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मणिपुर: छह नागा नागरिकों की हत्या मामले में NIA-CRPF की संयुक्त कार्रवाई, दंपति गिरफ्तार

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मणिपुर: छह नागा नागरिकों की हत्या मामले में NIA-CRPF की संयुक्त कार्रवाई, दंपति गिरफ्तार

सारांश

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में छह नागा नागरिकों की हत्या के मामले में NIA, CRPF और मणिपुर पुलिस ने दंपति प्रदीप और अयिंगबी को गिरफ्तार किया। 13 मई के अपहरण और 11 जून को शव बरामद होने के बाद यह मामला राज्य की जातीय हिंसा का सबसे संवेदनशील प्रकरण बन चुका है।

मुख्य बातें

NIA, CRPF और मणिपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने 10 जुलाई को लेइलोन वैफेई गांव, कांगपोकपी में छापा मारकर दंपति प्रदीप और अयिंगबी को गिरफ्तार किया।
छह नागा नागरिकों का कथित तौर पर 13 मई को अपहरण हुआ था; 11 जून को खाराम वैफेई गांव के निकट जंगल से शव बरामद हुए।
13 मई की हिंसा में तीन चर्च नेताओं की भी हत्या हुई और करीब 50 लोगों को बंधक बनाया गया था।
कुकी-जो काउंसिल ( KZC ) ने सार्वजनिक माफी मांगी, लेकिन नागा संगठनों ने इसे 'ईमानदार नहीं' बताकर खारिज किया।
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने जांच NIA को सौंपने की घोषणा की थी।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और मणिपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने शुक्रवार, 10 जुलाई को कांगपोकपी जिले के लेइलोन वैफेई गांव में छापा मारकर एक दंपति को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई छह नागा नागरिकों के अपहरण और हत्या के मामले में की गई है, जो मणिपुर की जातीय हिंसा के सबसे संवेदनशील प्रकरणों में से एक बन चुका है।

गिरफ्तारी का विवरण

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, खुफिया जानकारी के आधार पर शुक्रवार तड़के संयुक्त अभियान चलाया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रदीप और उनकी पत्नी अयिंगबी के रूप में हुई है — दोनों लेइलोन वैफेई गांव के निवासी हैं। पुलिस ने उनके घर और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान चलाकर आवश्यक साक्ष्य भी जुटाए हैं।

मुख्य घटनाक्रम: 13 मई से 11 जून तक

पुलिस के अनुसार, छह नागा नागरिकों का कथित तौर पर 13 मई को अपहरण किया गया था। लगभग एक महीने बाद 11 जून को कांगपोकपी जिले के खाराम वैफेई गांव के निकट जंगल से उनके शव बरामद हुए।

13 मई की हिंसा के दौरान कांगपोकपी और सेनापति जिलों में अलग-अलग उग्रवादी समूहों ने नागा और कुकी-जो समुदाय के करीब 50 लोगों को बंधक बना लिया था। उसी हिंसा में तीन चर्च नेताओं की हत्या हुई और चार अन्य घायल हुए थे। प्रशासन और सामुदायिक नेताओं के प्रयासों से 14 और 15 मई को लगभग 30 लोगों को रिहा कराया गया, और 10 जून को शेष 14 कुकी ग्रामीणों को यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) और नागा पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (NPO) ने सेनापति जिले के एक पुलिस थाने में पुलिस के हवाले किया।

सामुदायिक प्रतिक्रिया और माफी विवाद

इस हत्याकांड के बाद पूरे मणिपुर में व्यापक विरोध प्रदर्शन, आर्थिक नाकेबंदी और नागा-कुकी-जो समुदायों के बीच तनाव फिर से भड़क उठा था। कुकी-जो काउंसिल (KZC) के अध्यक्ष हेनलियानथांग थांगलेट ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए स्वीकार किया कि कुकी-जो समुदाय के कुछ लोगों ने 'भावनाओं में आकर' छह नागा नागरिकों की हत्या कर 'गंभीर गलती' की। उन्होंने राज्य में जारी जातीय हिंसा से जुड़े सभी मामलों की निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की मांग भी की।

हालांकि, ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन, मणिपुर (ANSAM) समेत कई नागा संगठनों ने इस माफी को 'ईमानदार नहीं' बताते हुए खारिज कर दिया और सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी व कड़ी सजा की मांग की।

NIA जांच और सरकार का रुख

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह पहले ही घोषणा कर चुके थे कि छह नागा ग्रामीणों के अपहरण व हत्या तथा 13 मई को तीन चर्च नेताओं की हत्या से जुड़े मामलों की जांच NIA को सौंप दी गई है। पुलिस का मानना है कि इस दंपति की गिरफ्तारी से मामले की जांच में महत्वपूर्ण सफलता मिलने की उम्मीद है और मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में चल रहे नागा-कुकी तनाव की परतें खुल सकती हैं।

आगे की राह

मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में जातीय हिंसा की जांच और जवाबदेही को लेकर दबाव लगातार बढ़ रहा है। गौरतलब है कि यह राज्य में मई 2023 से जारी नागा-कुकी-मैतेई तनाव की श्रृंखला की एक और कड़ी है, जिसमें सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा में जवाबदेही की रफ्तार न्याय की माँग के अनुरूप है या नहीं। KZC की माफी और नागा संगठनों की उसे खारिज करने की प्रतिक्रिया दर्शाती है कि सामुदायिक विश्वास की खाई अभी गहरी है। NIA जांच का दायरा और उसके नतीजे ही तय करेंगे कि यह गिरफ्तारी महज प्रतीकात्मक है या वास्तविक न्याय की शुरुआत।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर में छह नागा नागरिकों की हत्या का मामला क्या है?
पुलिस के अनुसार, कांगपोकपी जिले में छह नागा नागरिकों का 13 मई को कथित तौर पर अपहरण किया गया था और 11 जून को उनके शव खाराम वैफेई गांव के निकट जंगल से बरामद हुए। यह मामला मणिपुर की नागा-कुकी जातीय हिंसा का सबसे संवेदनशील प्रकरण बन गया है।
इस मामले में किसे और कहाँ से गिरफ्तार किया गया?
NIA, CRPF और मणिपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने 10 जुलाई को कांगपोकपी जिले के लेइलोन वैफेई गांव से दंपति प्रदीप और उनकी पत्नी अयिंगबी को गिरफ्तार किया। दोनों उसी गांव के निवासी हैं।
कुकी-जो काउंसिल ने माफी क्यों मांगी और नागा संगठनों ने उसे क्यों खारिज किया?
KZC अध्यक्ष हेनलियानथांग थांगलेट ने स्वीकार किया कि कुकी-जो समुदाय के कुछ लोगों ने 'भावनाओं में आकर' छह नागा नागरिकों की हत्या कर 'गंभीर गलती' की। हालांकि, ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन, मणिपुर समेत कई नागा संगठनों ने इस माफी को 'ईमानदार नहीं' बताते हुए खारिज कर दिया और तत्काल गिरफ्तारी व कड़ी सजा की मांग की।
इस मामले की जांच NIA को क्यों सौंपी गई?
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने घोषणा की थी कि छह नागा ग्रामीणों की हत्या और 13 मई को तीन चर्च नेताओं की हत्या की गंभीरता को देखते हुए इन मामलों की जांच NIA को सौंपी गई है। इसका उद्देश्य जातीय हिंसा की निष्पक्ष और व्यापक जांच सुनिश्चित करना है।
13 मई की हिंसा के बाद बंधकों का क्या हुआ?
13 मई की हिंसा के बाद कांगपोकपी और सेनापति जिलों में करीब 50 लोगों को बंधक बनाया गया था। 14 और 15 मई को लगभग 30 लोगों को रिहा कराया गया, और 10 जून को शेष 14 कुकी ग्रामीणों को UNC और NPO ने पुलिस के हवाले किया। अगले दिन 11 जून को छह नागा बंधकों के शव जंगल से मिले।
राष्ट्र प्रेस
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