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मणिपुर में 6 नागा नागरिकों की हत्या: यूएनसी ने PM मोदी से न्याय और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की

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मणिपुर में 6 नागा नागरिकों की हत्या: यूएनसी ने PM मोदी से न्याय और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की

सारांश

मणिपुर में छह नागा नागरिकों के अपहरण और बर्बर हत्या के बाद यूनाइटेड नागा काउंसिल ने नई दिल्ली में PM मोदी को ज्ञापन सौंपा। यह मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं — नागा संगठनों के अनुसार, यह भारत की पूर्वी सीमा सुरक्षा और पुश्तैनी भूमि पर अस्तित्व का सवाल है।

मुख्य बातें

यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) ने 27 जून 2026 को PM नरेंद्र मोदी को संयुक्त ज्ञापन सौंपकर मणिपुर में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
13 मई को 20 नागा नागरिकों का अपहरण; 14 को 15 मई को रिहा किया गया, शेष 6 के शव 11 जून को क्षत-विक्षत अवस्था में मिले।
कुकी-जो काउंसिल (केजेडसी) ने 25 जून को इन हत्याओं को 'गंभीर गलती' बताते हुए खेद व्यक्त किया।
यूएनसी ने छह हत्याओं की न्यायालय-निगरानी, स्वतंत्र जांच और सभी नागा-बहुल क्षेत्रों के लिए ठोस सुरक्षा गारंटी की मांग की।
नागा संगठनों का आरोप — कुकी उग्रवादी समूह और म्यांमार स्थित केएनए(बी) 3 अगस्त 2015 के इंडो-नागा फ्रेमवर्क समझौते का उल्लंघन कर रहे हैं।
यह हिंसा मई 2023 से जारी मैतेई-कुकी जातीय संघर्ष की पृष्ठभूमि में हुई।

यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) — मणिपुर की 21 नागा जनजातियों की शीर्ष प्रतिनिधि संस्था — ने 27 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार से अपील की कि वे मणिपुर, विशेष रूप से नागा-बहुल क्षेत्रों में तेज़ी से बिगड़ती सुरक्षा स्थिति में तत्काल हस्तक्षेप करें। यह मांग तब आई जब 11 जून को छह अपहृत नागा नागरिकों के बुरी तरह क्षत-विक्षत शव बरामद हुए।

मुख्य घटनाक्रम

13 मई को कांगपोकपी जिले में तीन थाडो चर्च नेताओं की हत्या के बाद, कुकी उग्रवादी समूहों ने कथित तौर पर लेइलोन वाइफेई और सपरमाइना कुकी गांवों से 20 नागा नागरिकों का अपहरण कर लिया। 15 मई को इनमें से 14 को रिहा कर दिया गया, लेकिन शेष छह लापता रहे।

10 जून को यूएनसी और सेनापति के नागा पीपल्स ऑर्गनाइजेशन की मध्यस्थता से नागा विलेज गार्ड्स ने, लोगों के भारी विरोध के बावजूद, मानवीय आधार पर 14 कुकी कैदियों को रिहा किया। परंतु अगले ही दिन — 11 जून को — लापता छह नागा नागरिकों के शव क्षत-विक्षत अवस्था में मिले। कुकी-जो काउंसिल (केजेडसी) ने 25 जून को इन हत्याओं को 'गंभीर गलती' बताते हुए खेद व्यक्त किया।

यूएनसी की प्रमुख मांगें

यूएनसी, नागा महिला संघ और ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन, मणिपुर ने प्रधानमंत्री को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा। इसमें छह नागा नागरिकों के अपहरण और हत्या की एक निश्चित समय-सीमा के भीतर, स्वतंत्र और न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग की गई है।

संगठन ने सभी नागा-बहुल क्षेत्रों, विशेषकर उन संवेदनशील इलाकों के लिए ठोस सुरक्षा गारंटी की भी मांग की, जहां नागरिकों को कथित तौर पर डराने-धमकाने, बंधक बनाने और सशस्त्र घुसपैठ का सामना करना पड़ा है। काउंसिल का तर्क है कि इस स्थिति को महज कानून-व्यवस्था की समस्या या आंतरिक सांप्रदायिक संघर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

छद्म युद्ध और सीमा सुरक्षा का सवाल

नागा संगठनों का आरोप है कि कुकी उग्रवादी समूह और म्यांमार स्थित केएनए(बी) न केवल 3 अगस्त 2015 को हुए इंडो-नागा फ्रेमवर्क समझौते का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि भारत की पूर्वी सीमा की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब ये कुकी समूह सरकार के साथ 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स' (एसओओ) समझौते के तहत हैं।

गौरतलब है कि यूएनसी अध्यक्ष एन.जी. लोर्हो और वरिष्ठ नागा नेता वरेयो शत्सांग, सैमसन रेमेई, ए.सी. थोत्सो, के.एस. पॉल लियो और एल. अदाणी इन दिनों नई दिल्ली में राजनीतिक नेताओं, नागरिक समाज संगठनों, महिला समूहों, शांति कार्यकर्ताओं और मीडिया से मुलाकात कर नागाओं का पक्ष रख रहे हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ और नागा दावे

यूएनसी का कहना है कि मौजूदा कांगपोकपी जिले के बड़े हिस्से ऐतिहासिक रूप से जेलियांगरोंग नागाओं की पुश्तैनी भूमि हैं। संगठन ने ज़ोर देकर कहा कि इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की हिंसा, सैन्य शक्ति का प्रदर्शन या आबादी को डराने-धमकाने की कार्रवाई को नागा सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के गंभीर मुद्दे के रूप में देखा जाना चाहिए।

यह भी उल्लेखनीय है कि यह हिंसा उस समय हुई जब मणिपुर मई 2023 से जारी मैतेई-कुकी जातीय संघर्ष के घावों से उबरने का प्रयास कर रहा था। यूएनसी के अनुसार, हालिया घटनाएं नागा लोगों और शांति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के विरुद्ध एक गहरी साजिश को दर्शाती हैं।

आगे क्या होगा

नागा संगठनों ने राज्य और केंद्र सरकार की नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की क्षमता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यूएनसी ने कहा कि हालिया हिंसा के बाद यह पहली बार था जब मणिपुर के नागा बुजुर्गों ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय मीडिया को संबोधित किया — यह संकेत देता है कि नागा समुदाय अब अपनी बात सीधे राष्ट्रीय मंच पर रखने का मार्ग चुन रहा है। केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और न्यायालय-निगरानी जांच की संभावना पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

मैतेई और कुकी — तीनों समुदाय प्रभावित हो चुके हैं, फिर भी राजनीतिक समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठे। न्यायालय-निगरानी जांच की मांग यदि स्वीकार नहीं होती, तो नागा समुदाय का केंद्र पर से भरोसा और कम होगा — जो पूर्वोत्तर में दीर्घकालिक स्थिरता के लिए गंभीर संकेत है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूनाइटेड नागा काउंसिल ने PM मोदी से क्या मांग की है?
यूएनसी ने प्रधानमंत्री मोदी को सौंपे ज्ञापन में छह अपहृत नागा नागरिकों की हत्या की न्यायालय-निगरानी में स्वतंत्र जांच और सभी नागा-बहुल क्षेत्रों के लिए ठोस सुरक्षा गारंटी की मांग की है। साथ ही मणिपुर में तेज़ी से बिगड़ती सुरक्षा स्थिति में केंद्र सरकार के तत्काल हस्तक्षेप की अपील की गई है।
मणिपुर में 6 नागा नागरिकों की हत्या कब और कैसे हुई?
13 मई 2026 को कांगपोकपी जिले में तीन थाडो चर्च नेताओं की हत्या के बाद कुकी उग्रवादी समूहों ने कथित तौर पर 20 नागा नागरिकों का अपहरण किया। 14 को 15 मई को रिहा किया गया, जबकि शेष छह के क्षत-विक्षत शव 11 जून को बरामद हुए।
कुकी-जो काउंसिल ने इन हत्याओं पर क्या कहा?
कुकी-जो काउंसिल (केजेडसी) ने 25 जून 2026 को इन छह नागा नागरिकों की हत्याओं को 'गंभीर गलती' बताते हुए खेद व्यक्त किया। यह पहली बार था जब केजेडसी ने इन हत्याओं पर सार्वजनिक रूप से खेद जताया।
नागा संगठनों का कुकी उग्रवादी समूहों पर क्या आरोप है?
नागा संगठनों का आरोप है कि कुकी उग्रवादी समूह और म्यांमार स्थित केएनए(बी) 3 अगस्त 2015 के इंडो-नागा फ्रेमवर्क समझौते का उल्लंघन कर रहे हैं और भारत की पूर्वी सीमा की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि ये कुकी समूह सरकार के साथ 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स' समझौते के तहत हैं।
मणिपुर में नागा-कुकी तनाव की पृष्ठभूमि क्या है?
मणिपुर में मई 2023 से मैतेई-कुकी जातीय संघर्ष जारी है, जिसकी आंच में नागा समुदाय भी आ गया है। यूएनसी का कहना है कि कांगपोकपी जिले के बड़े हिस्से ऐतिहासिक रूप से जेलियांगरोंग नागाओं की पुश्तैनी भूमि हैं और हालिया हिंसा नागा अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा है।
राष्ट्र प्रेस
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