्या करना चाहिए?
नोएडा पुलिस ने अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी लॉटरी, इनाम या पुरस्कार संबंधी संदेश पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल साइबर हेल्पलाइन या निकटतम पुलिस थाने को दें।
पुलिस को इस गिरोह का सुराग कैसे मिला?
एनसीआरपी और समन्वय पोर्टल पर पिछले करीब दो महीनों से लगातार शिकायतें आ रही थीं, जिनमें से लगभग 18 शिकायतें कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में दर्ज थीं। साइबर सेल की जांच और गोपनीय सूचना के आधार पर सेक्टर-121 में छापा मारा गया।
राष्ट्र प्रेस
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