मणिपुर हिंसा: कुकी-जो काउंसिल ने PM मोदी को सौंपा ज्ञापन, अलग प्रशासन की मांग

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मणिपुर हिंसा: कुकी-जो काउंसिल ने PM मोदी को सौंपा ज्ञापन, अलग प्रशासन की मांग

सारांश

मणिपुर में दो वर्षों से जारी जातीय संघर्ष के बीच कुकी-जो काउंसिल ने PM मोदी से अलग केंद्र शासित प्रदेश की माँग उठाई है। 13 मई को तीन चर्च नेताओं की हत्या और 40 से अधिक लोगों के बंधक बनाए जाने के बाद यह माँग और तीखी हो गई है।

मुख्य बातें

कुकी-जो काउंसिल ने 18 मई को PM मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को ज्ञापन सौंपकर अलग केंद्र शासित प्रदेश की माँग की।
ज्ञापन में आठ प्रमुख माँगें हैं — हेलीकॉप्टर सेवा, सुरक्षा बल तैनाती, परीक्षा केंद्र स्थानांतरण सहित।
13 मई को कांगपोकपी में तीन चर्च नेताओं की हत्या के बाद 40 से अधिक लोग बंधक बनाए गए; 30 लोग 14-15 मई को रिहा हुए।
कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ने 14 अपहृत ग्रामीणों की तत्काल रिहाई और एनएससीएन-आईएम युद्धविराम समाप्त करने की माँग की।
चर्च नेताओं की हत्या की जाँच एनआईए या सीबीआई से कराने की अपील की गई है।

मणिपुर में जारी जातीय हिंसा के बीच कुकी-जो समुदाय के सबसे बड़े संगठन कुकी-जो काउंसिल ने 18 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल केंद्रीय हस्तक्षेप की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी कि राज्य में कुकी-जो समुदाय की सुरक्षा, अस्तित्व और सम्मान गंभीर खतरे में है और मौजूदा प्रशासनिक ढाँचे के भीतर शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व अब असंभव होता जा रहा है।

ज्ञापन में आठ प्रमुख माँगें

काउंसिल के अध्यक्ष हेनलियनथांग थांगलेट और महासचिव थांगजामांग ने संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री को यह ज्ञापन सौंपा। इसमें आठ प्रमुख माँगें रखी गई हैं, जिनमें सबसे केंद्रीय माँग है — मणिपुर के मौजूदा प्रशासनिक ढाँचे से अलग एक स्वतंत्र प्रशासनिक व्यवस्था अथवा कुकी-जो समुदाय के लिए अलग केंद्र शासित प्रदेश (विधानसभा सहित) का गठन।

ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया कि कुकी-जो समुदाय यह माँग पहले भी उठा चुका है और इस मुद्दे पर 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन' समझौते के तहत शामिल संगठनों तथा गृह मंत्रालय के बीच बातचीत जारी है। यही ज्ञापन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी अलग से सौंपा गया।

तत्काल राहत की माँगें

दीर्घकालिक राजनीतिक माँगों के साथ-साथ काउंसिल ने कुछ तात्कालिक राहत उपायों की भी अपील की है। इनमें कुकी-जो इलाकों में हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करना, आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना, संवेदनशील जिलों की सीमाओं पर पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात करना और छात्रों के परीक्षा केंद्र सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना शामिल हैं।

अपहरण, हत्याएँ और बंधक संकट

13 मई को कांगपोकपी जिले में तीन चर्च नेताओं की हत्या और चार अन्य लोगों के घायल होने के बाद कांगपोकपी और सेनापति जिलों में कुकी तथा नागा समुदाय के 40 से अधिक लोगों को अलग-अलग समूहों ने बंधक बना लिया था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रशासन, सामुदायिक नेताओं और सामाजिक संगठनों की लगातार कोशिशों के बाद 14 और 15 मई को दोनों समुदायों के 30 लोगों को सुरक्षित रिहा करा लिया गया।

कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ने प्रधानमंत्री को अलग ज्ञापन भेजकर 14 अपहृत कुकी-जो ग्रामीणों की तत्काल रिहाई की माँग की है। इस संगठन ने एनएससीएन-आईएम के साथ हुए युद्धविराम समझौते को समाप्त करने की भी माँग उठाई है। साथ ही, चर्च नेताओं की हत्या की जाँच एनआईए या सीबीआई से कराने की अपील की गई है।

अंतरराष्ट्रीय धार्मिक संगठनों की अपील

वर्ल्ड बैपटिस्ट अलायंस, एशिया पैसिफिक बैपटिस्ट फेडरेशन, काउंसिल फॉर बैपटिस्ट चर्चेज इन नॉर्थ ईस्ट इंडिया और मणिपुर बैपटिस्ट कन्वेंशन ने संयुक्त रूप से यूनाइटेड नगा काउंसिल और कुकी इनपी मणिपुर से अपील की है कि विभिन्न समूहों द्वारा बंधक बनाए गए लोगों को सुरक्षित और तत्काल रिहा किया जाए।

आगे क्या होगा

काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि मणिपुर संकट का स्थायी समाधान तभी संभव है जब मैतेई, नागा और कुकी-जो — तीनों प्रमुख समुदायों के लिए अलग-अलग प्रशासनिक व्यवस्था बनाई जाए। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा में सैकड़ों लोग जान गँवा चुके हैं और हज़ारों विस्थापित हो चुके हैं। हिंसा प्रभावित लोगों के पुनर्वास, मुआवजे और दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी की माँग भी ज्ञापन में शामिल है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका समय और तीव्रता बताती है कि दो वर्षों की हिंसा के बाद समुदाय का केंद्र पर भरोसा कितना क्षीण हो चुका है। गृह मंत्रालय और 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन' समूहों के बीच बातचीत जारी होने के बावजूद जमीनी हालात — चर्च नेताओं की हत्या, बंधक संकट, विस्थापन — यह संकेत देते हैं कि वार्ता का दायरा अभी तक पर्याप्त नहीं रहा। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर राजनीतिक माँगों पर केंद्रित रहती है, लेकिन ज्ञापन में छात्रों के परीक्षा केंद्र और हेलीकॉप्टर सेवा जैसी बुनियादी माँगें यह बताती हैं कि सामान्य जीवन पूरी तरह ठप हो चुका है। केंद्र के लिए असली परीक्षा यह है कि वह राजनीतिक समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए, न कि केवल बातचीत को जीवित रखे।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुकी-जो काउंसिल ने PM मोदी से क्या माँग की है?
कुकी-जो काउंसिल ने PM मोदी को सौंपे ज्ञापन में मणिपुर के मौजूदा प्रशासनिक ढाँचे से अलग एक स्वतंत्र प्रशासन या विधानसभा सहित अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने की माँग की है। इसके अलावा हेलीकॉप्टर सेवा, सुरक्षा बल तैनाती और छात्रों के परीक्षा केंद्र सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की भी अपील की गई है।
13 मई को कांगपोकपी में क्या हुआ था?
13 मई को कांगपोकपी जिले में तीन चर्च नेताओं की हत्या कर दी गई और चार अन्य लोग घायल हो गए। इस घटना के बाद कांगपोकपी और सेनापति जिलों में कुकी और नागा समुदाय के 40 से अधिक लोगों को अलग-अलग समूहों ने बंधक बना लिया था।
बंधक बनाए गए लोगों को कब रिहा किया गया?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रशासन और सामुदायिक नेताओं की कोशिशों के बाद 14 और 15 मई को दोनों समुदायों के 30 लोगों को सुरक्षित रिहा कराया गया। हालाँकि कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार अभी भी 14 कुकी-जो ग्रामीण लापता या अपहृत हैं।
मणिपुर संकट में अंतरराष्ट्रीय संगठनों की क्या भूमिका है?
वर्ल्ड बैपटिस्ट अलायंस और एशिया पैसिफिक बैपटिस्ट फेडरेशन सहित कई अंतरराष्ट्रीय धार्मिक संगठनों ने यूनाइटेड नगा काउंसिल और कुकी इनपी मणिपुर से बंधकों को तत्काल रिहा करने की अपील की है। इन संगठनों की भागीदारी मणिपुर संकट की अंतरराष्ट्रीय पहुँच को दर्शाती है।
कुकी-जो समुदाय के लिए अलग केंद्र शासित प्रदेश की माँग कितनी पुरानी है?
कुकी-जो समुदाय यह माँग मई 2023 में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से उठाता आ रहा है। इस मुद्दे पर 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन' समझौते के तहत शामिल संगठनों और गृह मंत्रालय के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।
राष्ट्र प्रेस
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