मणिपुर: कुकी-जो के 14 बंधकों की रिहाई की मांग, कूकी इन्पी ने बंद 48 घंटे और बढ़ाया

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मणिपुर: कुकी-जो के 14 बंधकों की रिहाई की मांग, कूकी इन्पी ने बंद 48 घंटे और बढ़ाया

सारांश

मणिपुर में जातीय संकट गहराता जा रहा है — कूकी इन्पी ने बंद 48 घंटे और बढ़ाया, 14 कुकी-जो बंधक अब भी सेनापति में। 13 मई को तीन चर्च नेताओं की हत्या के बाद शुरू हुआ यह संकट अब नौवें दिन में प्रवेश कर चुका है, जबकि शांति वार्ता जारी है।

मुख्य बातें

कूकी इन्पी मणिपुर ने 21 मई 2026 को कुकी-जो बहुल इलाकों में बंद 48 घंटे और बढ़ाने की घोषणा की।
सेनापति जिले में कुकी-जो समुदाय के 14 लोग कथित तौर पर अब भी बंधक हैं।
13 मई की घटनाओं के बाद 40 से अधिक लोग बंधक बनाए गए थे; 14-15 मई तक करीब 30 लोगों को रिहा किया जा चुका है।
कुकी-जो समुदाय ने मानवीय आधार पर 200 से अधिक नागा लोगों को सुरक्षित रास्ता दिया।
केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बल लगातार नौवें दिन संयुक्त तलाशी अभियान चला रहे हैं।
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह से मिले चर्च प्रतिनिधिमंडल ने शांति बहाली के प्रयास तेज किए।

कूकी इन्पी मणिपुर ने 21 मई 2026 को घोषणा की कि कुकी-जो बहुल इलाकों में जारी बंद को 48 घंटे और बढ़ाया जाएगा। यह निर्णय नागा बहुल सेनापति जिले में कुकी-जो समुदाय के 14 लोगों की कथित हिरासत के विरोध में लिया गया है। 13 मई को तीन बैपटिस्ट चर्च नेताओं की हत्या के बाद से कांगपोकपी सहित कुकी-जो इलाकों में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है।

बंद विस्तार का कारण

कूकी इन्पी मणिपुर के सूचना एवं प्रचार सचिव जंघाओलुन हाओकिप ने बताया कि सेनापति जिले में कुकी-जो नागरिकों को बंधक बनाए रखने की घटनाओं के चलते बंद का विस्तार अपरिहार्य हो गया। उन्होंने कहा, 'सभी बंधकों की बिना शर्त और तत्काल रिहाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। 13 मई को तीन कुकी-जो चर्च नेताओं की बर्बर हत्या के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद समुदाय ने शांति और सह-अस्तित्व बनाए रखने के लिए संयम बरता है।'

यह बंद मूल रूप से 13 मई की मध्यरात्रि से तीन दिवसीय पूर्ण बंद के रूप में लागू किया गया था, जो कांगपोकपी जिले में तीन बैपटिस्ट चर्च नेताओं की हत्या और चार अन्य के घायल होने की घटना के विरोध में था।

बंधक संकट: मुख्य घटनाक्रम

एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, 13 मई की घटनाओं के बाद कुकी और नागा समुदायों के 40 से अधिक लोगों को विभिन्न समूहों ने बंधक बना लिया था। प्रशासन, समुदाय नेताओं और सामाजिक संगठनों के प्रयासों के बाद 14 और 15 मई को दोनों समुदायों के करीब 30 लोगों को रिहा किया जा सका।

हाओकिप ने बताया कि इस तनावपूर्ण स्थिति में भी कुकी-जो नागरिकों के अपहरण की खबरों के बावजूद समुदाय ने मानवीय आधार पर 200 से अधिक नागा लोगों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराया। 14 मई को आईटी रोड पर पाँच नागा लोगों को भी रिहा किया गया ताकि तनाव और न बढ़े। इसके अलावा, मराम स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष को भी सद्भावना के तौर पर रिहा किया गया।

ऐतिहासिक संदर्भ और पृष्ठभूमि

हाओकिप ने मार्च 2026 में उखरूल जिले के लितान विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी कुकी-जो समुदाय ने 21 तांगखुल नागा बंधकों की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित की थी, जबकि उस घटना में दो कुकी-जो लोगों की मौत हुई थी और दो अन्य पर हमला किया गया था। गौरतलब है कि मणिपुर में जातीय तनाव की यह श्रृंखला राज्य के दीर्घकालिक जनजातीय संघर्ष का हिस्सा है।

दूसरी ओर नागा समुदाय के लोग भी विभिन्न जिलों में प्रदर्शन कर अपने बंधक बनाए गए ग्रामीणों की रिहाई की मांग कर रहे हैं।

सुरक्षा बल और शांति प्रयास

अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बल लगातार नौवें दिन कांगपोकपी, सेनापति और आसपास के जिलों में संयुक्त तलाशी अभियान चला रहे हैं ताकि अब भी बंधक बनाए गए लोगों को सुरक्षित छुड़ाया जा सके।

इसी बीच, 10 सदस्यीय चर्च नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार से नागा बहुल सेनापति जिले के दौरे पर है। प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह से मुलाकात कर कांगपोकपी और सेनापति जिलों में जारी जातीय संकट पर चर्चा की। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, चर्च नेताओं ने सेनापति जिले में यूनाइटेड नागा काउंसिल, नागा पीपल्स ऑर्गनाइज़ेशन और अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक की।

पूर्वोत्तर में व्यापक चिंता

पूर्वोत्तर के आठ प्रमुख छात्र संगठनों के शीर्ष निकाय पूर्वोत्तर छात्र संगठन ने गुवाहाटी में हुई बैठक के बाद क्षेत्र में लगातार हो रही घात लगाकर हत्याओं, अपहरण और आम नागरिकों को डराने-धमकाने की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने कहा कि इन घटनाओं से पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में भय, असुरक्षा और अस्थिरता का माहौल बन गया है। केंद्र और राज्य सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कि वे स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएँ।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि ज़मीनी स्तर पर संयम बनाए रखने की कोशिश हो रही है। लेकिन असली सवाल यह है कि केंद्र और राज्य सरकार की मध्यस्थता नौवें दिन तक भी 14 बंधकों की रिहाई क्यों नहीं करा सकी। जब तक संस्थागत विश्वास-निर्माण के ठोस तंत्र नहीं बनते, हर नई घटना इसी चक्र को दोहराती रहेगी।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कूकी इन्पी मणिपुर ने बंद क्यों बढ़ाया?
कूकी इन्पी मणिपुर ने नागा बहुल सेनापति जिले में कुकी-जो समुदाय के 14 लोगों की कथित हिरासत के विरोध में बंद 48 घंटे और बढ़ाया। यह बंद मूल रूप से 13 मई 2026 को तीन बैपटिस्ट चर्च नेताओं की हत्या के बाद शुरू हुआ था।
मणिपुर में बंधक संकट कब और कैसे शुरू हुआ?
13 मई 2026 को कांगपोकपी जिले में तीन कुकी-जो चर्च नेताओं की हत्या और चार अन्य के घायल होने के बाद कुकी और नागा समुदायों के 40 से अधिक लोगों को विभिन्न समूहों ने बंधक बना लिया। 14-15 मई तक प्रशासन के प्रयासों से करीब 30 लोगों को रिहा किया जा सका, लेकिन 14 कुकी-जो नागरिक अब भी बंधक बताए जा रहे हैं।
शांति बहाली के लिए क्या प्रयास हो रहे हैं?
एक 10 सदस्यीय चर्च प्रतिनिधिमंडल सेनापति जिले के दौरे पर है और मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह से मिल चुका है। यूनाइटेड नागा काउंसिल और नागा पीपल्स ऑर्गनाइज़ेशन के साथ बैठकें हो रही हैं, जबकि केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बल नौवें दिन भी संयुक्त तलाशी अभियान जारी रखे हुए हैं।
कुकी-जो समुदाय ने नागा लोगों के साथ कैसा व्यवहार किया?
कूकी इन्पी मणिपुर के अनुसार, अपने ही नागरिकों के अपहरण की खबरों के बावजूद कुकी-जो समुदाय ने मानवीय आधार पर 200 से अधिक नागा लोगों को सुरक्षित रास्ता दिया। मराम स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष को भी सद्भावना के तौर पर रिहा किया गया।
पूर्वोत्तर छात्र संगठन ने इस पर क्या कहा?
पूर्वोत्तर के आठ प्रमुख छात्र संगठनों के शीर्ष निकाय पूर्वोत्तर छात्र संगठन ने गुवाहाटी में बैठक के बाद क्षेत्र में लगातार हो रही हत्याओं, अपहरण और नागरिकों को डराने-धमकाने की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई। संगठन ने कहा कि इन घटनाओं से पूरे पूर्वोत्तर में भय, असुरक्षा और अस्थिरता का माहौल बन गया है।
राष्ट्र प्रेस
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