सीजफायर की कोशिश: ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने पाक आर्मी चीफ असीम मुनीर से की अहम बैठक

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सीजफायर की कोशिश: ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने पाक आर्मी चीफ असीम मुनीर से की अहम बैठक

सारांश

ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने इस्लामाबाद में पाक सेना प्रमुख असीम मुनीर से मुलाकात की। ईरान-अमेरिका सीजफायर के लिए पाकिस्तान मध्यस्थ बना है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था खतरे में है। अराघची अब ओमान और रूस दौरे पर जाएंगे।

Key Takeaways

  • ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 25 अप्रैल को इस्लामाबाद में पाक सेना प्रमुख असीम मुनीर से मुलाकात की।
  • पाकिस्तान ईरान-अमेरिका सीजफायर वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
  • ईरान ने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से इनकार कर दिया है।
  • होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित है और कई देशों में आर्थिक संकट के संकेत हैं।
  • अराघची पाकिस्तान के बाद ओमान और रूस के दौरे पर जाएंगे।
  • 28 फरवरी से शुरू हुए हमलों के बाद से यह कूटनीतिक संकट गहरा हुआ है।

इस्लामाबाद, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ईरान-अमेरिका सीजफायर वार्ता को आगे बढ़ाने की कोशिश में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची अपने एक छोटे प्रतिनिधिमंडल के साथ इस्लामाबाद पहुंचे और शनिवार, 25 अप्रैल को उन्होंने पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर से अहम मुलाकात की। इस बैठक में ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई भी मौजूद रहे। पाकिस्तान इस संकट में खुद को ईरान और अमेरिका के बीच एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में स्थापित कर रहा है।

पाकिस्तान क्यों बना मध्यस्थ?

ईरानी न्यूज एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, अराघची शुक्रवार की देर रात इस्लामाबाद पहुंचे और तब से अब तक वह कम से कम दो बार पाकिस्तानी नेतृत्व से मिल चुके हैं। ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की सीधी बातचीत से साफ इनकार कर दिया है। इसी कारण तेहरान ने अपना पक्ष पाकिस्तान के सामने रखा है, जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी जल्द इस्लामाबाद पहुंचकर अपना पक्ष पाकिस्तानी नेतृत्व के सामने रखेगा।

यह कूटनीतिक प्रारूप दरअसल एक अप्रत्यक्ष वार्ता मॉडल है — जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे से सीधे बात किए बिना पाकिस्तान को संदेशवाहक के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने खुद को इस भूमिका में पेश किया है, जो पाकिस्तान की कूटनीतिक महत्वाकांक्षाओं को भी दर्शाता है।

होर्मुज स्ट्रेट बंद — वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता संकट

जहां एक ओर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, वहीं दूसरी ओर दोनों देश समुद्र में जहाजों को सीज करने का काम भी जारी रखे हुए हैं। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में उसका नाकाबंदी अभियान जारी रहेगा। जवाब में ईरान ने भी कहा है कि जब तक अमेरिकी सेना की नाकाबंदी बनी रहेगी, होर्मुज स्ट्रेट बंद रहेगा।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे व्यस्त तेल पारगमन मार्ग है। इसके बंद रहने से तेल टैंकरों का आवागमन ठप हो गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है। कई देशों में आर्थिक संकट के संकेत उभरने लगे हैं।

अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट अधिक समय तक बंद रहा, तो इसका सीधा और गंभीर असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। यही कारण है कि दुनिया के अनेक देश दोनों पक्षों के बीच जल्द सुलह और स्थायी सीजफायर के पक्षधर हैं।

अराघची का अगला दौरा: ओमान और रूस

पाकिस्तान के बाद अराघची ओमान और रूस के दौरे पर जाएंगे। वहां वह 28 फरवरी से शुरू हुए हमलों के संदर्भ में अपना पक्ष रखेंगे और बताएंगे कि इन हमलों से ईरान को किस हद तक नुकसान हुआ है तथा किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

ओमान पहले भी ईरान-अमेरिका के बीच पर्दे के पीछे की कूटनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। रूस का समर्थन ईरान के लिए रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि मॉस्को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो शक्ति रखता है।

ऐतिहासिक संदर्भ और गहरा विश्लेषण

गौरतलब है कि ईरान-अमेरिका तनाव का यह दौर 28 फरवरी को शुरू हुए हमलों के बाद और गहरा हुआ। इससे पहले भी ओमान ने 2013 और 2023 में ईरान-अमेरिका के बीच गुप्त वार्ता की मेजबानी की थी। इस बार पाकिस्तान का मध्यस्थ के रूप में उभरना एक नई कूटनीतिक धुरी का संकेत है।

विश्लेषकों का मानना है कि असीम मुनीर की यह भूमिका पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रासंगिक बनाए रखने की कोशिश भी है, जबकि देश खुद गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। विरोधाभास यह है कि जो देश आईएमएफ की शर्तों पर निर्भर है, वह अब वैश्विक महाशक्तियों के बीच शांतिदूत बनने की कोशिश कर रहा है।

आने वाले दिनों में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की इस्लामाबाद यात्रा और अराघची के ओमान-रूस दौरे के नतीजे यह तय करेंगे कि क्या कोई ठोस सीजफायर समझौता संभव है या यह संकट और लंबा खिंचेगा।

Point of View

लेकिन इसमें जोखिम भी कम नहीं। जो देश खुद आर्थिक संकट में डूबा है, वह वैश्विक महाशक्तियों के बीच शांतिदूत बनने की कोशिश कर रहा है — यह विरोधाभास ध्यान देने योग्य है। असल सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान सच में दोनों पक्षों का विश्वास जीत सकता है, या यह महज एक कूटनीतिक दिखावा है जो होर्मुज संकट को और लंबा खींचेगा? वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा बताता है कि यह सिर्फ दो देशों का युद्ध नहीं — यह पूरी दुनिया की जेब पर असर डालने वाला संकट है।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर वार्ता में पाकिस्तान की क्या भूमिका है?
पाकिस्तान इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है क्योंकि ईरान ने अमेरिका से सीधी बातचीत से इनकार कर दिया है। दोनों देश अपना-अपना पक्ष पाकिस्तानी नेतृत्व के सामने रख रहे हैं और पाकिस्तान संदेशवाहक का काम कर रहा है।
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने इस्लामाबाद में किससे मुलाकात की?
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 25 अप्रैल को इस्लामाबाद में पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात की। इस बैठक में ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई भी शामिल थे।
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से क्या असर पड़ रहा है?
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल टैंकरों का पारगमन ठप हो गया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो रही है और कई देशों में आर्थिक संकट के संकेत मिल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक यह स्थिति बनी रही तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा।
अराघची पाकिस्तान के बाद कहां जाएंगे?
पाकिस्तान दौरे के बाद ईरानी विदेश मंत्री अराघची ओमान और रूस जाएंगे। वहां वह 28 फरवरी से शुरू हुए हमलों और ईरान को हुए नुकसान के बारे में अपना पक्ष रखेंगे।
क्या ईरान और अमेरिका के बीच सीधी बातचीत हो रही है?
नहीं, ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की सीधी बातचीत से साफ इनकार कर दिया है। इसीलिए दोनों देश पाकिस्तान के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से संवाद कर रहे हैं।
Nation Press