उखरुल में जातीय हिंसा: कुकी-नागा गोलीबारी में 6 घायल, 2 की मौत का दावा

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उखरुल में जातीय हिंसा: कुकी-नागा गोलीबारी में 6 घायल, 2 की मौत का दावा

सारांश

मणिपुर के उखरुल में कुकी-नागा सशस्त्र संघर्ष में 6 घायल, 2 मौत का दावा; 15 घर तबाह। चुराचांदपुर में विस्थापित कुकी-जो समुदाय ने अमित शाह को ज्ञापन सौंपा। मई 2023 से जारी जातीय हिंसा अब नई दिशा में फैलती दिख रही है।

Key Takeaways

  • उखरुल जिले के मुल्लाम और सिनाकेथेई गांवों के बीच 25 अप्रैल 2025 को कुकी-नागा गोलीबारी में 6 लोग घायल हुए।
  • कूकी महिला संगठन ने 2 मौतों और 15 घरों को नुकसान का दावा किया; पुलिस जांच जारी।
  • मुल्लाम गांव प्राधिकरण ने तांगखुल नागा उग्रवादियों पर सुनियोजित हमले का आरोप लगाया।
  • चुराचांदपुर में कुकी-जो आईडीपी ने गृह मंत्री अमित शाह को ज्ञापन सौंपकर राहत में भेदभाव बंद करने की मांग की।
  • मई 2023 से मणिपुर में 200 से अधिक मौतें और 60,000 से ज्यादा विस्थापित; अब नागा-कुकी तनाव नई चिंता।
  • जातीय हिंसा का दायरा बढ़ने से पूर्वोत्तर भारत की क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

मणिपुर के उखरुल जिले में शुक्रवार, 25 अप्रैल 2025 को कुकी और नागा समुदायों के सशस्त्र गुटों के बीच हुई भीषण गोलीबारी में कम से कम छह लोग घायल हो गए। मुल्लाम और सिनाकेथेई गांवों के बीच हुई इस झड़प ने एक बार फिर मणिपुर की सुलगती जातीय हिंसा को सुर्खियों में ला दिया है।

मुख्य घटनाक्रम: कहां और कैसे हुई झड़प

इम्फाल के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह संघर्ष सिनाकेथेई और मुल्लाम गांवों के बीच हुआ, जो एक-दूसरे से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। घायलों में तीन कुकी और तीन नागा समुदाय के लोग शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा कि घटना की विस्तृत जांच जारी है।

मुल्लाम गांव एक अलग-थलग बस्ती है जहां मुख्यतः कुकी समुदाय के लोग निवास करते हैं और यह नागा बहुल गांवों से घिरी हुई है। इस भौगोलिक स्थिति के कारण यह क्षेत्र पहले भी तनाव का केंद्र रहा है।

हमले के आरोप और पलटवार

मुल्लाम गांव प्राधिकरण ने आरोप लगाया कि गांव पर तांगखुल नागा उग्रवादियों ने बड़े पैमाने पर सशस्त्र हमला किया। प्राधिकरण के बयान के अनुसार, हमला पूरी तरह सुनियोजित था।

मानवाधिकारों के लिए कूकी महिला संगठन ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे मुल्लाम और सोंगफेल गांवों पर क्रूर और बिना उकसावे का हमला करार दिया। संगठन ने बताया कि हमलावरों ने पहले हवाई फायरिंग कर दहशत फैलाई और फिर सुनियोजित ढंग से हमला बोला।

संगठन के अनुसार, इस हमले में कम से कम 15 घरों को नुकसान पहुंचा, 6 नागरिक घायल हुए और 2 लोगों की मौत हुई। हालांकि पुलिस ने अभी मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

चुराचांदपुर में विस्थापितों का विरोध प्रदर्शन

इस घटना के बीच चुराचांदपुर जिले में जातीय हिंसा से विस्थापित कुकी-जो समुदाय के आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (आईडीपी) ने तुइबोंग स्थित वॉल ऑफ रिमेंबरेंस पर धरना दिया।

प्रदर्शनकारियों ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर 2029 तक बढ़ाओ, कैंप और गैर-कैंप आईडीपी के साथ समान व्यवहार हो और हमारी पुकार सुनो जैसे नारे लगाए। प्रतिनिधियों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नाम चुराचांदपुर के उपायुक्त के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में मांग की गई कि आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के तहत राहत सभी प्रभावित लोगों तक बिना किसी भेदभाव के पहुंचे।

व्यापक संदर्भ: मणिपुर में जारी जातीय संकट

गौरतलब है कि मई 2023 से मणिपुर में कुकी-जो और मैतेई समुदायों के बीच जातीय हिंसा जारी है, जिसमें अब तक 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 60,000 से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। उखरुल की ताजा घटना इस बात का संकेत है कि हिंसा का दायरा अब नागा-कुकी तनाव तक भी फैल रहा है, जो संकट की एक नई और चिंताजनक परत है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मुल्लाम जैसी अलग-थलग बस्तियां सबसे अधिक संवेदनशील हैं क्योंकि वहां सुरक्षा बलों की त्वरित पहुंच कठिन होती है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब केंद्र और राज्य सरकार शांति वार्ता की कोशिशों का दावा करती रही है।

आने वाले दिनों में सुरक्षा बलों की तैनाती, जांच की दिशा और विस्थापितों की राहत मांगों पर सरकार की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि मणिपुर का यह संकट किस ओर जाता है।

Point of View

लेकिन जमीन पर 60,000 से अधिक विस्थापित लोग अभी भी न्याय और राहत के लिए धरने पर बैठे हैं। विडंबना यह है कि जब विस्थापितों को समान राहत नहीं मिल रही, तो शांति की उम्मीद कैसे पनपेगी। मणिपुर की यह आग जब तक राजनीतिक इच्छाशक्ति से नहीं बुझाई जाती, तब तक हर नई झड़प पूरे पूर्वोत्तर की स्थिरता के लिए खतरा बनती रहेगी।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

मणिपुर के उखरुल में गोलीबारी क्यों हुई?
उखरुल जिले के मुल्लाम और सिनाकेथेई गांवों के बीच कुकी और नागा सशस्त्र गुटों के बीच झड़प हुई। मुल्लाम गांव प्राधिकरण ने तांगखुल नागा उग्रवादियों पर सुनियोजित हमले का आरोप लगाया है।
उखरुल गोलीबारी में कितने लोग घायल हुए और क्या कोई मौत हुई?
पुलिस के अनुसार कम से कम 6 लोग घायल हुए, जिनमें 3 कुकी और 3 नागा समुदाय के हैं। कूकी महिला संगठन ने 2 लोगों की मौत का दावा किया है, हालांकि पुलिस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की।
मणिपुर में जातीय हिंसा कब से चल रही है?
मणिपुर में मई 2023 से कुकी-जो और मैतेई समुदायों के बीच जातीय हिंसा जारी है। इसमें अब तक 200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 60,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं।
चुराचांदपुर में विस्थापितों ने क्या मांग की?
कुकी-जो विस्थापितों ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर 2029 तक बढ़ाने और कैंप व गैर-कैंप आईडीपी के साथ समान व्यवहार की मांग की। यह ज्ञापन गृह मंत्री अमित शाह के नाम सौंपा गया।
मुल्लाम गांव कहां स्थित है और यह क्यों संवेदनशील है?
मुल्लाम उखरुल जिले में एक अलग-थलग कुकी बस्ती है जो नागा बहुल गांवों से घिरी है। इसकी भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा बलों की सीमित पहुंच इसे विशेष रूप से संवेदनशील बनाती है।
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