मणिपुर हिंसा: कुकी-जो काउंसिल ने PM मोदी से मांगा हस्तक्षेप, अलग केंद्र शासित प्रदेश की माँग
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर में जारी जातीय हिंसा के बीच कुकी-जो समुदाय के सबसे बड़े संगठन कुकी-जो काउंसिल ने 18 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की माँग की। संगठन ने कहा कि इंफाल समेत पूरे राज्य में समुदाय के लोगों की सुरक्षा, अस्तित्व और सम्मान गंभीर खतरे में है और केंद्र सरकार को बिना देरी के ठोस कदम उठाने चाहिए।
ज्ञापन में क्या हैं प्रमुख माँगें
काउंसिल के अध्यक्ष हेनलियनथांग थांगलेट और महासचिव थांगजामांग ने संयुक्त रूप से यह ज्ञापन सौंपा, जिसमें आठ प्रमुख माँगें रखी गई हैं। इनमें सबसे केंद्रीय माँग यह है कि मणिपुर के मौजूदा प्रशासनिक ढाँचे से अलग कुकी-जो समुदाय के लिए स्वतंत्र प्रशासनिक व्यवस्था अथवा अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाए।
अन्य माँगों में कुकी-जो इलाकों में हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करना, ज़रूरी सामानों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना, संवेदनशील जिलों की सीमाओं पर पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात करना और छात्रों के परीक्षा केंद्र सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना शामिल है। यही ज्ञापन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी सौंपा गया है।
हिंसा की पृष्ठभूमि और समुदायों पर असर
ज्ञापन में रेखांकित किया गया कि मणिपुर में जारी हिंसा ने मैतेई, नागा और कुकी-जो समुदायों के बीच के संबंधों को गहरी चोट पहुँचाई है। लंबे समय से चली आ रही हत्याएँ, विस्थापन और संपत्तियों के नुकसान ने हालात इतने विकट कर दिए हैं कि मौजूदा व्यवस्था के तहत शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व बेहद कठिन होता जा रहा है।
काउंसिल का कहना है कि स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान तभी संभव है जब तीनों प्रमुख समुदायों के लिए अलग-अलग प्रशासनिक व्यवस्था बनाई जाए। संगठन के अनुसार कुकी-जो समुदाय पहले ही विधानसभा सहित अलग केंद्र शासित प्रदेश की माँग कर चुका है और इस मुद्दे पर 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन' समझौते के तहत शामिल संगठनों और गृह मंत्रालय के बीच बातचीत जारी है।
बंधक संकट और चर्च नेताओं की हत्या
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, 13 मई को कांगपोकपी जिले में तीन चर्च नेताओं की हत्या और चार अन्य लोगों के घायल होने के बाद कांगपोकपी और सेनापति जिलों में कुकी और नागा समुदाय के 40 से अधिक लोगों को अलग-अलग समूहों ने बंधक बना लिया था। प्रशासन, सामुदायिक नेताओं और सामाजिक संगठनों की लगातार कोशिशों के बाद 14 और 15 मई को दोनों समुदायों के 30 लोगों को सुरक्षित रिहा करा लिया गया।
कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ने भी प्रधानमंत्री को अलग ज्ञापन भेजकर 14 अपहृत कुकी-जो ग्रामीणों की तत्काल रिहाई की माँग की है। संगठन ने एनएससीएन-आईएम के साथ हुए युद्धविराम समझौते को समाप्त करने की माँग भी उठाई है।
अंतरराष्ट्रीय धार्मिक संगठनों की अपील
वर्ल्ड बैपटिस्ट अलायंस, एशिया पैसिफिक बैपटिस्ट फेडरेशन, काउंसिल फॉर बैपटिस्ट चर्चेज इन नॉर्थ ईस्ट इंडिया और मणिपुर बैपटिस्ट कन्वेंशन ने भी यूनाइटेड नगा काउंसिल और कुकी इनपी मणिपुर से अपील की है कि विभिन्न समूहों द्वारा बंधक बनाए गए लोगों को सुरक्षित रिहा किया जाए।
कुकी-जो काउंसिल ने 13 मई की हत्याओं की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) या केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) से कराने, हिंसा प्रभावित लोगों के पुनर्वास, मुआवज़े और दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी देने की भी माँग की है। यह संकट उस समय और गहरा होता दिख रहा है जब राज्य में राजनीतिक समाधान की दिशा में कोई ठोस प्रगति अभी तक नज़र नहीं आई है।