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मणिपुर: छह नागा नागरिकों के अपहरण मामले में चार संदिग्ध गिरफ्तार, CM खेमचंद ने किया राहत शिविर का दौरा

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मणिपुर: छह नागा नागरिकों के अपहरण मामले में चार संदिग्ध गिरफ्तार, CM खेमचंद ने किया राहत शिविर का दौरा

सारांश

मणिपुर में 13 मई की हिंसा के बाद अपहृत छह नागा नागरिकों के मामले में सुरक्षा बलों ने चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। CM खेमचंद ने कांगपोकपी के राहत शिविर का दौरा कर विस्थापितों से मुलाकात की। अभी भी 20 बंधक हथियारबंद समूहों के कब्जे में हैं।

मुख्य बातें

25 मई को मणिपुर पुलिस, CRPF और असम राइफल्स की संयुक्त टीम ने कांगपोकपी जिले से चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपी: थांगखोमांग खोंगसाई (51) , सेइखोलेट खोंगसाई (40) , लुनमिनथांग डिमंगल (27) और कामगौलाल खोंगसाई (30) ।
13 मई की हिंसा में करीब 50 लोग बंधक बनाए गए थे; 14-15 मई को 30 लोग रिहा हुए, अभी 20 बंधक लापता।
उसी हिंसा में तीन चर्च नेताओं की हत्या और चार घायल हुए थे।
CM ने माखेन बैपटिस्ट चर्च राहत शिविर में 35 विस्थापितों से मुलाकात कर राशन और ज़रूरी सामान वितरित किया।
कांगपोकपी, सेनापति जिलों में संयुक्त तलाशी अभियान जारी।

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने गुरुवार, 28 मई को पुष्टि की कि छह नागा नागरिकों के अपहरण मामले में सुरक्षा बलों ने चार संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया है। कांगपोकपी जिले के माखन नागा गांव का दौरा करते हुए उन्होंने कहा कि अपहृत लोगों को सुरक्षित वापस लाने के लिए बड़े पैमाने पर सर्च और कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी हैं।

गिरफ्तारी का विवरण

25 मई को मणिपुर पुलिस, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) और असम राइफल्स की संयुक्त टीमों ने कांगपोकपी जिले में पी. मोल्डिंग और लेलोन वैफेई गांवों के बीच के इलाके में अभियान चलाकर चार लोगों को दबोचा। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान थांगखोमांग खोंगसाई (51), सेइखोलेट खोंगसाई (40), लुनमिनथांग डिमंगल (27) और कामगौलाल खोंगसाई (30) के रूप में हुई है।

मुख्यमंत्री ने मीडिया से कहा, "13 मई को हुई इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में शामिल अपराधियों को पकड़ने के लिए जांच जारी है। सरकार बंधक बनाए गए लोगों को लेकर जनता की भावनाओं को समझती है और जल्द ही उन्हें खोज निकाला जाएगा।"

मुख्य घटनाक्रम: 13 मई से अब तक

एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, 13 मई को हुई हिंसा के बाद कांगपोकपी और सेनापति जिलों में करीब 50 नागा और कुकी समुदाय के लोगों को अलग-अलग उग्रवादी समूहों ने बंधक बना लिया था। इसी हिंसा में तीन चर्च नेताओं की हत्या कर दी गई थी, जबकि चार अन्य घायल हुए थे।

अधिकारियों, सामुदायिक नेताओं और सामाजिक संगठनों की मध्यस्थता के बाद 14 और 15 मई को करीब 30 लोगों को रिहा करा लिया गया था। हालांकि, अभी भी 20 नागा और कुकी समुदाय के लोग हथियारबंद समूहों की गिरफ्त में हैं, जिन्हें छुड़ाने के लिए अभियान जारी है।

राहत शिविर का दौरा और विस्थापितों से मुलाकात

मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने माखन नागा गांव में माखेन बैपटिस्ट चर्च में स्थापित राहत शिविर का दौरा किया, जहाँ वर्तमान में करीब 35 विस्थापित लोग रह रहे हैं। इनमें कोंसाखुल गांव की नागा महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, जिन्हें हाल ही में हथियारबंद उग्रवादियों ने बंधक बनाया था और बाद में रिहा किया गया।

मुख्यमंत्री ने राहत शिविर में रह रहे लोगों को चावल, दाल, आलू, प्याज, खाद्य तेल, चीनी, चायपत्ती और बिस्कुट जैसी आवश्यक सामग्री वितरित की। उन्होंने कांगपोकपी के डिप्टी कमिश्नर महेश चौधरी को निर्देश दिए कि शिविर में गद्दे, मच्छरदानी और अन्य ज़रूरी सामान तुरंत उपलब्ध कराए जाएं।

विस्थापन का व्यापक संकट

गांव के मुखिया ने मुख्यमंत्री को बताया कि कांगपोकपी जिले में कई नागा परिवार डर के कारण अपने गांव छोड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री ने सामुदायिक भवन का निरीक्षण किया और मुखिया तथा जिला अधिकारियों से अधिक विस्थापित लोगों को ठहराने की संभावनाओं पर चर्चा की।

यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में जातीय संघर्ष के कारण आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (IDP) की संख्या लगातार बढ़ रही है। गौरतलब है कि राज्य में मई 2023 से जातीय हिंसा की घटनाएं रुक-रुककर जारी हैं।

सुरक्षा अभियान और उपस्थित अधिकारी

केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बल गुरुवार को भी कांगपोकपी, सेनापति और आसपास के जिलों में संयुक्त तलाशी अभियान चलाते रहे। मुख्यमंत्री के साथ इस दौरे में उपमुख्यमंत्री लोसी दिखो, विधायक लीशियो किशिंग, अवांगबोउ न्यूमई, हाइकम डिंगो सिंह, जांघेलमंग पनमेई, खाशिम वाशुम, राम मुइवाह, जे. कुमो शा, गृह आयुक्त एन. अशोक कुमार और कांगपोकपी के डिप्टी कमिश्नर महेश चौधरी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

अब सबकी नज़रें उन 20 बंधकों की सुरक्षित रिहाई पर टिकी हैं, जो अभी भी हथियारबंद समूहों के कब्जे में हैं — और इस संकट का शीघ्र समाधान ही मणिपुर में स्थायी शांति की दिशा में पहला ठोस कदम होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 13 मई की हिंसा के दो हफ्ते बाद भी 20 बंधक सुरक्षा बलों की पहुंच से बाहर क्यों हैं। मणिपुर में जातीय संघर्ष मई 2023 से जारी है — यह कोई नई घटना नहीं, बल्कि एक लंबे संकट की ताज़ा कड़ी है जिसमें राज्य और केंद्र दोनों की भूमिका पर सवाल उठते हैं। राहत सामग्री का वितरण और शिविर का दौरा ज़रूरी है, पर स्थायी समाधान के बिना विस्थापन का यह सिलसिला रुकने वाला नहीं। जब तक हथियारबंद समूहों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती और नागा-कुकी समुदायों के बीच राजनीतिक संवाद नहीं शुरू होता, तब तक ऐसी गिरफ्तारियां केवल तात्कालिक राहत हैं, दीर्घकालिक हल नहीं।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर में नागा नागरिकों के अपहरण की घटना कब और कहाँ हुई?
यह घटना 13 मई को कांगपोकपी और सेनापति जिलों में हुई, जब हथियारबंद उग्रवादी समूहों ने करीब 50 नागा और कुकी समुदाय के लोगों को बंधक बना लिया था। इसी हिंसा में तीन चर्च नेताओं की हत्या हुई और चार अन्य घायल हुए।
अब तक कितने बंधकों को रिहा कराया जा चुका है?
14 और 15 मई को अधिकारियों, सामुदायिक नेताओं और सामाजिक संगठनों की कोशिशों से करीब 30 लोगों को रिहा कराया गया। अभी भी 20 बंधक हथियारबंद समूहों के कब्जे में हैं और उनकी तलाश जारी है।
25 मई को गिरफ्तार किए गए चार संदिग्ध कौन हैं?
मणिपुर पुलिस, CRPF और असम राइफल्स की संयुक्त टीम ने कांगपोकपी जिले में पी. मोल्डिंग और लेलोन वैफेई गांवों के बीच से थांगखोमांग खोंगसाई (51), सेइखोलेट खोंगसाई (40), लुनमिनथांग डिमंगल (27) और कामगौलाल खोंगसाई (30) को गिरफ्तार किया।
CM खेमचंद सिंह ने राहत शिविर में क्या किया?
मुख्यमंत्री ने माखेन बैपटिस्ट चर्च में स्थापित राहत शिविर का दौरा कर करीब 35 विस्थापित लोगों से मुलाकात की और उन्हें चावल, दाल, खाद्य तेल समेत आवश्यक सामग्री वितरित की। उन्होंने डिप्टी कमिश्नर को गद्दे और मच्छरदानी तुरंत उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
मणिपुर में जातीय हिंसा का यह संकट कितना व्यापक है?
कांगपोकपी जिले में कई नागा परिवार डर के कारण अपने गांव छोड़ चुके हैं। मणिपुर में मई 2023 से जातीय हिंसा की घटनाएं रुक-रुककर जारी हैं, जिससे बड़े पैमाने पर आंतरिक विस्थापन हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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