11 अगस्त 2026
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झारखंड: 24 राज्यों में 274 साइबर ठगी मामलों से जुड़े गिरोह का पर्दाफाश, रामगढ़ से 4 गिरफ्तार

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झारखंड: 24 राज्यों में 274 साइबर ठगी मामलों से जुड़े गिरोह का पर्दाफाश, रामगढ़ से 4 गिरफ्तार

सारांश

झारखंड के रामगढ़ में पुलिस ने एक ऐसे साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जो 24 राज्यों में 274 अपराधों से जुड़ा था। MSME खाते की आड़ में फर्जी बैंकिंग, व्हाट्सएप-टेलीग्राम के ज़रिए OTP शेयरिंग — यह महज स्थानीय गिरोह नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राष्ट्रीय साइबर अपराध तंत्र था।

मुख्य बातें

रामगढ़ पुलिस ने 30 अप्रैल 2026 को साइबर ठगी गिरोह के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया।
गिरोह के खिलाफ देश के 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 274 शिकायतें दर्ज हैं।
गृह मंत्रालय के 'प्रतिबिम्ब पोर्टल' पर संदिग्ध लेनदेन की सूचना से मामले का खुलासा हुआ।
'गणेश इंटरप्राइजेज' के नाम से खुलवाया गया MSME बैंक खाता ठगी की रकम एकत्र करने का माध्यम था।
आरोपी व्हाट्सएप और टेलीग्राम के ज़रिए OTP व बैंकिंग डिटेल्स साइबर अपराधियों तक पहुँचाते थे।
पुलिस अब गिरोह के शेष सदस्यों और राष्ट्रीय नेटवर्क की जाँच कर रही है।

झारखंड के रामगढ़ जिले में पुलिस ने 30 अप्रैल 2026 को एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए उसके चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह फर्जी बैंक खातों के माध्यम से देश के 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 274 साइबर अपराध को अंजाम दे चुका है।

कैसे हुआ खुलासा

मामले की शुरुआत तब हुई जब गृह मंत्रालय की 'आई फोर सी' परियोजना के अंतर्गत संचालित 'प्रतिबिम्ब पोर्टल' पर एक संदिग्ध बैंक खाते में असामान्य लेनदेन की सूचना दर्ज हुई। जाँच में सामने आया कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के एक करंट अकाउंट में अलग-अलग राज्यों से लगातार रकम जमा की जा रही थी।

सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक मुकेश लुनायत के निर्देश पर एक विशेष जाँच टीम गठित की गई और तकनीकी निगरानी शुरू हुई। जाँच में परत-दर-परत खुलासा हुआ कि 'गणेश इंटरप्राइजेज' के नाम से एमएसएमई (MSME) परियोजना के तहत खुलवाया गया यह बैंक खाता वास्तव में ठगी की रकम एकत्र करने का माध्यम था।

गिरफ्तार आरोपी कौन हैं

पुलिस ने छापेमारी कर राहुल गुप्ता (37), रवि कुमार वर्मा (34), रितेश अग्रवाल उर्फ मुन्ना (40) और सोनू कुमार झा (34) को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि खाता खोलने से लेकर उसे संचालित करने तक एक सुनियोजित तंत्र काम कर रहा था।

पुलिस के अनुसार, कुछ आरोपी कमीशन के बदले फर्जी बैंक खाते खुलवाते थे, जबकि अन्य सदस्य ओटीपी (OTP), मोबाइल बैंकिंग क्रेडेंशियल और खातों की विस्तृत जानकारी व्हाट्सएपटेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से देशभर के साइबर अपराधियों तक पहुँचाते थे।

किन राज्यों में हुई ठगी

पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में बड़े पैमाने पर साइबर ठगी की गई। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में साइबर अपराध के मामलों में तेज़ी से वृद्धि हो रही है और सरकार डिजिटल धोखाधड़ी पर लगाम कसने के लिए केंद्रीय निगरानी तंत्र मज़बूत कर रही है।

आगे की जाँच

मामले की गंभीरता को देखते हुए रामगढ़ पुलिस अब इस गिरोह के शेष सदस्यों की पहचान और उसके राष्ट्रीय नेटवर्क की कड़ियों को खंगाल रही है। जाँच एजेंसियाँ यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क से और कितने राज्यों में ठगी हुई और कुल कितनी राशि का लेनदेन हुआ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड रामगढ़ में किस साइबर गिरोह को गिरफ्तार किया गया?
रामगढ़ पुलिस ने एक संगठित साइबर ठगी गिरोह के चार सदस्यों — राहुल गुप्ता, रवि कुमार वर्मा, रितेश अग्रवाल उर्फ मुन्ना और सोनू कुमार झा — को 30 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार किया। यह गिरोह 24 राज्यों में 274 साइबर अपराध मामलों से जुड़ा पाया गया।
प्रतिबिम्ब पोर्टल क्या है और इसने कैसे मदद की?
'प्रतिबिम्ब पोर्टल' गृह मंत्रालय की 'आई फोर सी' परियोजना के तहत संचालित एक साइबर निगरानी प्रणाली है। इसी पोर्टल पर संदिग्ध बैंक खाते में असामान्य लेनदेन की सूचना मिलने के बाद रामगढ़ पुलिस ने जाँच शुरू की और गिरोह का भंडाफोड़ हुआ।
गणेश इंटरप्राइजेज का इस साइबर ठगी से क्या संबंध था?
'गणेश इंटरप्राइजेज' के नाम से MSME परियोजना के तहत खुलवाया गया SBI का करंट अकाउंट वास्तव में देशभर से ठगी की रकम एकत्र करने का माध्यम था। आरोपियों ने इसे वैध व्यवसायिक खाते की आड़ में साइबर अपराध नेटवर्क के लिए इस्तेमाल किया।
इस गिरोह ने किन राज्यों में ठगी की?
पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क के ज़रिए महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल समेत देश के 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ठगी की गई।
इस साइबर नेटवर्क में OTP और बैंकिंग डिटेल्स कैसे साझा की जाती थीं?
आरोपी व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से OTP, मोबाइल बैंकिंग क्रेडेंशियल और खातों की जानकारी देशभर के साइबर अपराधियों तक पहुँचाते थे। कुछ सदस्य कमीशन के बदले फर्जी बैंक खाते खुलवाते थे, जबकि अन्य इन्हें ऑपरेट करते थे।
राष्ट्र प्रेस
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