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नोएडा में जॉब फ्रॉड गिरोह का भंडाफोड़: 5 साइबर ठग गिरफ्तार, 9 मोबाइल-17 सिम बरामद

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नोएडा में जॉब फ्रॉड गिरोह का भंडाफोड़: 5 साइबर ठग गिरफ्तार, 9 मोबाइल-17 सिम बरामद

सारांश

नोएडा पुलिस ने नौकरी और प्रशिक्षण के नाम पर ठगी करने वाले 5 युवाओं को सेक्टर-63 से गिरफ्तार किया। इनके पास से 9 मोबाइल, 17 सिम और फर्जी दस्तावेज मिले। देश के तीन राज्यों में 5 शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस नेटवर्क के और सदस्यों की तलाश में है।

मुख्य बातें

गौतमबुद्धनगर साइबर क्राइम पुलिस ने 24 जून 2026 को नोएडा सेक्टर-63 से जॉब फ्रॉड गिरोह के 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
आरोपी कंपनियों का डेटा चोरी कर फ़ोन कॉल के ज़रिए नौकरी-प्रशिक्षण का झाँसा देकर आर्थिक धोखाधड़ी करते थे।
बरामदगी में 9 मोबाइल फ़ोन , 1 लैपटॉप , 17 सिम कार्ड , 4 डेबिट कार्ड , 2 कंपनी मोहरें और फर्जी दस्तावेज शामिल।
आरोपियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश (1) , बिहार (1) और महाराष्ट्र (3) में कुल 5 शिकायतें दर्ज।
मामला BNS की धाराओं और IT अधिनियम की धारा 66C व 66D के तहत दर्ज; नेटवर्क की व्यापक जाँच जारी।

गौतमबुद्धनगर साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने 24 जून 2026 को नोएडा सेक्टर-63 से एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह नौकरी और प्रशिक्षण दिलाने का झाँसा देकर बेरोज़गार युवाओं को आर्थिक धोखाधड़ी का शिकार बना रहा था। पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई अभिसूचना संकलन और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर की गई।

कैसे काम करता था यह गिरोह

पुलिस के अनुसार, आरोपी विभिन्न कंपनियों का डेटा चोरी कर उसका दुरुपयोग करते थे और फिर फ़ोन कॉल के ज़रिए लोगों से संपर्क साधते थे। वे खुद को नामी कंपनियों के प्रतिनिधि बताकर नौकरी या प्रशिक्षण का प्रलोभन देते और रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग या दस्तावेज़ शुल्क के नाम पर रकम ऐंठते थे। गौरतलब है कि इस तरह के जॉब फ्रॉड गिरोह अक्सर बेरोज़गारी की मार झेल रहे युवाओं को निशाना बनाते हैं, जो किसी भी अवसर को जल्दी से जल्दी भुनाना चाहते हैं।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

पकड़े गए पाँचों आरोपी अलग-अलग राज्यों से ताल्लुक रखते हैं। इनमें आदित्य चौहान (20 वर्ष) निवासी एटा, सुमित कुमार (19 वर्ष) निवासी दिल्ली, सूरज गुप्ता (23 वर्ष) निवासी कानपुर नगर, ऋषभ (20 वर्ष) निवासी फिरोजाबाद और गौरव पाठक (23 वर्ष) निवासी सुल्तानपुर शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि इनमें से दो आरोपी बीसीए, एक बीएससी, एक बीए और एक 12वीं तक शिक्षित हैं — यानी तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं ने इस ठगी के नेटवर्क को संचालित किया।

बरामद सामग्री और कानूनी कार्रवाई

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्ज़े से 9 मोबाइल फ़ोन, 1 लैपटॉप, 17 सिम कार्ड, 4 डेबिट कार्ड, 2 कंपनी मोहरें, चेक बुक, पास बुक और बड़ी मात्रा में कॉलिंग डेटा बरामद किया। इस मामले में थाना साइबर क्राइम, गौतमबुद्धनगर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ IT अधिनियम की धारा 66C और 66D के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

देशभर में शिकायतें, जाँच जारी

प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि आरोपियों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में कुल 5 शिकायतें दर्ज हैं — उत्तर प्रदेश में 1, बिहार में 1 और महाराष्ट्र में 3। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित सहयोगियों की भी जाँच कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में जॉब फ्रॉड के मामलों में तेज़ी से इज़ाफा हो रहा है और साइबर अपराध की जड़ें छोटे शहरों तक फैलती जा रही हैं।

पुलिस की आम नागरिकों से अपील

गौतमबुद्धनगर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि नौकरी या प्रशिक्षण के नाम पर आने वाले अनजान कॉल, संदेश या ई-मेल पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें। किसी भी कंपनी की भर्ती संबंधी जानकारी केवल उसकी आधिकारिक वेबसाइट से ही प्राप्त करें और ओटीपी, आधार, पैन जैसी गोपनीय जानकारी किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के नेटवर्क की जाँच पूरी होने के बाद और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो वही कौशल अपराध का औज़ार बन जाता है। देशभर में जॉब फ्रॉड के मामले बढ़ रहे हैं, फिर भी जागरूकता अभियान और साइबर पुलिस की क्षमता अभी भी अपराधियों की रफ़्तार से पीछे है। तीन राज्यों में फैली शिकायतें यह भी बताती हैं कि ये गिरोह राज्य की सीमाओं के पार काम करते हैं, जिससे समन्वित राष्ट्रीय जाँच की ज़रूरत और भी स्पष्ट हो जाती है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा में जॉब फ्रॉड गिरोह कैसे काम करता था?
यह गिरोह कंपनियों का डेटा चोरी कर फ़ोन कॉल के ज़रिए लोगों से संपर्क करता था और नौकरी या प्रशिक्षण का झाँसा देकर रजिस्ट्रेशन या प्रोसेसिंग शुल्क के नाम पर पैसे ऐंठता था। आरोपी खुद को विभिन्न कंपनियों का प्रतिनिधि बताते थे।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं और कहाँ के रहने वाले हैं?
पाँचों आरोपी हैं — आदित्य चौहान (एटा), सुमित कुमार (दिल्ली), सूरज गुप्ता (कानपुर नगर), ऋषभ (फिरोजाबाद) और गौरव पाठक (सुल्तानपुर)। इनकी उम्र 19 से 23 वर्ष के बीच है और इनमें से दो बीसीए, एक बीएससी, एक बीए तथा एक 12वीं तक शिक्षित हैं।
पुलिस ने आरोपियों के पास से क्या-क्या बरामद किया?
छापेमारी में 9 मोबाइल फ़ोन, 1 लैपटॉप, 17 सिम कार्ड, 4 डेबिट कार्ड, 2 कंपनी मोहरें, चेक बुक, पास बुक और बड़ी मात्रा में कॉलिंग डेटा बरामद किया गया। ये सभी साइबर ठगी संचालन में इस्तेमाल हो रहे थे।
इस मामले में कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
थाना साइबर क्राइम, गौतमबुद्धनगर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ IT अधिनियम की धारा 66C (पहचान की चोरी) और 66D (धोखाधड़ी) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
जॉब फ्रॉड से बचने के लिए क्या सावधानियाँ बरतें?
पुलिस की सलाह है कि अनजान कॉल, संदेश या ई-मेल पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें। नौकरी की जानकारी केवल कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट से लें और किसी भी अज्ञात व्यक्ति को ओटीपी, आधार, पैन या बैंक विवरण साझा न करें।
राष्ट्र प्रेस
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