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साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़: दिल्ली पुलिस ने राजस्थान से दो मनी म्यूल्स दबोचे, 30 फर्जी खातों का नेटवर्क उजागर

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साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़: दिल्ली पुलिस ने राजस्थान से दो मनी म्यूल्स दबोचे, 30 फर्जी खातों का नेटवर्क उजागर

सारांश

दिल्ली साइबर पुलिस ने राजस्थान से दो मनी म्यूल्स पकड़े, जिन्होंने ₹1,91,000 की साइबर ठगी की रकम को 30 फर्जी बैंक खातों के ज़रिये ठिकाने लगाया। एक आरोपी 2% कमीशन पर खाते उपलब्ध कराता था, दूसरा पूरे नेटवर्क का संचालन करता था।

मुख्य बातें

दिल्ली की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस ने 8 जून 2026 को रोहित कुमार बैरवा और लोकेश महावर को जयपुर, राजस्थान से गिरफ्तार किया।
पीड़ित के बैंक खाते से 22-23 अप्रैल के बीच कुल ₹1,91,000 की अनधिकृत निकासी की गई थी।
रकम यस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक के फर्जी खातों में स्थानांतरित की गई।
आरोपी लोकेश महावर ने साइबर गिरोहों को 30 फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराए थे।
रोहित बैरवा को धोखाधड़ी की रकम पर 2% कमीशन मिलता था।
दोनों आरोपी न्यायालय में पेश; गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी।

नई दिल्ली की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस ने 8 जून 2026 को एक सक्रिय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दो प्रमुख आरोपियों — रोहित कुमार बैरवा और लोकेश महावर — को जयपुर, राजस्थान से गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने धोखाधड़ी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल किए गए 30 फर्जी बैंक खातों के नेटवर्क का खुलासा किया। यह मामला एक पीड़ित के बैंक खाते से ₹1,91,000 की अनधिकृत निकासी की शिकायत के बाद दर्ज हुआ था।

मुख्य घटनाक्रम

पीड़ित ने पुलिस को बताया कि 22 अप्रैल को उनका मोबाइल फोन अचानक बंद हो गया, स्क्रीन काली पड़ गई और डिवाइस असामान्य रूप से गर्म होने लगा। जब फोन दोबारा चालू हुआ तो उन्होंने पाया कि उनके बैंक खाते से बिना किसी अनुमति के ₹95,000 निकाल लिए गए थे। अगले दिन 23 अप्रैल को उसी खाते से ₹96,000 का एक और अनधिकृत लेनदेन सामने आया। इस प्रकार पीड़ित के खाते से कुल ₹1,91,000 की धोखाधड़ी की गई।

पीड़ित के अनुसार, उन्होंने न तो ये लेनदेन शुरू किए थे और न ही अधिकृत किए थे। उन्हें संदेह है कि उनके मोबाइल डिवाइस और बैंकिंग क्रेडेंशियल्स तक अज्ञात साइबर धोखेबाजों ने अनधिकृत पहुँच बना ली थी।

जाँच और गिरफ्तारी

शिकायत के आधार पर पुलिस स्टेशन साइबर सेंट्रल ने एफआईआर दर्ज कर एक विशेष जाँच टीम गठित की। टीम ने विस्तृत तकनीकी और वित्तीय विश्लेषण किया, जिसमें सामने आया कि पीड़ित की रकम यस बैंक में रोहित कुमार बैरवा के नाम पर खुले खाते और एक अन्य लाभार्थी के कोटक महिंद्रा बैंक खाते में स्थानांतरित की गई थी।

लाभार्थी खातों के विवरण, तकनीकी निगरानी और स्थानीय पूछताछ के आधार पर टीम जयपुर पहुँची, जहाँ आरोपी रोहित कुमार बैरवा को पकड़ा गया। उसकी निशानदेही पर उसी दिन लोकेश महावर को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

आरोपियों की भूमिका

पूछताछ में रोहित कुमार बैरवा ने स्वीकार किया कि उसने लोकेश महावर को धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि पर 2 प्रतिशत कमीशन के बदले कई बैंक खाते उपलब्ध कराए थे। लोकेश महावर के बारे में जाँच में खुलासा हुआ कि वह साइबर धोखाधड़ी गिरोहों को फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने में सक्रिय रूप से शामिल था और उसने अवैध धनराशि के हस्तांतरण के लिए करीब 30 फर्जी बैंक खातों की व्यवस्था की थी।

गौरतलब है कि ऐसे व्यक्ति, जो अपने बैंक खाते किराये पर या कमीशन पर साइबर अपराधियों को देते हैं, 'मनी म्यूल्स' कहलाते हैं और भारतीय साइबर अपराध के मामलों में इनकी भूमिका तेज़ी से उजागर हो रही है।

आगे की जाँच

दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर संबंधित न्यायालय में पेश किया जा चुका है। पुलिस के अनुसार गिरोह के शेष सदस्यों की पहचान, अतिरिक्त खाताधारकों का पता लगाना और वित्तीय लेनदेन का पूर्ण विश्लेषण करना अभी जारी है। यह मामला दर्शाता है कि किस प्रकार साइबर अपराधी दूर-दराज़ के राज्यों में मनी म्यूल नेटवर्क के ज़रिये पीड़ितों की गाढ़ी कमाई को गायब करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ छोटे कमीशन के लालच में लोग अपने बैंक खाते साइबर अपराधियों को किराये पर दे देते हैं। 30 फर्जी खातों का नेटवर्क बताता है कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि एक संगठित ढाँचा है। असली सवाल यह है कि बैंकों के KYC तंत्र इतने बड़े पैमाने पर फर्जी खाते खुलने से क्यों नहीं रोक पाए। जब तक बैंकिंग प्रणाली और साइबर पुलिस की जाँच एक साथ नहीं चलेगी, ऐसे नेटवर्क नए खातों के साथ फिर खड़े हो जाएंगे।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली साइबर पुलिस ने राजस्थान से किसे और क्यों गिरफ्तार किया?
दिल्ली की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस ने रोहित कुमार बैरवा और लोकेश महावर को जयपुर से गिरफ्तार किया। ये दोनों एक साइबर धोखाधड़ी गिरोह के लिए मनी म्यूल के रूप में काम करते थे और पीड़ित के खाते से ₹1,91,000 की ठगी की रकम को फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर करने में शामिल थे।
मनी म्यूल क्या होता है और इस मामले में इनकी क्या भूमिका थी?
मनी म्यूल वह व्यक्ति होता है जो साइबर अपराधियों को कमीशन के बदले अपना बैंक खाता उपलब्ध कराता है, ताकि धोखाधड़ी की रकम को इधर-उधर किया जा सके। इस मामले में रोहित बैरवा ने 2% कमीशन पर खाते दिए, जबकि लोकेश महावर ने 30 फर्जी खातों का पूरा नेटवर्क संचालित किया।
पीड़ित के साथ साइबर धोखाधड़ी कैसे हुई?
22 अप्रैल को पीड़ित का मोबाइल अचानक बंद हो गया और डिवाइस असामान्य रूप से गर्म हो गया। इसके बाद उनके खाते से बिना अनुमति के ₹95,000 और अगले दिन ₹96,000 निकाल लिए गए। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने मोबाइल और बैंकिंग एप्लिकेशन तक अनधिकृत पहुँच बनाकर यह रकम फर्जी खातों में ट्रांसफर की।
इस मामले में कौन से बैंक खाते शामिल थे?
जाँच में सामने आया कि पीड़ित की रकम यस बैंक में रोहित कुमार बैरवा के नाम पर खुले खाते और एक अन्य लाभार्थी के कोटक महिंद्रा बैंक खाते में स्थानांतरित की गई थी। लोकेश महावर ने कुल 30 फर्जी बैंक खातों की व्यवस्था की थी।
क्या इस गिरोह के और सदस्य हैं और आगे क्या होगा?
पुलिस के अनुसार गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान और अतिरिक्त खाताधारकों का पता लगाने के लिए जाँच जारी है। दोनों गिरफ्तार आरोपियों को संबंधित न्यायालय में पेश किया जा चुका है और वित्तीय लेनदेन का पूर्ण विश्लेषण भी चल रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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