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मणिपुर: लापता नागा समुदाय के 6 लोगों के शव बरामद, 28 दिन बाद मिले — परिजनों में आक्रोश

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मणिपुर: लापता नागा समुदाय के 6 लोगों के शव बरामद, 28 दिन बाद मिले — परिजनों में आक्रोश

सारांश

मणिपुर में 13 मई को कथित अपहरण के बाद लापता नागा समुदाय के छह लोगों के शव 28 दिन बाद बरामद हुए हैं। 450 सुरक्षाकर्मियों के संयुक्त अभियान के बाद मिले ये शव JNIMS में हैं। समुदाय ने सरकार की ढिलाई पर तीखा आक्रोश जताया है और निष्पक्ष जाँच की माँग की है।

मुख्य बातें

मणिपुर के लीलोन वैफेई गांव से 13 मई 2026 को कथित अपहरण के बाद लापता नागा समुदाय के 6 लोगों के शव 28 दिन बाद बरामद।
सभी शव इंफाल स्थित जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान (JNIMS) के शवगृह में, पहचान प्रक्रिया जारी।
मणिपुर पुलिस, सीआरपीएफ और असम राइफल्स के करीब 450 कर्मियों ने 24 घंटे के निरंतर अभियान में शव खोजे।
लियांगमाई नागा काउंसिल के अध्यक्ष टिमोथी विजुनामाई ने शवों को लाने में 28 दिन लगने पर सरकार के प्रति गहरी नाराज़गी जताई।
घटना मणिपुर में कुकी-नागा समुदायों के बीच जारी जातीय तनाव की पृष्ठभूमि में हुई; इसी दौरान 3 कुकी चर्च नेताओं की हत्या और 5 घायल हुए थे।

मणिपुर के लीलोन वैफेई गांव से 13 मई 2026 को कथित अपहरण के बाद लापता हुए नागा समुदाय के छह लोगों के शव 28 दिन बाद बरामद कर लिए गए हैं। सभी शवों को इंफाल स्थित जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान (JNIMS) के शवगृह में रखा गया है, जहाँ पहचान की प्रक्रिया जारी है। शवों की बरामदगी से क्षेत्र में गहरे शोक और तीव्र आक्रोश का माहौल है।

तलाशी अभियान और बरामदगी

मणिपुर पुलिस के अनुसार, यह शव मणिपुर पुलिस, सीआरपीएफ और असम राइफल्स के संयुक्त दल के लगभग 450 कर्मियों द्वारा चलाए गए करीब 24 घंटे के निरंतर तलाशी अभियान के बाद मिले। इस अभियान में खोजी कुत्तों और फोरेंसिक विशेषज्ञ टीमों की भी सहायता ली गई। माना जा रहा है कि ये वही लोग हैं जिन्हें 13 मई 2026 को लीलोन वैफेई से कथित तौर पर बंधक बनाया गया था।

समुदाय की प्रतिक्रिया और पहचान की प्रक्रिया

लियांगमाई नागा काउंसिल मणिपुर के अध्यक्ष टिमोथी विजुनामाई ने कहा कि पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि बरामद शव वास्तव में उन्हीं छह लापता व्यक्तियों के हैं। उन्होंने कहा, 'सबसे पहले हमें यह देखना होगा कि शव किस स्थिति में हैं। हमें यह पुष्टि करनी होगी कि ये वास्तव में हमारे वही छह लोग हैं जो लापता हुए थे।'

विजुनामाई ने आगे बताया कि शवों की पहचान और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं के बाद पीड़ित परिवारों के साथ बैठक कर आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'हमें पीड़ितों के परिजनों के साथ बैठकर चर्चा करनी होगी और उसके बाद तय करेंगे कि आगे क्या कदम उठाए जाएं।'

सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराज़गी

विजुनामाई ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा, 'हम कैसे संतुष्ट हो सकते हैं? शवों को यहाँ लाने में 28 दिन लग गए। सरकार ने जिस तरह से कार्रवाई की है, उससे हम बेहद निराश हैं। अब हम यह देखना चाहते हैं कि आगे सरकार क्या कदम उठाती है।' परिजन और समुदाय के लोग मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग पर अडिग हैं।

व्यापक हिंसा का संदर्भ

गौरतलब है कि यह घटना मणिपुर के पहाड़ी जिलों में कुकी और नागा समुदायों के बीच जारी तनाव की पृष्ठभूमि में हुई है। इसी दौरान हुई हिंसा में तीन कुकी चर्च नेताओं की हत्या हो गई थी और पाँच अन्य घायल हुए थे। कथित तौर पर इन्हीं परिस्थितियों में ये छह नागा लोग भी अपहरण का शिकार हुए थे। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में जातीय संघर्ष की आग पिछले कई वर्षों से सुलग रही है और राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास जारी हैं।

आगे की राह

फिलहाल शवों की आधिकारिक पहचान की प्रक्रिया JNIMS में जारी है। समुदाय के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि पहचान पूरी होने के बाद ही अंतिम संस्कार और आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर निर्णय लिया जाएगा। मामले की निष्पक्ष और शीघ्र जाँच की माँग अब तेज़ होती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी सुरक्षा तंत्र की प्रतिक्रिया बार-बार विलंबित रही है। सवाल यह है कि क्या इस मामले में जाँच वास्तव में निष्पक्ष होगी, या यह भी उन अनगिनत मामलों की सूची में जुड़ जाएगा जहाँ जवाबदेही कभी तय नहीं हुई। जब तक राज्य में जातीय पहचान के आधार पर न्याय का दोहरा मापदंड बना रहेगा, तब तक शांति बहाली की कोई भी कोशिश अधूरी रहेगी।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर में नागा समुदाय के 6 लोग कब और कहाँ से लापता हुए थे?
ये छह लोग 13 मई 2026 को मणिपुर के लीलोन वैफेई गांव से कथित तौर पर अपहरण के बाद लापता हुए थे। यह घटना मणिपुर के पहाड़ी जिलों में कुकी और नागा समुदायों के बीच जारी तनाव के दौरान हुई।
शवों की बरामदगी कैसे हुई?
मणिपुर पुलिस, सीआरपीएफ और असम राइफल्स के संयुक्त दल के करीब 450 कर्मियों ने खोजी कुत्तों और फोरेंसिक विशेषज्ञ टीमों की मदद से लगभग 24 घंटे के निरंतर तलाशी अभियान के बाद शव बरामद किए। सभी शव अब इंफाल के JNIMS शवगृह में हैं।
लियांगमाई नागा काउंसिल ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
काउंसिल के अध्यक्ष टिमोथी विजुनामाई ने कहा कि शवों को इंफाल लाने में 28 दिन लगना बेहद निराशाजनक है और सरकार की कार्यप्रणाली से वे बेहद निराश हैं। उन्होंने माँग की है कि पहचान प्रक्रिया पूरी होने के बाद पीड़ित परिवारों के साथ बैठकर आगे की कार्रवाई तय की जाए।
इस घटना का व्यापक संदर्भ क्या है?
यह घटना मणिपुर के पहाड़ी जिलों में कुकी और नागा समुदायों के बीच जारी जातीय तनाव की पृष्ठभूमि में हुई है। इसी दौरान हुई हिंसा में तीन कुकी चर्च नेताओं की हत्या हो गई थी और पाँच अन्य घायल हुए थे।
राष्ट्र प्रेस
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