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मणिपुर: छह नागा ग्रामीणों के अपहरण की जांच एनआईए को सौंपी जाएगी, CM खेमचंद का ऐलान

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मणिपुर: छह नागा ग्रामीणों के अपहरण की जांच एनआईए को सौंपी जाएगी, CM खेमचंद का ऐलान

सारांश

मणिपुर में नागा-कुकी तनाव के बीच मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने कोंसाखुल से अगवा छह नागा ग्रामीणों की एनआईए जांच का ऐलान किया। 13 मई की हिंसा के बाद 50 से अधिक लोग बंधक बनाए गए थे, जिनमें से 30 को रिहा कराया जा चुका है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 23 मई को घोषणा की कि कोंसाखुल गांव से अगवा छह नागा ग्रामीणों के मामले की जांच एनआईए करेगी।
14 मई से लापता इन ग्रामीणों की तलाश में लगातार खोज और बचाव अभियान जारी है।
13 मई की हिंसा में कांगपोकपी जिले में तीन कुकी-जो चर्च नेताओं की हत्या हुई; उस मामले की जांच भी पहले ही केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जा चुकी है।
दोनों जिलों में कम से कम 50 लोग बंधक बनाए गए थे; 14-15 मई को करीब 30 लोगों को रिहा कराया गया।
कथित तौर पर अभी भी 14 कुकी नागरिक बंधक हैं; CM ने यूएनसी से उनकी रिहाई में सहयोग की अपील की।
कुकी इंपी मणिपुर (केआईएम) के बंद से कांगपोकपी जिले में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा।

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने शनिवार, 23 मई को घोषणा की कि कांगपोकपी जिले के कोंसाखुल गांव से 14 मई को अगवा किए गए छह नागा ग्रामीणों के अपहरण मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपी जाएगी। यह घोषणा यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्यमंत्री सचिवालय में हुई बैठक के दौरान की गई।

बैठक में क्या हुआ

यूएनसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अध्यक्ष एन.जी. लोरहो ने किया। राज्य सरकार की ओर से बैठक में मुख्यमंत्री के अलावा उपमुख्यमंत्री लोसी डिखो, गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदास सिंह और कई नागा विधायक उपस्थित थे। मुख्यमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, बैठक में राज्य की मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति पर विस्तृत चर्चा की गई। यूएनसी ने सरकार से अपहृत ग्रामीणों की तलाश और सुरक्षित रिहाई के प्रयास तेज करने की माँग की।

अब तक की स्थिति और बंधक संकट

एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, 13 मई की घटनाओं के बाद कुकी-जो बहुल कांगपोकपी जिले और नागा बहुल सेनापति जिले में अलग-अलग समूहों द्वारा दोनों समुदायों के कम से कम 50 लोगों को बंधक बनाया गया था। प्रशासन, सामुदायिक नेताओं और नागरिक संगठनों के प्रयासों के बाद 14 और 15 मई को करीब 30 लोगों को रिहा कराया जा सका। मुख्यमंत्री ने यूएनसी से अपील की कि कथित रूप से अभी भी बंधक बनाए गए 14 कुकी नागरिकों की रिहाई सुनिश्चित कराने में सहयोग करें।

13 मई की हिंसा और केंद्रीय जांच

मुख्यमंत्री ने बताया कि 13 मई को कांगपोकपी जिले में तीन कुकी-जो चर्च नेताओं की हत्या और चार अन्य के घायल होने की घटना की जांच पहले ही केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जा चुकी है। इस हिंसा के बाद कुकी इंपी मणिपुर (केआईएम) ने 13 मई की मध्यरात्रि से पूर्ण बंद लागू कर दिया, जिससे कुकी-जो बहुल इलाकों — विशेषकर कांगपोकपी जिले — में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। केआईएम कुकी जनजातीय समुदाय के प्रमुख संगठनों में से एक है।

सामुदायिक तनाव और शांति की अपील

पहाड़ी जिलों में अब भी तनाव बना हुआ है। नागा और कुकी-जो समुदाय हालिया हिंसा के विरोध में अलग-अलग प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने कुकी समुदाय के लोगों से भी अपील की कि वे लापता नागा ग्रामीणों की तलाश में सहयोग करें और प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने में मदद करें। शांति और सामुदायिक सौहार्द की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने राज्य के सभी समुदायों से सरकार के शांति बहाली प्रयासों में सक्रिय सहयोग का आह्वान किया।

आगे क्या होगा

एनआईए द्वारा अपहरण मामले की जांच अपने हाथ में लिए जाने से संघीय स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित होने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में जातीय हिंसा का यह दौर दो वर्षों से अधिक समय से जारी है और पहाड़ी जिलों में स्थिति अभी भी अस्थिर बनी हुई है। खोज और बचाव अभियान लगातार जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस गहरे जातीय संकट का समाधान नहीं है जो दो वर्षों से अधिक समय से राज्य को जकड़े हुए है। नागा और कुकी-जो समुदायों के बीच बंधकों का आदान-प्रदान यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर सत्ता का केंद्र सशस्त्र समूहों के हाथों में खिसक चुका है। सवाल यह है कि क्या केंद्रीय एजेंसी की जांच वास्तविक जवाबदेही सुनिश्चित करेगी या यह केवल राजनीतिक दबाव को अस्थायी रूप से कम करने का उपकरण बनेगी — जैसा मणिपुर में पहले भी होता रहा है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर में छह नागा ग्रामीणों का अपहरण कब और कहाँ हुआ?
छह नागा ग्रामीणों को 14 मई को मणिपुर के कांगपोकपी जिले के कोंसाखुल गांव से अगवा किया गया था। उनकी तलाश के लिए तब से लगातार खोज और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
एनआईए को यह मामला क्यों सौंपा जा रहा है?
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने यूनाइटेड नागा काउंसिल के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में यह घोषणा की। मामले की संवेदनशीलता और सामुदायिक तनाव को देखते हुए केंद्रीय स्तर पर जांच को अधिक प्रभावी माना गया है।
13 मई की हिंसा में क्या हुआ था?
13 मई को कांगपोकपी जिले में तीन कुकी-जो चर्च नेताओं की हत्या कर दी गई और चार अन्य घायल हो गए। इस घटना की जांच पहले ही एक केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जा चुकी है और इसके बाद से पहाड़ी जिलों में तनाव काफी बढ़ गया है।
कितने लोग अभी भी बंधक हैं?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, 13 मई के बाद कम से कम 50 लोगों को बंधक बनाया गया था। 14-15 मई को करीब 30 लोगों को रिहा कराया जा चुका है, लेकिन कथित तौर पर अभी भी 14 कुकी नागरिक बंधक हैं।
यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) ने सरकार से क्या माँग की?
यूएनसी के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री सचिवालय में हुई बैठक में सरकार से अपहृत छह नागा ग्रामीणों की तलाश और सुरक्षित रिहाई के प्रयास तेज करने की माँग की।
राष्ट्र प्रेस
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