नोएडा साइबर ठगी: फर्जी कंपनियों से करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग, तीन गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
गौतमबुद्धनगर की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने 22 मई 2026 को सेक्टर-44, नोएडा में छापेमारी कर एक सक्रिय साइबर ठगी गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया। यह गिरोह फर्जी कंपनियाँ पंजीकृत कर उनके नाम पर बैंकों में करंट खाते खुलवाता था और उन खातों के माध्यम से देशभर की साइबर धोखाधड़ी से अर्जित रकम को वैध दिखाने का काम करता था।
गिरफ्तारी और बरामदगी
लोकल इंटेलिजेंस और तकनीकी सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में पकड़े गए आरोपियों की पहचान अविनाश झा, हिमांशु कुमार और जितेन्द्र दहिया उर्फ आशू के रूप में हुई है। तीनों दिल्ली के अलग-अलग इलाकों के निवासी बताए जा रहे हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से पाँच मोबाइल फोन, ₹2,800 नकद, एक मोहर और कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं।
ठगी का तरीका: फर्जी कंपनियाँ और करंट अकाउंट
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने कई फर्जी कंपनियाँ तैयार कर उनके नाम पर विभिन्न बैंकों में करंट खाते खुलवाए। इन खातों का उपयोग देशभर में साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को जमा करने, अलग-अलग खातों में स्थानांतरित करने और उसे वैध दिखाने — यानी मनी लॉन्ड्रिंग — के लिए किया जाता था। प्रारंभिक जाँच में इन खातों में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन सामने आए हैं।
कई राज्यों में दर्ज हैं शिकायतें
जाँच एजेंसियों के अनुसार इन आरोपियों के खिलाफ कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर और पंजाब समेत कई राज्यों में साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायतें दर्ज हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में मनी म्यूल नेटवर्क के जरिए साइबर अपराध की घटनाएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं तथा कितने बैंक खातों का दुरुपयोग किया गया।
कानूनी कार्रवाई
थाना साइबर क्राइम गौतमबुद्धनगर में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(डी) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आगे की जाँच जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।
पुलिस की सतर्कता की अपील
साइबर क्राइम पुलिस ने आम नागरिकों को सावधान करते हुए कहा कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने नाम से बैंक खाता या फर्म पंजीकृत न कराएँ और न ही किसी को अपना खाता इस्तेमाल करने दें। अधिकारियों ने ओटीपी, यूपीआई पिन, सीवीवी और नेट बैंकिंग पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारियाँ किसी के साथ साझा न करने की अपील की। साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है।