23 जुलाई 2026
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मणिपुर: 26 दिन के तलाशी अभियान के बाद भी 20 नागा-कुकी बंधक लापता, NIA जांच जारी

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मणिपुर: 26 दिन के तलाशी अभियान के बाद भी 20 नागा-कुकी बंधक लापता, NIA जांच जारी

सारांश

मणिपुर में 13 मई की हिंसा के बाद 50 लोग बंधक बनाए गए थे — 30 को रिहा कराया जा चुका है, लेकिन 20 अब भी लापता हैं। 26 दिन का संयुक्त तलाशी अभियान, NIA जांच और दो उग्रवादियों की गिरफ्तारी के बावजूद नागा-कुकी परिवारों की प्रतीक्षा खत्म नहीं हुई।

मुख्य बातें

13 मई 2026 को कांगपोकपी जिले में हिंसा के बाद कम से कम 50 लोगों को कथित तौर पर बंधक बनाया गया था।
14-15 मई को लगभग 30 लोगों को रिहा कराया गया; अब भी 6 नागा और 14 कुकी समुदाय के सदस्य लापता हैं।
सुरक्षा बलों ने NH-2 के निकट लिटान, महादेव और सिनाकेथेल गांवों में अभियान चलाकर अवैध बंकर नष्ट किए।
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने अपहरण और तीन चर्च नेताओं की हत्या का मामला NIA को सौंपा।
थौबल जिले से PLA/RPF के दो उग्रवादी गिरफ्तार; तेंगनुपाल से 4 IED सहित भारी हथियार बरामद।

मणिपुर के पहाड़ी जिलों में केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बलों का गहन संयुक्त तलाशी अभियान लगातार 26 दिनों से चल रहा है, फिर भी सशस्त्र समूहों द्वारा कथित तौर पर अपहृत नागा और कुकी समुदायों के 20 सदस्य अब तक नहीं मिले हैं। 13 मई 2026 को कांगपोकपी जिले में भड़की हिंसा के बाद से यह संकट गहराता जा रहा है और दोनों समुदायों के संगठन लगातार आंदोलन कर बंधकों की सुरक्षित रिहाई की मांग कर रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, 13 मई को हुई हिंसक घटनाओं के बाद कुकी-जो बहुल कांगपोकपी जिले और नागा बहुल सेनापति जिले में विभिन्न सशस्त्र समूहों ने कम से कम 50 लोगों को कथित तौर पर बंधक बना लिया था। अधिकारियों, सामुदायिक नेताओं और नागरिक समाज संगठनों के प्रयासों से 14 और 15 मई को दोनों समुदायों के लगभग 30 लोगों को रिहा करा लिया गया। अब भी 6 नागा और 14 कुकी समुदाय के सदस्य लापता बताए जा रहे हैं।

तलाशी अभियान का विस्तार

सुरक्षा बलों ने इंफाल-दिमापुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-2) पर स्थित लिटान, महादेव और सिनाकेथेल गांवों के आसपास अचानक संयुक्त तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान दोनों समुदायों के गांवों में संयुक्त गश्त की गई और कई अवैध बंकरों का पता लगाकर उन्हें नष्ट किया गया। अधिकारियों ने बताया कि कांगपोकपी, सेनापति और आसपास के जिलों में शेष बंधकों की तलाश के लिए अभियान जारी रहेगा।

ग्राम अधिकारियों और नागरिक समाज संगठनों से भी सहयोग माँगा गया है। उनसे अनुरोध किया गया है कि वे स्थानीय युवाओं को जागरूक करें और यह सुनिश्चित करें कि वे हिंसक घटनाओं में शामिल न हों।

NIA जांच और सरकार की प्रतिक्रिया

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने पहले बताया था कि 13 मई को कांगपोकपी जिले में छह नागा ग्रामीणों के अपहरण और तीन चर्च नेताओं की हत्या से जुड़े मामलों को विस्तृत जांच के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दिया गया है। यह कदम इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार इस संकट को गंभीरता से ले रही है।

उग्रवादी गिरफ्तारियाँ और हथियार बरामदगी

एक अलग अभियान में सुरक्षा बलों ने थौबल जिले के वैथौ संगोमसांग इलाके से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) और उसके राजनीतिक विंग रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट (RPF) के दो कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार उग्रवादियों की पहचान सनसम सनमतुम मेइतेई उर्फ टॉमपोक उर्फ ओनेमन (32 वर्ष) और येंगकोकपाम प्रेमचंद सिंह उर्फ चिंगसांगलाकपा (26 वर्ष) के रूप में हुई है।

इसके अतिरिक्त, तेंगनुपाल जिले के भारत-म्यांमार सीमावर्ती क्षेत्रों से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई। इनमें एक देसी बंदूक, एक 9 मिमी पिस्तौल (मैगजीन सहित), एक .22 अमेरिकी पिस्तौल (मैगजीन सहित), चार रेडियो सेट और चार इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) शामिल हैं।

आम जनता पर असर और आगे की राह

गौरतलब है कि मणिपुर में जातीय तनाव 2023 से लगातार बना हुआ है और यह ताज़ा संकट उसी की एक और कड़ी है। नागा और कुकी दोनों समुदायों के संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और अपहृत परिजनों की सुरक्षित वापसी की माँग कर रहे हैं। सुरक्षा बलों की निरंतर मौजूदगी और NIA जांच से उम्मीद है कि शेष बंधकों की जल्द रिहाई संभव होगी, लेकिन क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए राजनीतिक समाधान अभी भी अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी याद रखना होगा कि जांच एजेंसियाँ बंधकों को वापस नहीं लातीं — वार्ता और राजनीतिक हस्तक्षेप लाते हैं। मुख्यधारा की कवरेज हथियार बरामदगी और गिरफ्तारियों पर केंद्रित रहती है, जबकि असली सवाल यह है कि तीन साल बाद भी राज्य में समुदायों के बीच विश्वास-निर्माण की कोई ठोस प्रक्रिया क्यों नहीं दिखती।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर में कितने नागा और कुकी समुदाय के लोग अभी भी लापता हैं?
अधिकारियों के अनुसार अब भी 6 नागा और 14 कुकी समुदाय के सदस्य — कुल 20 लोग — लापता हैं। 13 मई 2026 की हिंसा के बाद कम से कम 50 लोगों को बंधक बनाया गया था, जिनमें से 30 को 14-15 मई को रिहा कराया जा चुका है।
मणिपुर में यह संकट कब और कैसे शुरू हुआ?
यह संकट 13 मई 2026 को कांगपोकपी जिले में हुई हिंसक घटनाओं के बाद शुरू हुआ, जब सशस्त्र समूहों ने नागा और कुकी दोनों समुदायों के लोगों को कथित तौर पर बंधक बना लिया। इसी दिन तीन चर्च नेताओं की भी हत्या कर दी गई थी।
NIA को मणिपुर के मामले क्यों सौंपे गए?
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के अनुसार, 13 मई को हुए छह नागा ग्रामीणों के अपहरण और तीन चर्च नेताओं की हत्या की गहन जांच के लिए मामले राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपे गए। इन मामलों की जटिलता और संगठित सशस्त्र समूहों की संलिप्तता को देखते हुए यह निर्णय लिया गया।
तलाशी अभियान में अब तक क्या हासिल हुआ?
सुरक्षा बलों ने NH-2 के निकट गांवों में अवैध बंकर नष्ट किए, थौबल जिले से PLA/RPF के दो उग्रवादियों को गिरफ्तार किया और तेंगनुपाल जिले के भारत-म्यांमार सीमावर्ती क्षेत्र से 4 IED सहित भारी हथियार बरामद किए। हालांकि 20 बंधकों का अब तक पता नहीं चल सका है।
मणिपुर में नागा और कुकी समुदाय के संगठन क्या माँग कर रहे हैं?
दोनों समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले विभिन्न संगठन लगातार आंदोलन कर रहे हैं और अपहृत लोगों की सुरक्षित तत्काल रिहाई की माँग कर रहे हैं। वे सुरक्षा बलों की निरंतर मौजूदगी और जवाबदेही भी सुनिश्चित करने की अपील कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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