मणिपुर हिंसा: कुकी-जो काउंसिल ने PM मोदी को सौंपा ज्ञापन, अलग प्रशासन की मांग
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर में जारी जातीय हिंसा के बीच कुकी-जो समुदाय के सबसे बड़े संगठन कुकी-जो काउंसिल ने 18 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल केंद्रीय हस्तक्षेप की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी कि राज्य में कुकी-जो समुदाय की सुरक्षा, अस्तित्व और सम्मान गंभीर खतरे में है और मौजूदा प्रशासनिक ढाँचे के भीतर शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व अब असंभव होता जा रहा है।
ज्ञापन में आठ प्रमुख माँगें
काउंसिल के अध्यक्ष हेनलियनथांग थांगलेट और महासचिव थांगजामांग ने संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री को यह ज्ञापन सौंपा। इसमें आठ प्रमुख माँगें रखी गई हैं, जिनमें सबसे केंद्रीय माँग है — मणिपुर के मौजूदा प्रशासनिक ढाँचे से अलग एक स्वतंत्र प्रशासनिक व्यवस्था अथवा कुकी-जो समुदाय के लिए अलग केंद्र शासित प्रदेश (विधानसभा सहित) का गठन।
ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया कि कुकी-जो समुदाय यह माँग पहले भी उठा चुका है और इस मुद्दे पर 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन' समझौते के तहत शामिल संगठनों तथा गृह मंत्रालय के बीच बातचीत जारी है। यही ज्ञापन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी अलग से सौंपा गया।
तत्काल राहत की माँगें
दीर्घकालिक राजनीतिक माँगों के साथ-साथ काउंसिल ने कुछ तात्कालिक राहत उपायों की भी अपील की है। इनमें कुकी-जो इलाकों में हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करना, आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना, संवेदनशील जिलों की सीमाओं पर पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात करना और छात्रों के परीक्षा केंद्र सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना शामिल हैं।
अपहरण, हत्याएँ और बंधक संकट
13 मई को कांगपोकपी जिले में तीन चर्च नेताओं की हत्या और चार अन्य लोगों के घायल होने के बाद कांगपोकपी और सेनापति जिलों में कुकी तथा नागा समुदाय के 40 से अधिक लोगों को अलग-अलग समूहों ने बंधक बना लिया था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रशासन, सामुदायिक नेताओं और सामाजिक संगठनों की लगातार कोशिशों के बाद 14 और 15 मई को दोनों समुदायों के 30 लोगों को सुरक्षित रिहा करा लिया गया।
कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ने प्रधानमंत्री को अलग ज्ञापन भेजकर 14 अपहृत कुकी-जो ग्रामीणों की तत्काल रिहाई की माँग की है। इस संगठन ने एनएससीएन-आईएम के साथ हुए युद्धविराम समझौते को समाप्त करने की भी माँग उठाई है। साथ ही, चर्च नेताओं की हत्या की जाँच एनआईए या सीबीआई से कराने की अपील की गई है।
अंतरराष्ट्रीय धार्मिक संगठनों की अपील
वर्ल्ड बैपटिस्ट अलायंस, एशिया पैसिफिक बैपटिस्ट फेडरेशन, काउंसिल फॉर बैपटिस्ट चर्चेज इन नॉर्थ ईस्ट इंडिया और मणिपुर बैपटिस्ट कन्वेंशन ने संयुक्त रूप से यूनाइटेड नगा काउंसिल और कुकी इनपी मणिपुर से अपील की है कि विभिन्न समूहों द्वारा बंधक बनाए गए लोगों को सुरक्षित और तत्काल रिहा किया जाए।
आगे क्या होगा
काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि मणिपुर संकट का स्थायी समाधान तभी संभव है जब मैतेई, नागा और कुकी-जो — तीनों प्रमुख समुदायों के लिए अलग-अलग प्रशासनिक व्यवस्था बनाई जाए। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा में सैकड़ों लोग जान गँवा चुके हैं और हज़ारों विस्थापित हो चुके हैं। हिंसा प्रभावित लोगों के पुनर्वास, मुआवजे और दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी की माँग भी ज्ञापन में शामिल है।