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नोएडा में ऑनलाइन बेटिंग ऐप से करोड़ों की साइबर ठगी: 'रेड्डीबुक' गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार

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नोएडा में ऑनलाइन बेटिंग ऐप से करोड़ों की साइबर ठगी: 'रेड्डीबुक' गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार

सारांश

नोएडा पुलिस ने 'रेड्डीबुक' बेटिंग ऐप से करोड़ों की ठगी करने वाले तीन युवकों को सेक्टर-122 के एक फ्लैट से गिरफ्तार किया। सोशल मीडिया पर रकम दोगुनी करने का लालच देकर लोगों को फँसाने वाले इस गिरोह के पास से 14 मोबाइल, 35 ATM कार्ड और 4 लैपटॉप बरामद हुए।

मुख्य बातें

नोएडा सेक्टर-113 थाना पुलिस ने 19 जून 2026 को ऑनलाइन बेटिंग ऐप 'रेड्डीबुक' से जुड़े साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया।
गिरफ्तार आरोपी: प्रमांशु कुमार (20) , प्रदीप सिंह (25) और कुलदीप सिंह (26) — तीनों उत्तर प्रदेश के निवासी।
आरोपी सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर लोगों को रकम दोगुनी करने का लालच देते थे और बेटिंग ऐप में निवेश कराते थे।
बरामदगी में 15 सिम कार्ड , 14 मोबाइल फोन , 4 लैपटॉप , 35 ATM कार्ड , 9 चेकबुक और एक लेनोवो टैबलेट शामिल।
फॉरेंसिक जाँच से गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी की कुल रकम का पता लगाया जाएगा।

नोएडा के सेक्टर-113 थाना पुलिस ने 19 जून 2026 को ऑनलाइन बेटिंग ऐप 'रेड्डीबुक' के ज़रिए लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक संगठित साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़ किया और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। सेक्टर-122 स्थित एक फ्लैट पर छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंकिंग दस्तावेज़ और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की।

गिरफ्तारी और छापेमारी का विवरण

पुलिस ने लोकल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से सेक्टर-122 के फ्लैट नंबर डी-44 पर छापा मारा। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रमांशु कुमार (20 वर्ष), प्रदीप सिंह (25 वर्ष) और कुलदीप सिंह (26 वर्ष) के रूप में हुई है। तीनों उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के निवासी हैं और वर्तमान में नोएडा के सेक्टर-122 में किराये पर रह रहे थे।

ठगी का तरीका

जाँच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर्षक विज्ञापन देकर लोगों को ऑनलाइन सट्टेबाज़ी की ओर खींचते थे। वे पीड़ितों को कम समय में रकम दोगुनी करने का लालच देकर बेटिंग वेबसाइट 'रेड्डीबुक' और उससे जुड़े मोबाइल ऐप के माध्यम से निवेश कराते थे। इसके बाद प्राप्त धनराशि को विभिन्न बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों के ज़रिए ट्रांसफर कर धोखाधड़ी को अंजाम दिया जाता था।

बरामद सामग्री

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 15 सिम कार्ड, 4 लैपटॉप, 14 मोबाइल फोन, 35 एटीएम कार्ड, 3 पैन कार्ड, 3 आधार कार्ड, 4 मेट्रो कार्ड, 9 चेकबुक, 4 पासबुक, एक वाई-फाई राउटर और एक लेनोवो टैबलेट बरामद किया। बरामद सामग्री की विविधता और मात्रा से संकेत मिलता है कि गिरोह लंबे समय से कई बैंक खातों और मोबाइल कनेक्शनों का उपयोग कर संगठित रूप से साइबर अपराध को अंजाम दे रहा था।

आगे की जाँच

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेज़ों की फॉरेंसिक जाँच कराई जाएगी, ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान हो सके। यह भी जाँच की जा रही है कि अब तक कितने लोगों को इस गिरोह ने शिकार बनाया है और ठगी की कुल रकम कितनी है। फिलहाल पुलिस आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है और इस साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अपेक्षाकृत कम उम्र के आरोपी संगठित साइबर अपराध में शामिल हो रहे हैं — तीनों गिरफ्तार आरोपियों की उम्र 20 से 26 वर्ष के बीच है। 'रेड्डीबुक' जैसे अवैध बेटिंग प्लेटफॉर्म सोशल मीडिया के ज़रिए तेज़ी से नए शिकार तलाशते हैं, और इनके खिलाफ कार्रवाई अक्सर नेटवर्क के एक छोटे हिस्से तक ही सीमित रह जाती है। असली सवाल यह है कि इन प्लेटफॉर्म्स को डिजिटल भुगतान गेटवे से जोड़ने वाले मुख्य संचालकों तक जाँच कब पहुँचेगी।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा में 'रेड्डीबुक' बेटिंग ठगी गिरोह क्या था?
यह एक संगठित साइबर अपराध गिरोह था जो ऑनलाइन बेटिंग ऐप 'रेड्डीबुक' के ज़रिए सोशल मीडिया पर लोगों को रकम दोगुनी करने का लालच देकर ठगता था। गिरोह के तीन सदस्यों को नोएडा के सेक्टर-122 स्थित एक फ्लैट से गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों के नाम और उम्र क्या हैं?
तीन गिरफ्तार आरोपी हैं — प्रमांशु कुमार (20 वर्ष), प्रदीप सिंह (25 वर्ष) और कुलदीप सिंह (26 वर्ष)। तीनों उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के निवासी हैं।
आरोपी लोगों को कैसे ठगते थे?
आरोपी सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन देकर लोगों को 'रेड्डीबुक' बेटिंग वेबसाइट और उससे जुड़े मोबाइल ऐप में निवेश के लिए प्रेरित करते थे। इसके बाद प्राप्त धनराशि को विभिन्न बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों के ज़रिए ट्रांसफर कर ठगी को अंजाम दिया जाता था।
पुलिस ने छापेमारी में क्या बरामद किया?
पुलिस ने 15 सिम कार्ड, 14 मोबाइल फोन, 4 लैपटॉप, 35 ATM कार्ड, 3 पैन कार्ड, 3 आधार कार्ड, 9 चेकबुक, 4 पासबुक, एक वाई-फाई राउटर और एक लेनोवो टैबलेट बरामद किया। इस सामग्री की फॉरेंसिक जाँच की जाएगी।
इस मामले में आगे क्या होगा?
पुलिस बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेज़ों की फॉरेंसिक जाँच कराएगी। इससे गिरोह के अन्य सदस्यों, नेटवर्क की पहुँच और ठगी की कुल रकम का पता चलेगा। अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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