मणिपुर: कांगपोकपी जंगल में मिले छह अगवा नागा ग्रामीणों के शव, 28 दिन बाद हुई बरामदगी
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के कांगपोकपी जिले में बुधवार, 10 जून 2026 को एक वन क्षेत्र से छह नागा समुदाय के सदस्यों के शव बरामद किए गए, जिन्हें 13 मई को विभिन्न आदिवासी समुदायों से जुड़े सशस्त्र समूहों ने अगवा किया था। पुलिस के अनुसार, शव सैतु-गाम्फाजोल उपमंडल के खारम वैफेई गांव के निकट जंगल में मिले, जो मुख्यतः कुकी-जो आदिवासी बस्ती है।
तलाशी अभियान और बरामदगी
शवों की बरामदगी लगभग 24 घंटे तक चले व्यापक संयुक्त तलाशी अभियान के बाद हुई। इस अभियान में मणिपुर पुलिस, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) और असम राइफल्स के कुल लगभग 450 जवान शामिल थे। अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए खोजी कुत्तों और फोरेंसिक विशेषज्ञों को भी तैनात किया गया था।
मणिपुर पुलिस के आधिकारिक बयान के अनुसार, माना जा रहा है कि ये मृतक वही लोग हैं जिन्हें 13 मई को लेइलोन वाइफेई क्षेत्र (कांगपोकपी जिला) से बंधक बनाया गया था। पुलिस द्वारा आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं और आगे की जांच जारी है।
पोस्टमार्टम और कानूनी प्रक्रिया
सभी छह शवों को पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी औपचारिकताओं के लिए इम्फाल स्थित क्षेत्रीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान (RIMS) भेजा जा रहा है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मृत्यु के कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही होगी।
कुकी बंधकों की रिहाई और नागा बंधकों की मौत
यह दुखद बरामदगी उस घटनाक्रम के कुछ ही घंटों बाद हुई, जब मंगलवार को कुकी समुदाय के 14 बंधकों को लगभग चार सप्ताह की कैद के बाद रिहा किया गया था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) और नागा पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (NPO) ने मंगलवार दोपहर सेनापति जिले के एक पुलिस स्टेशन में इन 14 कुकी ग्रामीणों को सौंप दिया था।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब दोनों समुदायों के बीच बंधकों की अदला-बदली की उम्मीदें बंधी हुई थीं। नागा बंधकों की मौत की खबर ने इस नाजुक स्थिति को और जटिल बना दिया है।
नागालैंड के मुख्यमंत्री की अपील और प्रतिक्रिया
नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने मंगलवार शाम एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर संबंधित समूहों से छह नागा ग्रामीणों की सुरक्षित रिहाई की पारस्परिक और मानवीय दृष्टिकोण से अपील की थी। उन्होंने लिखा कि ऐसे प्रयास समुदायों के बीच 'वास्तविक शांति, सुलह और सद्भाव के लिए विश्वास, समझ और संवाद का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।' रियो ने यह भी आशा जताई थी कि इस घटनाक्रम से मणिपुर में विश्वास बहाल करने और स्थायी शांति का रास्ता खुलेगा — लेकिन शवों की बरामदगी ने उनकी उस अपील को निरर्थक साबित कर दिया।
आगे की स्थिति
मणिपुर में जातीय हिंसा की यह घटना उस दीर्घकालीन संघर्ष की कड़ी है जो मई 2023 से मेइतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जारी है और जिसमें नागा समुदाय भी प्रभावित हुआ है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि किस सशस्त्र समूह ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया। इस घटना के बाद राज्य में तनाव और गहराने की आशंका जताई जा रही है।