26 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

लखनऊ साइबर ठगी गैंग का भंडाफोड़: पाँच आरोपी गिरफ्तार, ₹8.19 लाख की ठगी कबूली

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
लखनऊ साइबर ठगी गैंग का भंडाफोड़: पाँच आरोपी गिरफ्तार, ₹8.19 लाख की ठगी कबूली

सारांश

लखनऊ में महिगवां पुलिस और साइबर सेल ने मिलकर एक अंतरजनपदीय साइबर ठगी गिरोह को तोड़ा — पाँच आरोपी गिरफ्तार, ₹8.19 लाख की ठगी कबूली। गिरोह भीड़ में मोबाइल चुराकर सिम से UPI ठगी करता था। मुंबई में भी उसी दिन एक अलग साइबर गैंग पकड़ा गया।

मुख्य बातें

लखनऊ की महिगवां पुलिस और साइबर सेल ने 26 जून 2026 को संयुक्त कार्रवाई में 5 आरोपी गिरफ्तार किए।
आरोपियों ने महिगवां और बीकेटी में ₹8.19 लाख की साइबर ठगी कबूल की।
बरामदगी में 11 एंड्रॉयड फोन , 3 की-पैड मोबाइल , ₹8,358 नकद , बैंक व आधार-पैन कार्ड, सिम कार्ड शामिल।
वारदात में इस्तेमाल स्विफ्ट डिजायर कार और स्प्लेंडर बाइक भी जब्त।
गिरोह भीड़भाड़ वाले इलाकों में मोबाइल चुराकर UPI के ज़रिए बैंक खातों से रकम उड़ाता था।
उसी दिन मुंबई साइबर पुलिस ने फर्जी APK से ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के 6 आरोपी झारखंड व दिल्ली से गिरफ्तार किए।

लखनऊ पुलिस की महिगवां शाखा और साइबर सेल ने 26 जून 2026 को एक अंतरजनपदीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों ने पूछताछ में महिगवां और बीकेटी क्षेत्रों में करीब ₹8.19 लाख की ठगी कबूल की है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश में बढ़ते मोबाइल-आधारित साइबर अपराधों के खिलाफ पुलिस की सक्रियता का ताज़ा उदाहरण है।

गिरफ्तार आरोपी और बरामदगी

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान राम स्वरूप, अमित कुमार, सुभाष उर्फ सतीश उर्फ छोटू, पुत्तीलाल और राजू रावत के रूप में हुई है। तलाशी अभियान के दौरान पुलिस ने इनके पास से 11 एंड्रॉयड फोन, 3 की-पैड मोबाइल, ₹8,358 नकद, बैंक कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड और सिम कार्ड बरामद किए।

इसके अतिरिक्त, वारदात में इस्तेमाल की गई एक स्विफ्ट डिजायर कार और एक स्प्लेंडर बाइक भी जब्त की गई है।

ठगी का तरीका

जाँच में सामने आया है कि यह गिरोह भीड़भाड़ वाले इलाकों में मोबाइल चोरी या लूट की वारदात को अंजाम देता था। इसके बाद चोरी किए गए फोन की सिम निकालकर अपने डिवाइस में लगाई जाती थी और UPI तथा बैंक खातों के ज़रिए पीड़ितों की रकम उड़ा ली जाती थी। यह तकनीक तेज़ और कम जोखिम वाली होने के कारण साइबर अपराधियों में तेज़ी से लोकप्रिय हो रही है।

पुलिस अधिकारी का बयान

अपर पुलिस उपायुक्त (क्राइम), लखनऊ, किरण यादव ने बताया कि लखनऊ पुलिस क्राइम ब्रांच ने मोबाइल चोरी, लूट और बैंक खातों से साइबर ठगी करने वाले इस अंतरजनपदीय गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पाँचों आरोपियों को गिरफ्तार किया। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर आगे की विधिवत कार्रवाई की जा रही है।

व्यापक संदर्भ: मुंबई में भी हुई कार्रवाई

गौरतलब है कि इसी दौरान मुंबई साइबर पुलिस ने भी एक अलग अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया, जो फर्जी APK (एप्लीकेशन पैकेज फाइल) के ज़रिए मोबाइल हैक करके ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी करता था। उस मामले में झारखंड और दिल्ली से 6 आरोपी गिरफ्तार किए गए। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर अपराध के मामलों में तेज़ वृद्धि दर्ज की जा रही है।

आगे की कार्रवाई

पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क की तह तक पहुँचने के लिए गहन जाँच कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल चोरी और UPI ठगी का यह संयुक्त मॉडल तेज़ी से फैल रहा है और नागरिकों को भीड़भाड़ वाले स्थानों पर विशेष सतर्कता बरतने की ज़रूरत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अंतरराज्यीय उद्योग का रूप ले चुकी है। चिंता की बात यह है कि इस मॉडल में तकनीकी परिष्कार की ज़रूरत नहीं — केवल एक चोरी का फोन और एक सक्रिय सिम काफी है। पुलिस की गिरफ्तारियाँ स्वागतयोग्य हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि बैंक और टेलीकॉम कंपनियाँ सिम-स्वैप और UPI लॉगिन के लिए रियल-टाइम अलर्ट तंत्र को कितनी गंभीरता से लागू कर रही हैं — क्योंकि गिरफ्तारी के बाद भी पीड़ितों की रकम वापस नहीं आती।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ साइबर ठगी गिरोह किस तरह ठगी करता था?
यह गिरोह भीड़भाड़ वाले इलाकों में मोबाइल चोरी या लूट के बाद फोन की सिम निकालकर अपने डिवाइस में लगाता था और UPI तथा बैंक खातों के ज़रिए पीड़ितों के पैसे निकाल लेता था। पूछताछ में आरोपियों ने महिगवां और बीकेटी में ₹8.19 लाख की ठगी स्वीकार की है।
गिरफ्तार पाँचों आरोपी कौन हैं?
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राम स्वरूप, अमित कुमार, सुभाष उर्फ सतीश उर्फ छोटू, पुत्तीलाल और राजू रावत के रूप में हुई है। इन सभी को न्यायालय में पेश कर दिया गया है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से क्या बरामद किया?
पुलिस ने 11 एंड्रॉयड फोन, 3 की-पैड मोबाइल, ₹8,358 नकद, बैंक कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड, सिम कार्ड, एक स्विफ्ट डिजायर कार और एक स्प्लेंडर बाइक बरामद की है।
क्या इस तरह की साइबर ठगी सिर्फ लखनऊ तक सीमित है?
नहीं, यह एक व्यापक समस्या है। उसी दिन मुंबई साइबर पुलिस ने भी फर्जी APK फाइलों से मोबाइल हैक कर ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह के 6 आरोपियों को झारखंड और दिल्ली से गिरफ्तार किया।
नागरिक मोबाइल-आधारित UPI ठगी से कैसे बचें?
विशेषज्ञों के अनुसार भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मोबाइल की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें और फोन खोने पर तुरंत बैंक व टेलीकॉम कंपनी को सूचित कर सिम ब्लॉक करवाएँ। UPI ऐप पर लॉगिन अलर्ट और लेनदेन सीमा सक्रिय रखना भी सुरक्षा की दृष्टि से ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 दिन पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले