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नोएडा में लोन ऐप ब्लैकमेल गिरोह का भंडाफोड़, 6 साइबर अपराधी गिरफ्तार; ₹25 लाख की ठगी उजागर

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नोएडा में लोन ऐप ब्लैकमेल गिरोह का भंडाफोड़, 6 साइबर अपराधी गिरफ्तार; ₹25 लाख की ठगी उजागर

सारांश

नोएडा में साइबर क्राइम पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया जो लोन ऐप उपयोगकर्ताओं की तस्वीरें मॉर्फ कर उन्हें ब्लैकमेल करता था। छह गिरफ्तार आरोपियों पर ₹25 लाख की ठगी का आरोप है। USDT क्रिप्टो और म्यूल खातों का इस्तेमाल रकम छुपाने के लिए किया गया।

मुख्य बातें

गौतमबुद्धनगर साइबर क्राइम पुलिस ने 31 अगस्त 2026 को सेक्टर-141, नोएडा से 6 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपी हैं: निशांत कुमार, अनीस अली, आदित्य कुमार, पंकज कुमार, निक्की शर्मा और शिवा शर्मा — उम्र 18 से 28 वर्ष ।
आरोपियों ने म्यूल बैंक खातों के ज़रिए करीब ₹25 लाख की धोखाधड़ी की।
पीड़ितों की तस्वीरें मॉर्फ कर अश्लील बनाई जाती थीं और वायरल करने की धमकी देकर UPI/QR कोड से वसूली की जाती थी।
मोबाइल से USDT क्रिप्टो लेन-देन के साक्ष्य मिले; 5 शिकायतें राष्ट्रीय साइबर पोर्टल पर दर्ज — UP, पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र से।
पुलिस ने सलाह दी: लोन के लिए केवल RBI अधिकृत संस्थानों और ऐप का उपयोग करें।

गौतमबुद्धनगर साइबर क्राइम पुलिस ने 31 अगस्त 2026 को सेक्टर-141, नोएडा से एक खतरनाक साइबर ठगी गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया, जो प्राइवेट लोन ऐप के ज़रिए कर्ज लेने वाले लोगों को मॉर्फ्ड अश्लील तस्वीरें भेजकर ब्लैकमेल करते थे। पुलिस के अनुसार, आरोपी अब तक म्यूल बैंक खातों के माध्यम से करीब ₹25 लाख की धोखाधड़ी कर चुके हैं।

मुख्य घटनाक्रम

इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण और अभिसूचना संकलन के आधार पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने यह कार्रवाई की। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान निशांत कुमार, अनीस अली, आदित्य कुमार, पंकज कुमार, निक्की शर्मा और शिवा शर्मा के रूप में हुई है। इनकी उम्र 18 से 28 वर्ष के बीच बताई जा रही है। इनमें से कुछ आरोपी नोएडा और ग्रेटर नोएडा में किराये के मकानों में रह रहे थे।

आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन, चार एटीएम/डेबिट कार्ड, दो पासबुक, दो ड्राइविंग लाइसेंस, दो पर्स और ₹810 नकद बरामद किए गए हैं।

ठगी का तरीका

जाँच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य प्राइवेट लोन ऐप से कर्ज लेने वाले लोगों की व्यक्तिगत जानकारी हासिल करते थे। इसके बाद पीड़ितों को वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क किया जाता था और यूपीआई तथा क्यूआर कोड के ज़रिए रकम ट्रांसफर करवाई जाती थी।

इसके साथ ही आरोपी पीड़ितों की तस्वीरों को एडिट और मॉर्फ कर अश्लील तस्वीरों में बदल देते थे। इन तस्वीरों को पीड़ितों को भेजकर उन्हें सोशल मीडिया पर बदनाम करने की धमकी दी जाती थी। कई मामलों में पीड़ितों को अलग-अलग बैंक खातों में पैसे भेजने के लिए मजबूर किया गया।

डिजिटल साक्ष्य और क्रिप्टो लेन-देन

पुलिस की जाँच में आरोपियों के मोबाइल फोन से Binance, WhatsApp और Telegram जैसे ऐप मिले हैं। मोबाइल उपकरणों की जाँच के दौरान USDT (क्रिप्टोकरेंसी) के माध्यम से धनराशि के लेन-देन से संबंधित डिजिटल साक्ष्य भी पुलिस के हाथ लगे हैं। ठगी की रकम आरोपियों के अपने खातों के अलावा म्यूल बैंक खातों में भी जमा कराई जाती थी।

गौरतलब है कि यह गिरोह केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था — नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर इनके खिलाफ पाँच शिकायतें दर्ज मिली हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र से शिकायतें शामिल हैं।

आम जनता पर असर और पुलिस की सलाह

साइबर क्राइम पुलिस ने लोगों को अनधिकृत प्राइवेट लोन ऐप से कर्ज लेने से बचने की सलाह दी है। पुलिस का स्पष्ट कहना है कि लोन के लिए केवल भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से अधिकृत वित्तीय संस्थानों और उनके अधिकृत ऐप का ही इस्तेमाल किया जाए।

आगे की जाँच

पुलिस बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैंकिंग दस्तावेजों की विस्तृत जाँच कर रही है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस गिरोह से और कितने लोग जुड़े हुए हैं तथा कुल कितने पीड़ितों को निशाना बनाया गया। यह मामला देश में लोन ऐप से जुड़े साइबर अपराधों की बढ़ती श्रृंखला में एक और गंभीर कड़ी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर ब्लैकमेल। USDT जैसी क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल बताता है कि ये गिरोह अब पारंपरिक बैंकिंग निगरानी से बचने के लिए परिष्कृत तरीके अपना रहे हैं। RBI ने अनधिकृत लोन ऐप पर बार-बार चेतावनी दी है, लेकिन इनकी संख्या में कमी नहीं आई है — असली सवाल यह है कि ऐप स्टोर प्लेटफॉर्म इन्हें होस्ट करने की ज़िम्मेदारी से कब तक बचते रहेंगे।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा लोन ऐप ब्लैकमेल मामले में क्या हुआ?
गौतमबुद्धनगर साइबर क्राइम पुलिस ने 31 अगस्त 2026 को सेक्टर-141, नोएडा से छह साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। ये आरोपी प्राइवेट लोन ऐप उपयोगकर्ताओं की तस्वीरें मॉर्फ कर उन्हें ब्लैकमेल करते थे और म्यूल बैंक खातों के ज़रिए करीब ₹25 लाख की ठगी कर चुके थे।
आरोपी पीड़ितों को कैसे निशाना बनाते थे?
आरोपी पहले प्राइवेट लोन ऐप से कर्ज लेने वाले लोगों की व्यक्तिगत जानकारी हासिल करते थे। फिर वीडियो कॉल के ज़रिए संपर्क कर पीड़ितों की तस्वीरें मॉर्फ कर अश्लील बनाते थे और उन्हें वायरल करने की धमकी देकर UPI व QR कोड से रकम वसूलते थे।
इस मामले में कितने राज्यों के पीड़ित हैं?
नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर इस गिरोह के खिलाफ पाँच शिकायतें दर्ज हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात से एक-एक तथा महाराष्ट्र से दो शिकायतें शामिल हैं।
क्या आरोपियों ने क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया?
हाँ, पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन से USDT (क्रिप्टोकरेंसी) के माध्यम से धनराशि के लेन-देन के डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। इसके अलावा Binance, WhatsApp और Telegram ऐप भी उनके फोन में पाए गए।
लोन ऐप से जुड़ी ठगी से कैसे बचें?
साइबर क्राइम पुलिस ने सलाह दी है कि लोन के लिए केवल RBI से अधिकृत वित्तीय संस्थानों और उनके आधिकारिक ऐप का ही उपयोग करें। अनधिकृत प्राइवेट लोन ऐप से बिल्कुल दूर रहें, क्योंकि ये आपकी व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग कर सकते हैं।
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