11 अगस्त 2026
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मणिपुर: कुकी-जो परिषद का भेदभाव का आरोप, NIA समन और नाकाबंदी पर सरकार से जवाब तलब

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मणिपुर: कुकी-जो परिषद का भेदभाव का आरोप, NIA समन और नाकाबंदी पर सरकार से जवाब तलब

सारांश

कुकी-जो परिषद ने मणिपुर में 21 ग्रामीणों को NIA का समन, NSCN-IM का गांव पर हमला और दो महीने से जारी UNC नाकाबंदी का हवाला देते हुए केंद्र व राज्य सरकार पर समुदाय के साथ भेदभाव का गंभीर आरोप लगाया है। 15 मारे गए कुकी-जो लोगों के लिए न्याय की मांग केंद्र में है।

मुख्य बातें

कुकी-जो परिषद (KZC) ने 11 अगस्त 2026 को मणिपुर में अपने समुदाय के विरुद्ध भेदभाव और न्याय से वंचित किए जाने के आरोप लगाए।
NIA ने लेइलोन वैफेई क्षेत्र के 21 ग्रामीणों को लेमाखोंग आर्मी कैंप में पेश होने के लिए तलब किया।
NSCN-IM के कथित उग्रवादियों ने कांगपोकपी जिले के कैलेंजांग गांव पर हमला कर कई घरों में आग लगाई।
UNC की दो महीने से अधिक की नाकाबंदी से कुकी-जो बहुल क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित।
कथित तौर पर नागा उग्रवादियों द्वारा मारे गए 15 कुकी-जो लोगों — जिनमें 3 पादरी शामिल — के मामलों में न्याय की मांग।
KZC ने निर्दोष बंदियों की तत्काल रिहाई , निष्पक्ष जांच और नाकाबंदी खत्म करने की मांग की।

कुकी-जो परिषद (KZC) ने 11 अगस्त 2026 को मणिपुर में अपने समुदाय के विरुद्ध कथित हिंसा, उत्पीड़न, भेदभाव और न्याय से वंचित किए जाने की घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए केंद्र और राज्य सरकार से कई तीखे सवाल पूछे हैं। परिषद का आरोप है कि सरकारें नागा समुदाय के मुद्दों पर तत्परता दिखाती हैं, जबकि कुकी-जो समुदाय की पीड़ा और शिकायतों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

परिषद के अनुसार, लेइलोन वैफेई क्षेत्र के 21 ग्रामीणों को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने लेमाखोंग आर्मी कैंप में पेश होने के लिए तलब किया है। इसके साथ ही, कांगपोकपी जिले के कैलेंजांग गांव पर कथित तौर पर NSCN-IM के उग्रवादियों ने हमला किया, जिसमें कई घरों को आग लगा दी गई।

KZC ने यह भी दावा किया कि लेमाखोंग एरिया प्रोटेक्शन कमेटी (LAPC) के एक नागरिक समाज नेता, जिनका किसी आपराधिक मामले से कोई संबंध नहीं बताया जाता, अभी भी चुराचांदपुर जेल में बंद हैं।

नाकाबंदी और मानवीय संकट

परिषद के अनुसार, यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) को दो महीने से अधिक समय से अपना नाकाबंदी अभियान जारी रखने की अनुमति दी गई है। इस नाकाबंदी के कारण कांगपोकपी सहित कुकी-जो बहुल क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है।

KZC ने कहा कि लंबे समय तक आवश्यक वस्तुओं से वंचित रखना अमानवीय है, मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और इससे मानवीय संकट गहराता जा रहा है। परिषद ने यह भी कहा कि नाकाबंदी हटाने के लिए UNC द्वारा राज्य सरकार को दिए गए कथित प्रस्ताव अव्यावहारिक और अप्रासंगिक हैं।

सरकार से उठाए सवाल

KZC ने सवाल किया कि मणिपुर के छह नागा लोगों के मामलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जबकि कथित तौर पर नागा उग्रवादियों द्वारा मारे गए 15 कुकी-जो लोगों — जिनमें तीन पादरी भी शामिल हैं — के मामलों में न समान ध्यान दिया गया और न ही न्याय मिला। परिषद ने यह भी पूछा कि UNC को नाकाबंदी जारी रखने की अनुमति क्यों दी जा रही है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।

गौरतलब है कि मणिपुर में जातीय संघर्ष की पृष्ठभूमि में यह पहली बार नहीं है जब किसी समुदाय ने न्याय में भेदभाव का आरोप लगाया हो। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में शांति प्रक्रिया अभी भी अधर में है।

परिषद की मांगें

KZC ने सरकार से मांग की है कि कानून के तहत सभी समुदायों को समान सुरक्षा प्रदान की जाए, निर्दोष बंदियों को तुरंत रिहा किया जाए, 15 कुकी-जो लोगों की हत्या के मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और कुकी-जो गांवों पर हुए हमलों के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

परिषद ने नाकाबंदी को तत्काल समाप्त करने की भी मांग की और कहा कि न्याय का पैमाना सभी के लिए समान होना चाहिए तथा कुकी-जो समुदाय के लोगों के जीवन का भी समान महत्व है।

आगे क्या

फिलहाल केंद्र और मणिपुर राज्य सरकार की ओर से KZC के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। परिषद की मांगों पर सरकार का रुख और NIA की जांच की दिशा आने वाले दिनों में स्थिति को और स्पष्ट करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

राज्य की विफलता की गहरी जड़ों को उजागर करती है। कुकी-जो परिषद के आरोप — चाहे NIA समन हों, UNC नाकाबंदी हो, या 15 मौतों पर चुप्पी — एक ऐसे पैटर्न की ओर इशारा करते हैं जिसे केंद्र और राज्य दोनों नकार नहीं सकते। असली सवाल यह है कि क्या सरकार इन आरोपों की जांच के लिए कोई स्वतंत्र तंत्र बनाने को तैयार है, या यह भी पिछले कई बयानों की तरह अनुत्तरित रह जाएगा।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुकी-जो परिषद ने मणिपुर सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
कुकी-जो परिषद (KZC) ने आरोप लगाया है कि केंद्र और राज्य सरकारें नागा समुदाय के मुद्दों पर विशेष ध्यान देती हैं, जबकि कुकी-जो समुदाय की हिंसा, उत्पीड़न और न्याय से वंचित किए जाने की शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है। परिषद ने NIA समन, NSCN-IM हमले और UNC नाकाबंदी को इसके प्रमाण के रूप में पेश किया है।
NIA ने कुकी-जो गांव के 21 लोगों को क्यों तलब किया?
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने लेइलोन वैफेई क्षेत्र के 21 ग्रामीणों को लेमाखोंग आर्मी कैंप में पेश होने के लिए समन जारी किया है। समन के सटीक कारण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं; KZC ने इसे समुदाय के प्रति भेदभावपूर्ण कार्रवाई बताया है।
UNC की नाकाबंदी से कुकी-जो क्षेत्रों पर क्या असर पड़ा है?
यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) की दो महीने से अधिक की नाकाबंदी के कारण कांगपोकपी सहित कुकी-जो बहुल क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। KZC ने इसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन और मानवीय संकट बताया है।
कैलेंजांग गांव पर हमले में क्या हुआ?
कांगपोकपी जिले के कैलेंजांग गांव पर कथित तौर पर NSCN-IM के उग्रवादियों ने हमला किया, जिसमें कई घरों को आग के हवाले कर दिया गया। KZC ने इस हमले के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
KZC ने 15 कुकी-जो लोगों की हत्या के मामले में क्या मांग की है?
परिषद ने मांग की है कि कथित तौर पर नागा उग्रवादियों द्वारा मारे गए 15 कुकी-जो लोगों — जिनमें तीन पादरी भी शामिल हैं — के मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। परिषद का कहना है कि इन मामलों में न समान ध्यान दिया गया और न ही अब तक न्याय मिला है।
राष्ट्र प्रेस
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