गुजरात साइबर पुलिस ने अंतरराज्यीय ठगी गिरोह तोड़ा, 7 गिरफ्तार; ₹5 करोड़ से अधिक का लेनदेन उजागर
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने 10 जुलाई 2026 को एक बड़े अंतरराज्यीय ऑनलाइन ठगी और उगाही गिरोह का भंडाफोड़ किया, जिसमें सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह सोशल मीडिया पर यौन शक्ति बढ़ाने वाली दवाओं के विज्ञापन के जरिए लोगों को फँसाकर नकली पुलिस अधिकारी बनकर उनसे पैसे ऐंठता था। प्रारंभिक जाँच के अनुसार, गिरोह ने देशभर में 4,000 से 5,000 लोगों को ठगा हो सकता है।
ठगी का तरीका: विज्ञापन से डर तक
जाँच में सामने आया कि आरोपी फेसबुक और इंस्टाग्राम पर यौन शक्ति बढ़ाने वाली दवाओं के विज्ञापन चलाते थे। ग्राहक इन दवाओं को इंडिया पोस्ट और निजी कूरियर के ज़रिए कैश ऑन डिलीवरी पर मँगाते थे। पार्सल मिलने और भुगतान के बाद गिरोह के सदस्य खुद को पुलिस अधिकारी बताकर फोन करते और दावा करते कि खरीदी गई दवा प्रतिबंधित है तथा गिरफ्तारी से बचने के लिए पैसे देने होंगे।
जो लोग पार्सल ही नहीं लेते थे, उन्हें पहले डॉक्टर और फिर पुलिस अधिकारी बनकर फोन किया जाता था। उन्हें बताया जाता था कि ऑनलाइन प्रतिबंधित दवा मँगाने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई है। मामला रफा-दफा कराने के नाम पर ₹2,000 से ₹1 लाख तक की माँग की जाती थी।
कॉल सेंटर और छापेमारी
पुलिस ने अहमदाबाद के वस्त्राल इलाके में संचालित 15 सीटों वाले कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के बिधूना में शुरू होने जा रहे एक अन्य कॉल सेंटर को भी बंद कराया गया। दोनों स्थानों पर एक साथ की गई छापेमारी में सात लोगों को हिरासत में लिया गया।
बरामद सामग्री में 44 मोबाइल फोन, 23 कंप्यूटर सीपीयू, 2 लैपटॉप, 1 मॉनिटर, 3 कॉलर आईडी फोन, 3 पेन ड्राइव, 5 बैंक पासबुक, 1 चेक बुक, 7 क्यूआर कोड, कॉलर स्क्रिप्ट, यौन शक्ति बढ़ाने वाली दवाओं के दो बॉक्स और तन्वी एंटरप्राइजेज, असावानी आयुर्वेद, डीआर आयुर्वेद तथा आयुर शक्ति आयुर्वेद के नाम वाली रबर स्टैंप शामिल हैं।
गिरफ्तार आरोपी और भूमिकाएँ
गिरफ्तार आरोपियों में धीरेंद्र राजावत (36), आर्यन रावल (20), अनिरुद्ध भदौरिया (20), सुमित दिवाकर (20), देवप्रताप सिंह भदौरिया (20), देवेंद्र सिंह राजावत (33) और प्रिया कुर्मी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, धीरेंद्र राजावत गिरोह का मास्टरमाइंड और कॉल सेंटर संचालक था, जबकि प्रिया कुर्मी मैनेजर, टीम लीडर और 'क्लोजर' की भूमिका निभाती थी।
वित्तीय जाँच और पूर्व शिकायतें
डिजिटल साक्ष्यों की जाँच में 14 बैंक खातों का पता चला है, जिनमें ₹5 करोड़ से अधिक का लेनदेन हुआ है। इन खातों से जुड़ी राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर पहले से छह शिकायतें दर्ज हैं — दिल्ली से एक, राजस्थान से दो और उत्तर प्रदेश से तीन।
यह ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में साइबर उगाही के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और डिजिटल ठगी के नए तरीके लगातार उभर रहे हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य और आयुर्वेदिक उत्पादों के विज्ञापनों पर बिना जाँच के भरोसा न करें, किसी भी दवा को डॉक्टर की सलाह के बिना न खरीदें और किसी भी अनजान व्यक्ति या वेबसाइट के साथ ओटीपी, बैंकिंग जानकारी, सीवीवी या यूपीआई पिन साझा न करें।