मणिपुर बंधक संकट: 38 में से 30 रिहा, शेष के लिए कोशिशें जारी; कूकी इन्पी का बंद 48 घंटे बढ़ा
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के कांगपोकपी और सेनापति जिलों में संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा बंधक बनाए गए 38 से अधिक कुकी और नागा समुदाय के लोगों में से 30 को गुरुवार और शुक्रवार को सुरक्षित रिहा कराया जा चुका है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शेष बंधकों की सुरक्षित वापसी के लिए नागरिक समाज संगठनों (सीएसओ), राज्य सरकार के अधिकारियों और सुरक्षा बलों के बीच लगातार बातचीत जारी है।
बंधक संकट की पृष्ठभूमि
यह संकट 13 मई की सुबह उस समय गहरा गया जब कांगपोकपी जिले में संदिग्ध उग्रवादियों ने तीन बैपटिस्ट चर्च नेताओं की हत्या कर दी और चार अन्य लोगों को घायल कर दिया। इस हिंसा के बाद महिलाओं समेत दर्जनों लोगों को अज्ञात स्थानों पर ले जाया गया।
उसी शाम नोने जिले में एक नागरिक को गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि उसकी पत्नी घायल हो गई। इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। गौरतलब है कि मणिपुर मई 2023 से जातीय हिंसा की चपेट में है और यह ताज़ा घटनाक्रम उस दीर्घकालिक अस्थिरता की एक और कड़ी है।
रिहाई के प्रयास और मौजूदा स्थिति
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि 30 बंधकों की रिहाई प्रशासन और सामुदायिक नेताओं के समन्वित प्रयासों से संभव हो सकी। अभी भी बंधक बने शेष लोगों की 'सुरक्षित रिहाई' के लिए हरसंभव प्रयास जारी हैं। अधिकारियों ने स्थिति को संवेदनशील बताते हुए विस्तृत जानकारी साझा करने से परहेज किया।
कुकी संगठनों का विरोध प्रदर्शन
कूकी इन्पी मणिपुर (केआईएम) सहित कई आदिवासी संगठनों ने शनिवार, 16 मई को मणिपुर के पहाड़ी जिलों के कुकी-जो बहुल इलाकों में व्यापक प्रदर्शन आयोजित किए। कांगपोकपी जिले में जनजातीय एकता समिति (सीओटीयू) के नेतृत्व में धरना हुआ, जबकि चुराचांदपुर जिले में प्रभावित परिवारों के समर्थन में एक विशाल रैली निकाली गई।
केआईएम के सूचना एवं प्रचार सचिव जंघाओलन हाओकिप ने कहा कि प्रदर्शन की मुख्य मांगों में सभी शेष बंधकों की तत्काल, सुरक्षित और बिना शर्त रिहाई शामिल है। साथ ही सरकार को पहले सौंपे गए मांगपत्र को जल्द लागू करने की माँग भी की गई, जिसमें कुकी-जो समुदाय के खिलाफ कथित उत्पीड़न, लक्षित हिंसा और तीन चर्च नेताओं की हत्या के मामले में न्याय जैसे मुद्दे शामिल हैं।
परिवारों की पीड़ा और चेतावनी
हाओकिप ने कहा, 'बंधकों के परिवारों को असहनीय पीड़ा झेलनी पड़ रही है। माता-पिता, पति-पत्नी, बच्चे और अन्य परिजन लगातार भय, अनिश्चितता और मानसिक तनाव में जी रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपने प्रियजनों की सुरक्षा को लेकर कोई भरोसा नहीं है।'
संगठन ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने निर्णायक हस्तक्षेप नहीं किया तो कानून-व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ सकती है।
बंद 48 घंटे और बढ़ाया
हाओकिप ने घोषणा की कि कूकी इन्पी मणिपुर द्वारा बुलाए गए 48 घंटे के पूर्ण बंद को 15 मई की मध्यरात्रि से अगले 48 घंटे के लिए बढ़ा दिया गया है। बंद के दौरान पहाड़ी जिलों में सामान्य जनजीवन प्रभावित रहने की आशंका है। शेष बंधकों की रिहाई और क्षेत्र में शांति बहाली पर अब सभी पक्षों की निगाहें टिकी हैं।