क्या मणिपुर में कूकी-जो आदिवासियों की रैली राजनीतिक समाधान की मांग कर रही है?

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क्या मणिपुर में कूकी-जो आदिवासियों की रैली राजनीतिक समाधान की मांग कर रही है?

सारांश

मणिपुर के चुराचांदपुर में कूकी-जो समुदाय के हजारों आदिवासियों ने एक बड़ी रैली आयोजित की। इस रैली में उन्होंने अपनी समस्याओं का त्वरित राजनीतिक समाधान मांगा। जानिए इस आंदोलन के पीछे की कहानी और इसके प्रभाव।

Key Takeaways

  • कूकी-जो समुदाय की समस्याओं का समाधान आवश्यक है।
  • राजनीतिक मामले में अमित शाह को ज्ञापन सौंपा गया।
  • जातीय संघर्ष के कारण 250 से अधिक लोगों की जान गई।
  • 40,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए।
  • रैली में महिलाओं और पुरुषों की बड़ी संख्या थी।

इंफाल, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में बुधवार को कूकी-जो समुदाय के हजारों आदिवासियों ने एक विशाल रैली आयोजित की, जिसमें उन्होंने अपनी लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के त्वरित राजनीतिक समाधान की मांग की।

यह रैली कूकी-जो काउंसिल (केजेडसी) और इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (आईटीएलएफ) के संयुक्त आह्वान पर हुई, जिसमें हजारों पुरुष और महिलाएं शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने चुराचांदपुर जिला मुख्यालय शहर में चार किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार्च किया। इस दौरान उन्होंने नारे लगाए और तख्तियां उठाईं, जिन पर विधानमंडल सहित एक अलग केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) की मांग प्रमुख रूप से दर्ज थी।

रैली के बाद, केजेडसी और आईटीएलएफ के नेताओं ने चुराचांदपुर के उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा, जिसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नाम संबोधित किया गया। ज्ञापन में कूकी-जो समुदाय की चिंताओं और मांगों को विस्तार से रखा गया है।

इसी तरह की रैलियां टेंग्नौपाल जिले के मोरेह सहित कूकी-जो बहुल इलाकों में भी आयोजित की गईं। ज्ञापन में उल्लेखित किया गया है कि पिछले लगभग तीन वर्षों से कूकी-जो समुदाय मेइती समुदाय के साथ जारी जातीय संघर्ष के कारण गंभीर पीड़ा झेल रहा है।

ज्ञापन के अनुसार, अब तक 250 से अधिक निर्दोष कूकी-जो लोगों की जान जा चुकी है, 7,000 से अधिक घर जला दिए गए हैं, 360 धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाया गया है और 40,000 से ज्यादा लोग अपने घरों और संपत्तियों से जबरन विस्थापित हुए हैं। इसमें कहा गया कि कूकी-जो आबादी को इंफाल घाटी से बाहर कर दिया गया है, जिससे कूकी-जो और मेइती समुदायों के बीच शारीरिक, प्रशासनिक और मानसिक रूप से पूर्ण विभाजन हो गया है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि 3 मई 2023 से कूकी-जो लोगों के लिए मेइती बहुल इलाकों से होकर यात्रा करना पूरी तरह असंभव हो गया है। उन्हें अब केवल पहाड़ी इलाकों की आंतरिक सड़कों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिनकी हालत बेहद खराब है।

केजेडसी अध्यक्ष हेनलियंथांग थांगलेट और महासचिव थांगजामंग द्वारा संयुक्त रूप से हस्ताक्षरित ज्ञापन में इंफाल घाटी में स्थित कूकी-जो समुदाय की जमीन और संपत्तियों की सुरक्षा की भी मांग की गई है।

राज्य सरकार के अधिकारियों के अनुसार, 3 मई 2023 को मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में आयोजित ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के बाद भड़की जातीय हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोगों की मौत, 1,500 से ज्यादा लोग घायल और 70,000 से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं।

Point of View

क्योंकि यह केवल एक समुदाय की नहीं, बल्कि पूरे देश की सामाजिक स्थिरता का मुद्दा है।
NationPress
15/01/2026

Frequently Asked Questions

कूकी-जो समुदाय की समस्याएं क्या हैं?
कूकी-जो समुदाय जातीय संघर्ष के कारण गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा है, जिसमें हत्या, विस्थापन और संपत्ति का नष्ट होना शामिल है।
इस रैली का मुख्य उद्देश्य क्या था?
रैली का मुख्य उद्देश्य कूकी-जो समुदाय की समस्याओं का राजनीतिक समाधान मांगना था।
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