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मणिपुर: कांगपोकपी के कुकी गांव पर बम हमला, 3 घायल; KIM ने केंद्रीय बलों से तत्काल कार्रवाई माँगी

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मणिपुर: कांगपोकपी के कुकी गांव पर बम हमला, 3 घायल; KIM ने केंद्रीय बलों से तत्काल कार्रवाई माँगी

सारांश

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में कुकी गांव लेइलोन वाइफेई पर बम हमले में 3 लोग घायल हुए। KIM ने NSCN-IM से जुड़े उग्रवादियों पर आरोप लगाया और केंद्रीय बलों से तत्काल कार्रवाई की माँग की — यह घटना पहले से अशांत कांगपोकपी में हिंसा की एक और कड़ी है।

मुख्य बातें

15 जून को मणिपुर के कांगपोकपी जिले के लेइलोन वाइफेई गांव पर अज्ञात उग्रवादियों ने बम से हमला किया, जिसमें 3 लोग घायल हुए।
कुकी इनपी मणिपुर (KIM) ने NSCN-IM और उसके प्रॉक्सी संगठन ZUF-K से जुड़े उग्रवादियों पर हमले का आरोप लगाया।
KIM ने केंद्रीय सुरक्षा बलों से हमलावरों की गिरफ्तारी और मुकदमे की तत्काल माँग की।
13 मई की हिंसा के बाद 50 लोगों को बंधक बनाया गया था; 9 जून तक सभी कुकी बंधक रिहा हुए, लेकिन 10 जून को 6 नागा बंधकों के क्षत-विक्षत शव बरामद हुए।
कांगपोकपी पिछले एक साल से अधिक समय से मणिपुर के सबसे अशांत जिलों में से एक बना हुआ है।

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में सोमवार, 15 जून को अज्ञात हथियारबंद उग्रवादियों ने कुकी समुदाय के लेइलोन वाइफेई गांव पर बम से हमला किया, जिसमें कम से कम 3 लोग घायल हो गए। इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए प्रमुख कुकी आदिवासी संगठन कुकी इनपी मणिपुर (KIM) ने केंद्रीय सुरक्षा बलों से तत्काल और ठोस कार्रवाई की माँग की है।

हमले का घटनाक्रम

KIM के सूचना एवं प्रचार सचिव जंगहाओलन हाओकिप ने आरोप लगाया कि यह हमला NSCN-IM और उसके प्रॉक्सी संगठन जेलियांगरोंग यूनाइटेड फ्रंट (कामसन) (ZUF-K) से जुड़े उग्रवादियों ने किया। उन्होंने बताया कि हमले में संपत्ति को भी नुकसान पहुँचा और ग्रामीणों में दहशत फैल गई।

हाओकिप ने अपने बयान में कहा, "इस हिंसक घटना ने एक बार फिर बेगुनाह लोगों की जान को खतरे में डाल दिया है। संपत्ति को नुकसान पहुँचाया है और लोगों की शांति और सुरक्षा को खत्म कर दिया है। आम नागरिकों वाले इलाकों पर ऐसे हमले अस्वीकार्य और अमानवीय हैं और ये कानून के शासन के लिए सीधा खतरा हैं।"

KIM की माँगें और सवाल

संगठन ने सरकार और सुरक्षा एजेंसियों से माँग की कि इस हमले में शामिल सभी लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए और उन पर मुकदमा चलाया जाए। हाओकिप ने कहा कि लेइलोन वाइफेई के निवासियों से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे लगातार भय के साये में जीते रहें, जबकि हथियारबंद समूह बेखौफ अपनी गतिविधियाँ जारी रखें।

उन्होंने तीखे शब्दों में पूछा, "क्या सरकार और सुरक्षा बल कब तक उन लोगों को छूट देते रहेंगे जो आतंक, असुरक्षा और तबाही फैलाने के लिए जिम्मेदार हैं? सुरक्षा बलों और सरकार की चुप्पी, देरी या कार्रवाई न करने से अपराधी और भी बेखौफ हो जाएंगे और जनता का गुस्सा और अविश्वास और बढ़ेगा।"

कांगपोकपी में बढ़ती हिंसा की पृष्ठभूमि

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब कांगपोकपी पहले से ही मणिपुर के सबसे अशांत जिलों में शुमार है। 13 मई को हुई हिंसा में कांगपोकपी में चर्च के तीन नेताओं की मौत हो गई थी और 4 अन्य घायल हुए थे। उस घटना के बाद कांगपोकपी और सेनापति जिलों में अलग-अलग हथियारबंद समूहों ने कुकी और नागा समुदायों के कम से कम 50 लोगों को बंधक बना लिया था।

अधिकारियों, समुदाय के नेताओं और नागरिक समाज संगठनों की कोशिशों के बाद 14 और 15 मई को दोनों समुदायों के 30 लोगों को रिहा किया गया। कुकी समुदाय के शेष 14 बंधकों को लगभग चार सप्ताह तक बंधक रखने के बाद 9 जून को छोड़ा गया।

हालाँकि, अगवा किए गए 6 नागा लोगों के क्षत-विक्षत शव 10 जून को कांगपोकपी के खराम वाइफेई गांव के पास एक जंगली इलाके से बरामद किए गए, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि पिछले एक साल से अधिक समय से कांगपोकपी जिले में हिंसक घटनाओं का सिलसिला जारी है, जिसमें कई लोगों की जान जा चुकी है। बार-बार होने वाले हमलों के कारण स्थानीय निवासी विस्थापन, आर्थिक नुकसान और मनोवैज्ञानिक आघात झेलने को मजबूर हैं। KIM ने माँग की है कि आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और आगे किसी भी हिंसा को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय तत्काल लागू किए जाएँ।

क्या होगा आगे

फिलहाल सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया और जाँच की स्थिति स्पष्ट नहीं है। लेइलोन वाइफेई हमले के बाद क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और नागरिक समाज संगठनों की नज़र सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

चर्च नेताओं की हत्या और अब बम हमले के बावजूद केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया की गति और पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं। KIM का यह सवाल कि 'सरकार कब तक छूट देती रहेगी', केवल एक संगठन की आवाज़ नहीं — यह उस नागरिक अविश्वास का प्रतिबिंब है जो बार-बार की निष्क्रियता से जन्मता है। जब तक जवाबदेही का ठोस तंत्र नहीं बनता, हिंसा का यह चक्र टूटने की संभावना कम है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर के लेइलोन वाइफेई गांव पर हमला कब और कैसे हुआ?
15 जून को कांगपोकपी जिले के कुकी समुदाय के लेइलोन वाइफेई गांव पर अज्ञात हथियारबंद उग्रवादियों ने बम से हमला किया, जिसमें कम से कम 3 लोग घायल हो गए और संपत्ति को नुकसान पहुँचा।
KIM ने किस पर हमले का आरोप लगाया है?
कुकी इनपी मणिपुर (KIM) के सूचना सचिव जंगहाओलन हाओकिप ने NSCN-IM और उसके प्रॉक्सी संगठन जेलियांगरोंग यूनाइटेड फ्रंट (कामसन) (ZUF-K) से जुड़े उग्रवादियों पर यह हमला करने का आरोप लगाया है।
KIM ने सरकार और सुरक्षा बलों से क्या माँगें की हैं?
KIM ने माँग की है कि हमले में शामिल सभी लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए और उन पर मुकदमा चलाया जाए। संगठन ने यह भी कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और आगे की हिंसा रोकने के लिए तत्काल सुरक्षा उपाय लागू हों।
कांगपोकपी में हाल ही में और कौन-सी बड़ी हिंसक घटनाएँ हुई हैं?
13 मई को कांगपोकपी में चर्च के तीन नेताओं की हत्या हुई और 4 घायल हुए, जिसके बाद 50 लोगों को बंधक बनाया गया। 9 जून को कुकी बंधक रिहा हुए, लेकिन 10 जून को 6 नागा बंधकों के क्षत-विक्षत शव खराम वाइफेई गांव के पास जंगल में मिले।
मणिपुर में यह हिंसा किन समुदायों के बीच है और यह कब से जारी है?
मणिपुर में मुख्यतः कुकी और नागा/मैतेई समुदायों के बीच जातीय तनाव और हिंसा मई 2023 से जारी है। कांगपोकपी जिला इस संघर्ष का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहाँ पिछले एक साल से अधिक समय में कई लोगों की जान जा चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
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