बर्ड फ्लू काबू में: बेंगलुरु के हेसरघट्टा में 10 दिन की निगरानी के बाद एक भी इंसान संक्रमित नहीं

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बर्ड फ्लू काबू में: बेंगलुरु के हेसरघट्टा में 10 दिन की निगरानी के बाद एक भी इंसान संक्रमित नहीं

सारांश

बेंगलुरु के हेसरघट्टा में H5N1 बर्ड फ्लू प्रकोप 10 दिनों की गहन निगरानी के बाद काबू में। 22 गांवों के 28,172 लोगों की जांच में एक भी इंसान संक्रमित नहीं मिला। 90 दिन तक पोल्ट्री गतिविधियां बंद, हर 15 दिन में परिसर का फ्यूमिगेशन होगा।

Key Takeaways

  • 14 अप्रैल 2025 को बेंगलुरु के हेसरघट्टा के मथकुरु गांव में सरकारी पोल्ट्री केंद्र में H5N1 बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई।
  • 10 दिनों की गहन निगरानी के बाद 22 गांवों के 28,172 लोगों में एक भी इंसान संक्रमित नहीं पाया गया।
  • प्रभावित केंद्र के सभी पक्षियों को मारा गया; 21 अप्रैल को 'स्वच्छता प्रमाण पत्र' जारी किया गया।
  • केंद्र में पोल्ट्री गतिविधियां अगले 90 दिनों तक निलंबित; हर 15 दिन में फ्यूमिगेशन होगा।
  • NIV बेंगलुरु में पांचवें दिन के सभी नमूने H5N1 नेगेटिव आए; दसवें दिन के नमूनों की रिपोर्ट प्रतीक्षित।
  • अस्पतालों को पीपीई, ओसेल्टामिविर और थ्रोट स्वैब किट का पर्याप्त भंडार रखने का निर्देश दिया गया।

बेंगलुरु, 25 अप्रैलकर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को राहत भरी खबर देते हुए पुष्टि की कि बेंगलुरु के निकट हेसरघट्टा स्थित एक सरकारी पोल्ट्री प्रशिक्षण केंद्र में फैले बर्ड फ्लू (H5N1 एवियन इन्फ्लूएंजा) के प्रकोप को 10 दिनों की गहन निगरानी और त्वरित कार्रवाई के बाद पूरी तरह काबू में कर लिया गया है। अब तक किसी भी इंसान में संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है।

प्रकोप की शुरुआत और पुष्टि

14 अप्रैल 2025 को हेसरघट्टा के मथकुरु गांव स्थित सरकारी पोल्ट्री प्रशिक्षण केंद्र में पक्षियों की असामान्य मौतें दर्ज की गईं। इसके बाद भोपाल स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीजेज (NIHSAD) की प्रयोगशाला रिपोर्ट में H5N1 एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस की पुष्टि हुई। यह वही वायरस है जो दुनियाभर में पोल्ट्री उद्योग के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जाता है और कभी-कभी इंसानों को भी संक्रमित कर सकता है।

गौरतलब है कि भारत में इससे पहले 2021 में भी कई राज्यों — राजस्थान, मध्यप्रदेश, केरल और हिमाचल प्रदेश — में बर्ड फ्लू के मामले सामने आए थे, जिनसे लाखों पक्षियों को मारना पड़ा था। उस पृष्ठभूमि में कर्नाटक की इस बार की त्वरित प्रतिक्रिया उल्लेखनीय मानी जा रही है।

त्वरित प्रतिक्रिया और नियंत्रण अभियान

प्रकोप की पुष्टि होते ही राज्य और जिला स्तरीय रैपिड रिस्पॉन्स टीमें (RRT) तुरंत सक्रिय हो गईं। इनमें हेसरघट्टा और सोननेहल्ली के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की टीमें भी शामिल थीं।

प्रभावित केंद्र के चारों ओर 0 से 3 किलोमीटर के दायरे को 'संक्रमित क्षेत्र' और 3 से 10 किलोमीटर के दायरे को 'निगरानी क्षेत्र' घोषित किया गया। पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवा विभाग ने केंद्र में मौजूद सभी पक्षियों को मार दिया और निर्धारित बायो-सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत अंडों व दूषित चारे का सुरक्षित निपटान किया।

10 किलोमीटर के निगरानी क्षेत्र में आने वाले 22 गांवों के कुल 28,172 लोगों की 10 दिनों तक लगातार स्वास्थ्य निगरानी की गई — जो इस अभियान की व्यापकता को दर्शाता है।

मानव संक्रमण परीक्षण के नतीजे

निगरानी के पांचवें दिन क्वारंटाइन में रखे गए केंद्र के कर्मचारियों के नेजोफेरिंगियल सैंपल (नाक और गले के नमूने) बेंगलुरु स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) को भेजे गए। परिणाम नेगेटिव आए — यानी किसी में भी H5N1 वायरस नहीं मिला।

दसवें दिन लिए गए अतिरिक्त नमूनों की रिपोर्ट अभी प्रतीक्षित है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि संक्रमित क्षेत्र और निगरानी क्षेत्र — दोनों में अब तक कोई भी इंसान H5N1 से संक्रमित नहीं पाया गया।

स्वास्थ्य विभाग के निर्देश और सावधानियां

कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने बेंगलुरु के सभी स्वास्थ्य केंद्रों को इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारियों (ILI) और गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण (SARI) के मामलों पर सतत निगरानी बनाए रखने का निर्देश दिया है। अस्पतालों को पीपीई किट, तीन-परतीय मेडिकल मास्क, ओसेल्टामिविर जैसी एंटी-वायरल दवाएं, वायरल ट्रांसपोर्ट मीडिया और थ्रोट स्वैब किट का पर्याप्त भंडार रखने को कहा गया है।

21 अप्रैल को पशुपालन विभाग ने प्रभावित क्षेत्र के लिए 'स्वच्छता प्रमाण पत्र' जारी किया। एहतियातन, इस केंद्र में पोल्ट्री गतिविधियां अगले 90 दिनों तक पूरी तरह निलंबित रहेंगी। परिसर को हर 15 दिन में फ्यूमिगेशन और तरल कीटाणुनाशक छिड़काव से कीटाणुमुक्त किया जाएगा।

जनता के लिए सरकारी सलाह

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे बीमार या मृत पोल्ट्री पक्षियों को न छुएं और न ही उनका मांस या अंडे खाएं। ऐसे पक्षी दिखने पर तुरंत स्थानीय पशु चिकित्सा या स्वास्थ्य अधिकारियों को सूचित करें। पोल्ट्री उत्पादों को अच्छी तरह पकाकर खाएं, क्योंकि उचित तापमान पर पकाने से वायरस पूरी तरह नष्ट हो जाता है। अधिकारियों ने अफवाहें न फैलाने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की भी अपील की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार कर्नाटक की त्वरित और व्यवस्थित प्रतिक्रिया ने बड़े संकट को टाल दिया। दसवें दिन के नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी, और यदि वे भी नेगेटिव रहे तो इस प्रकोप को पूरी तरह समाप्त घोषित किया जा सकेगा।

Point of View

यह गति उल्लेखनीय है। लेकिन असली सवाल यह है कि सरकारी पोल्ट्री प्रशिक्षण केंद्र जैसी संवेदनशील जगह पर बायो-सिक्योरिटी इतनी कमजोर क्यों थी कि H5N1 वहां पहुंच गया? 2021 के बर्ड फ्लू प्रकोप के बाद क्या सबक लागू किए गए, यह भी जांचा जाना चाहिए। दसवें दिन के नमूनों की रिपोर्ट आना अभी बाकी है — तब तक राहत की सांस लेना समय से पहले होगा।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

बेंगलुरु में बर्ड फ्लू कहां और कब फैला?
बेंगलुरु के निकट हेसरघट्टा के मथकुरु गांव स्थित सरकारी पोल्ट्री प्रशिक्षण केंद्र में 14 अप्रैल 2025 को H5N1 एवियन इन्फ्लूएंजा की पुष्टि हुई। भोपाल की NIHSAD प्रयोगशाला ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की थी।
क्या बेंगलुरु बर्ड फ्लू से कोई इंसान संक्रमित हुआ?
नहीं, अब तक संक्रमित और निगरानी क्षेत्र में किसी भी इंसान में H5N1 संक्रमण नहीं पाया गया। NIV बेंगलुरु में जांचे गए सभी नमूने नेगेटिव आए हैं, हालांकि दसवें दिन के नमूनों की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है।
बर्ड फ्लू से बचाव के लिए क्या करें?
बीमार या मृत पोल्ट्री पक्षियों को न छुएं और न उनका मांस या अंडे खाएं। पोल्ट्री उत्पादों को अच्छी तरह पकाकर खाएं क्योंकि उचित तापमान पर वायरस नष्ट हो जाता है, और संदिग्ध पक्षी दिखने पर तुरंत स्थानीय अधिकारियों को सूचित करें।
हेसरघट्टा बर्ड फ्लू के बाद क्या कदम उठाए गए?
प्रभावित केंद्र के सभी पक्षी मारे गए, अंडे व दूषित चारा नष्ट किया गया और 21 अप्रैल को स्वच्छता प्रमाण पत्र जारी हुआ। अगले 90 दिन पोल्ट्री गतिविधियां बंद रहेंगी और हर 15 दिन में परिसर का फ्यूमिगेशन होगा।
बर्ड फ्लू निगरानी में कितने लोग शामिल थे?
10 किलोमीटर के निगरानी क्षेत्र में आने वाले 22 गांवों के कुल 28,172 लोगों की 10 दिनों तक लगातार स्वास्थ्य निगरानी की गई। राज्य और जिला स्तरीय रैपिड रिस्पॉन्स टीमें इस अभियान में शामिल थीं।
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