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मणिपुर में UNC का 24 घंटे बंद: छह नागा की हत्या के बाद नागा-बहुल इलाकों में जनजीवन ठप

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मणिपुर में UNC का 24 घंटे बंद: छह नागा की हत्या के बाद नागा-बहुल इलाकों में जनजीवन ठप

सारांश

छह नागा नागरिकों की हत्या के बाद UNC का 24 घंटे का बंद मणिपुर के नागा-बहुल इलाकों में पूरी तरह असरदार रहा। NIA जाँच के आदेश दिए जा चुके हैं, लेकिन UNC ने चार सूत्रीय माँगें पूरी होने तक शव स्वीकार करने से इनकार कर दिया है — संकट अभी टला नहीं है।

मुख्य बातें

UNC ने 11 जून 2025 को 24 घंटे का पूर्ण बंद बुलाया, जिससे मणिपुर के नागा-बहुल इलाकों में जनजीवन ठप रहा।
13 मई को अगवा किए गए छह नागा नागरिकों के क्षत-विक्षत शव कांगपोकपी जिले के जंगली इलाके से बरामद हुए।
UNC ने शव स्वीकार करने से इनकार किया — माँगों में कुकी उग्रवादियों के साथ SoO समझौता रद्द करना और कुकी नेशनल फ्रंट के कथित दोषियों की गिरफ्तारी शामिल।
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने मामला NIA को सौंपा; 12 से अधिक संगठनों और तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हत्याओं की निंदा की।
10 जून को UNC व NPO ने कुकी समुदाय के 14 बंधकों को सेनापति पुलिस स्टेशन को सौंपा।
उखरुल जिले में सुरक्षाबलों के अभियान में आठ हथियारबंद सदस्य हिरासत में , बंकरों से हथियार व गोला-बारूद बरामद।

यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) ने 11 जून 2025 को मणिपुर के नागा-बहुल क्षेत्रों में 24 घंटे का पूर्ण बंद लागू किया, जो 13 मई को अगवा किए गए छह नागा नागरिकों की हत्या के विरोध में बुलाया गया था। सुबह 6 बजे से शुरू हुए इस शटडाउन ने दुकानें, शिक्षण संस्थान, सरकारी व निजी कार्यालय और परिवहन सेवाएँ पूरी तरह बंद करा दीं।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कांगपोकपी जिले के सैतू-गाम्फाजोल सब-डिविजन में खराम वैफेई गांव के निकट एक जंगली इलाके से बुधवार को छह नागा नागरिकों के क्षत-विक्षत शव बरामद किए गए। यह गांव मुख्यतः कुकी-जो आदिवासी समुदाय का क्षेत्र है। इन छह नागरिकों को 13 मई को लेइलोन वैफेई गांव से — दो पादरियों सहित कुल 18 नागा नागरिकों के साथ — अलग-अलग आदिवासी समुदायों के हथियारबंद समूहों द्वारा अगवा किया गया था।

गौरतलब है कि उसी दिन, मंगलवार 10 जून को, UNC और नागा पीपल्स ऑर्गनाइजेशन (NPO) ने कुकी समुदाय के 14 ग्रामीणों को सेनापति जिले के एक पुलिस स्टेशन को सौंपा — यह रिहाई लगभग चार सप्ताह की कैद के बाद हुई।

UNC की चार सूत्रीय माँगें

UNC ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी माँगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, वे छह नागा नागरिकों के शव स्वीकार नहीं करेंगे। प्रमुख माँगों में शामिल हैं: सभी कुकी उग्रवादी समूहों के साथ 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स' समझौते को रद्द करना, तथा कुकी नेशनल फ्रंट के उन सदस्यों की तत्काल गिरफ्तारी और मुकदमा जो कथित तौर पर 13 मई की हत्याओं में शामिल थे। इसके साथ ही संस्था ने मणिपुर सरकार और केंद्र सरकार दोनों से न्याय सुनिश्चित करने की माँग की।

सरकार और नेताओं की प्रतिक्रिया

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह, नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो, मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा, मणिपुर की उपमुख्यमंत्री नेमचा किपजेन (जो थाडोऊ जनजाति से हैं, जो व्यापक कुकी-ज़ो समुदाय का हिस्सा है) तथा 12 से अधिक संगठनों ने इन हत्याओं की कड़ी निंदा की है। मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने पहले ही घोषणा की थी कि छह नागा ग्रामीणों के अपहरण और 13 मई को कांगपोकपी जिले में तीन चर्च नेताओं की हत्या से जुड़े मामलों की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई है।

सुरक्षाबलों का अभियान

बंद के दिन ही मणिपुर पुलिस को खुफिया जानकारी मिली कि हथियारबंद सदस्य पहाड़ी जिलों के अलग-थलग गांवों पर हमले की योजना बना रहे हैं। इस आधार पर सुरक्षाबलों ने उखरुल जिले के होरेई काफुंग हिल्स (लोअर लीशान रिज) क्षेत्र में संयुक्त अभियान चलाया। पुलिस के अनुसार, पहाड़ी की चोटी पर लगभग एक दर्जन हथियारबंद सदस्य देखे गए — कुछ भाग गए, जबकि आठ को हिरासत में लिया गया, उनके हथियार जब्त किए गए और कड़ी चेतावनी के साथ छोड़ दिया गया। अनधिकृत बंकरों से बड़ी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और युद्ध सामग्री बरामद की गई।

व्यापक संदर्भ और आगे की स्थिति

यह ऐसे समय में आया है जब 13 मई की हिंसा के बाद कांगपोकपी और सेनापति जिलों में विभिन्न हथियारबंद समूहों ने कुकी और नागा समुदायों के कम से कम 50 लोगों को बंधक बनाया था। उन घटनाओं में तीन चर्च नेताओं की मौत हो गई थी और चार घायल हुए थे। 14 और 15 मई को दोनों समुदायों के लगभग 30 लोगों को रिहा किया गया था। मणिपुर पुलिस ने कहा है कि सुरक्षाबल पूरे क्षेत्र में संवेदनशील गांवों की सुरक्षा के लिए अभियान जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। NIA जाँच और UNC की माँगों पर सरकार की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में इस संकट की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तीन चर्च नेताओं की हत्या और अब छह नागा नागरिकों के शव — यह सब बताता है कि SoO समझौते के तहत सक्रिय हथियारबंद समूहों पर नियंत्रण नाममात्र का है। NIA जाँच का आदेश एक सकारात्मक कदम है, लेकिन UNC की माँग — SoO रद्द करना — केंद्र सरकार के लिए राजनीतिक रूप से जटिल है क्योंकि यह समझौता दशकों पुराने शांति ढाँचे का हिस्सा है। असली सवाल यह है कि क्या NIA जाँच और राजनीतिक निंदाएँ जमीन पर न्याय दिला पाएँगी, या यह भी पिछले संकटों की तरह बयानों तक सीमित रह जाएगा।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर में UNC का बंद क्यों बुलाया गया?
यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) ने 13 मई को अगवा किए गए छह नागा नागरिकों की हत्या के विरोध में 11 जून 2025 को 24 घंटे का पूर्ण बंद बुलाया। उनके क्षत-विक्षत शव बुधवार को कांगपोकपी जिले के जंगली इलाके से बरामद हुए थे।
UNC की प्रमुख माँगें क्या हैं?
UNC की चार सूत्रीय माँगों में कुकी उग्रवादी समूहों के साथ 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स' समझौता रद्द करना और कुकी नेशनल फ्रंट के कथित दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी व मुकदमा शामिल है। UNC ने कहा है कि माँगें पूरी होने तक वे छह नागा नागरिकों के शव स्वीकार नहीं करेंगे।
मणिपुर सरकार ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने छह नागा ग्रामीणों के अपहरण और 13 मई को तीन चर्च नेताओं की हत्या से जुड़े मामलों की जाँच NIA को सौंप दी है। तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों और 12 से अधिक संगठनों ने हत्याओं की कड़ी निंदा की है।
13 मई की घटनाओं में कितने लोग प्रभावित हुए थे?
13 मई को हुई हिंसा में कांगपोकपी और सेनापति जिलों में कुकी और नागा समुदायों के कम से कम 50 लोगों को बंधक बनाया गया था। तीन चर्च नेताओं की मौत हो गई, चार घायल हुए, और 14-15 मई को दोनों समुदायों के लगभग 30 लोगों को रिहा किया गया।
उखरुल जिले में सुरक्षाबलों के अभियान में क्या हुआ?
मणिपुर पुलिस को खुफिया जानकारी मिली कि हथियारबंद सदस्य पहाड़ी गांवों पर हमले की योजना बना रहे हैं। उखरुल जिले के होरेई काफुंग हिल्स में चलाए गए अभियान में आठ हथियारबंद सदस्यों को हिरासत में लिया गया और अनधिकृत बंकरों से बड़ी मात्रा में हथियार व गोला-बारूद बरामद किए गए।
राष्ट्र प्रेस
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