मणिपुर के उखरूल में नागा-कुकी गोलीबारी: तीन की मौत, कई घायल — गांवों में आगजनी
सारांश
Key Takeaways
- 24 अप्रैल 2025 को मणिपुर के उखरूल जिले में गोलीबारी की अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए।
- मृतकों में एल. सिटलहोउ, पी. हाओलाई (कुकी स्वयंसेवक) और नागा विलेज गार्ड हॉर्शोक्मी जमांग (29 वर्ष) शामिल हैं।
- मुल्लम गांव में भारी गोलीबारी के दौरान कई घरों में आग लगाई गई; महिलाएं और बच्चे भी घायल हुए।
- कुकी वुमन ऑर्गनाइजेशन ने तांगखुल नागा समूह पर पूर्व नियोजित हमले का आरोप लगाया, जबकि नागा विलेज गार्ड ने कुकी उग्रवादियों पर पहले गोलीबारी का आरोप लगाया।
- यूनाइटेड नागा काउंसिल का बंद 19 अप्रैल से नागा बहुल इलाकों में जारी है।
- फरवरी 2025 से उखरूल में लगातार हिंसा हो रही है — यह क्षेत्र अब मणिपुर संकट का नया केंद्र बन गया है।
इंफाल, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मणिपुर के उखरूल जिले में शुक्रवार, 24 अप्रैल को नागा और कुकी सशस्त्र समूहों के बीच हुई अलग-अलग गोलीबारी की घटनाओं में कम से कम तीन लोगों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए। मुल्लम और सिनाकैथी गांवों में भड़की इस हिंसा ने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
मुल्लम गांव में क्या हुआ?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मुल्लम गांव के निकट हुई गोलीबारी में सुरक्षा बलों ने दो शव बरामद किए। मृतकों की पहचान एल. सिटलहोउ और पी. हाओलाई के रूप में हुई है, जो छद्म (कैमोफ्लाज) वर्दी में थे और उनके शरीर पर गोली लगने के निशान पाए गए।
सुबह के वक्त मुल्लम गांव में दोनों सशस्त्र समूहों के बीच भारी गोलीबारी हुई। इस हिंसा के दौरान पहाड़ी गांव के कई घरों में आग भी लगा दी गई, जिससे ग्रामीणों में भय व्याप्त हो गया।
कुकी संगठन का आरोप — सोते हुए लोगों पर हमला
कुकी वुमन ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ने उखरूल जिले के मुल्लम और शोंगफल गांवों में कुकी बस्तियों पर तांगखुल नागा समूह द्वारा किए गए हमले की कड़ी निंदा की है। संगठन का आरोप है कि यह हमला पूर्व नियोजित था और इसमें सोए हुए निहत्थे लोगों को निशाना बनाया गया।
संगठन के अनुसार, हमलावरों ने दो घरों में आग लगाई, महिलाओं और बच्चों समेत कई लोग घायल हुए और गांव की सुरक्षा में तैनात दो कुकी स्वयंसेवकों की हत्या कर दी गई। संगठन ने कहा कि ग्रामीणों ने अपने लाइसेंस प्राप्त हथियारों से आत्मरक्षा में जवाब दिया और एक हमलावर को मार गिराया।
संगठन ने स्पष्ट शब्दों में कहा, ''यह कोई अकेली घटना नहीं है — यह तांगखुल समूहों द्वारा कुकी-जो समुदायों के खिलाफ जारी हमलों की एक चिंताजनक कड़ी है।''
नागा पक्ष का बयान — सिनाकैथी में गार्ड की हत्या
तांगखुल नागा लॉन्ग ने बताया कि सिनाकैथी गांव में कुकी उग्रवादियों ने नागा विलेज गार्ड हॉर्शोक्मी जमांग (29 वर्ष) की हत्या कर दी और उनका शव बरामद कर लिया गया है।
नागा विलेज गार्ड ने मुल्लम पर हमले के आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि उसके जवान सिनाकैथी और सिराराखोंग के बीच गश्त पर थे। यह गश्त सिनाकैथी गांव पर बार-बार हो रहे हमलों और 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन' समझौते के तहत काम कर रहे कुकी सशस्त्र समूहों की संदिग्ध गतिविधियों की सूचना के बाद की जा रही थी।
गश्त के दौरान कुकी उग्रवादियों ने कथित तौर पर भारी गोलीबारी की, जिसमें हॉर्शोक्मी जमांग की मौके पर मौत हो गई और चार अन्य स्वयंसेवक गंभीर रूप से घायल हो गए। नागा विलेज गार्ड ने कहा कि उसके जवानों ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की।
उखरूल में फरवरी से जारी है हिंसा का सिलसिला
फरवरी 2025 से उखरूल जिले में लगातार हिंसक घटनाएं हो रही हैं, जिसने इसे राज्य के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल कर दिया है। उल्लेखनीय है कि उखरूल जिले की सीमा एक ओर नागालैंड और दूसरी ओर म्यांमार से लगती है — यह भौगोलिक स्थिति इस क्षेत्र को रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बनाती है। यह क्षेत्र मुख्यतः तांगखुल नागा समुदाय की आबादी वाला है।
यूनाइटेड नागा काउंसिल ने 19 अप्रैल की आधी रात से राज्य के सभी नागा बहुल इलाकों में बंद का आह्वान किया हुआ है। यह बंद 18 अप्रैल को उखरूल जिले में दो नागा नागरिकों की कथित हत्या के विरोध में बुलाया गया था — जिनमें एक सेवानिवृत्त भारतीय सेना जवान भी शामिल था।
ग्लोबल नागा फोरम ने भी राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर दो तांगखुल नागा नागरिकों की हत्या की निंदा करते हुए कुकी उग्रवादियों को जिम्मेदार ठहराया है।
व्यापक संदर्भ: मणिपुर संकट का नया आयाम
गौरतलब है कि मई 2023 से मणिपुर में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा जारी है, जिसमें अब तक 200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और हजारों विस्थापित हुए हैं। अब उखरूल में नागा-कुकी संघर्ष का उभरना इस संकट का एक नया और चिंताजनक आयाम है।
विश्लेषकों का मानना है कि 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन' समझौते के बावजूद सशस्त्र समूहों की सक्रियता यह दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर शांति प्रक्रिया कितनी कमजोर है। केंद्र और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और सुरक्षा बलों की तैनाती पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।