नोएडा में ऑनलाइन बेटिंग ऐप से करोड़ों की साइबर ठगी: 'रेड्डीबुक' गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
नोएडा के सेक्टर-113 थाना पुलिस ने 19 जून 2026 को ऑनलाइन बेटिंग ऐप 'रेड्डीबुक' के ज़रिए लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक संगठित साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़ किया और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। सेक्टर-122 स्थित एक फ्लैट पर छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंकिंग दस्तावेज़ और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की।
गिरफ्तारी और छापेमारी का विवरण
पुलिस ने लोकल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से सेक्टर-122 के फ्लैट नंबर डी-44 पर छापा मारा। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रमांशु कुमार (20 वर्ष), प्रदीप सिंह (25 वर्ष) और कुलदीप सिंह (26 वर्ष) के रूप में हुई है। तीनों उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के निवासी हैं और वर्तमान में नोएडा के सेक्टर-122 में किराये पर रह रहे थे।
ठगी का तरीका
जाँच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर्षक विज्ञापन देकर लोगों को ऑनलाइन सट्टेबाज़ी की ओर खींचते थे। वे पीड़ितों को कम समय में रकम दोगुनी करने का लालच देकर बेटिंग वेबसाइट 'रेड्डीबुक' और उससे जुड़े मोबाइल ऐप के माध्यम से निवेश कराते थे। इसके बाद प्राप्त धनराशि को विभिन्न बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों के ज़रिए ट्रांसफर कर धोखाधड़ी को अंजाम दिया जाता था।
बरामद सामग्री
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 15 सिम कार्ड, 4 लैपटॉप, 14 मोबाइल फोन, 35 एटीएम कार्ड, 3 पैन कार्ड, 3 आधार कार्ड, 4 मेट्रो कार्ड, 9 चेकबुक, 4 पासबुक, एक वाई-फाई राउटर और एक लेनोवो टैबलेट बरामद किया। बरामद सामग्री की विविधता और मात्रा से संकेत मिलता है कि गिरोह लंबे समय से कई बैंक खातों और मोबाइल कनेक्शनों का उपयोग कर संगठित रूप से साइबर अपराध को अंजाम दे रहा था।
आगे की जाँच
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेज़ों की फॉरेंसिक जाँच कराई जाएगी, ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान हो सके। यह भी जाँच की जा रही है कि अब तक कितने लोगों को इस गिरोह ने शिकार बनाया है और ठगी की कुल रकम कितनी है। फिलहाल पुलिस आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है और इस साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।