13 सितंबर 2026
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मणिपुर: तामेंगलोंग और नोनी में संदिग्ध उग्रवादी हमले, कुकी समुदाय के चार लोगों की मौत

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मणिपुर: तामेंगलोंग और नोनी में संदिग्ध उग्रवादी हमले, कुकी समुदाय के चार लोगों की मौत

सारांश

मणिपुर में कुकी समुदाय के ब्लैक डे पर संदिग्ध उग्रवादियों ने दो जिलों में ताबड़तोड़ हमले किए — चार जानें गईं, दो महिलाएँ भी शामिल। यह हिंसा उस राज्य में हुई जहाँ मई 2023 से जातीय संघर्ष में 306 से अधिक मौतें हो चुकी हैं और शांति प्रक्रिया अभी भी अधर में है।

मुख्य बातें

मणिपुर के तामेंगलोंग और नोनी जिलों में 13 सितंबर 2026 को संदिग्ध उग्रवादियों के हमलों में कुकी समुदाय के 4 लोगों की मौत , जिनमें 2 महिलाएँ शामिल।
टोलेन कुकी गाँव में ल्हिंगंगाई सिंगसित और उनके पति सेइनेह सिंगसित की मौत; शिशु पुत्र भी घायल।
लोंगपी गाँव में जूली गंगटे और आर.
गंगटे को गोली मारकर हत्या।
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने हमले की कड़ी निंदा की; पूर्व CM एन.
बीरेन सिंह ने एक्स पर प्रतिक्रिया दी।
यह घटना कुकी समुदाय के 'साहनीत नी' (ब्लैक डे) पर हुई, जो 1990 के दशक के कुकी-नागा संघर्ष की याद में मनाया जाता है।
मणिपुर में मई 2023 से जातीय हिंसा में 306 से अधिक मौतें, 49 लापता, हजारों विस्थापित।

मणिपुर के तामेंगलोंग और नोनी जिलों में 13 सितंबर 2026 (रविवार) को संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा किए गए अलग-अलग हमलों में कुकी समुदाय के चार लोगों की मौत हो गई। मृतकों में दो महिलाएँ भी शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों ने इन हमलों की पुष्टि की है।

पहली घटना: तामेंगलोंग के टोलेन गाँव में हमला

तामेंगलोंग जिले के कैमाई थाना क्षेत्र के टोलेन कुकी गाँव में संदिग्ध उग्रवादियों ने ल्हिंगंगाई सिंगसित के घर पर हमला किया, जिसमें उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस हमले में उनके पति सेइनेह सिंगसित और शिशु पुत्र भी घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल सेइनेह सिंगसित की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। घायल परिवार को दक्षिणी असम के सिलचर में इलाज के लिए ले जाया जा रहा था। सूचना मिलते ही सुरक्षाबल गाँव पहुँचे और घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई।

दूसरी घटना: नोनी के लोंगपी गाँव में गोलीबारी

नोनी जिले के नुंगबा थाना क्षेत्र के लोंगपी गाँव में हथियारबंद संदिग्ध उग्रवादियों ने कथित तौर पर अंधाधुंध गोलीबारी की। इस हमले में जूली गंगटे और आर. गंगटे की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, चारों मृतक कुकी जनजातीय समुदाय से संबंधित थे।

सरकार और नेताओं की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए निर्दोष लोगों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि निर्दोष नागरिकों के खिलाफ इस तरह की कायरतापूर्ण हिंसा अस्वीकार्य है और सभ्य समाज में इसका कोई स्थान नहीं है। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की तथा घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता एन. बीरेन सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस घटना को 'बेहद हृदयविदारक' बताया। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इस तरह की हिंसा शांति बहाली के प्रयासों को कमजोर करती है।

नागा पीपुल्स फ्रंट के विधायक अवांगबो न्यूमै ने कहा कि निहत्थे पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाना कायरतापूर्ण कृत्य है जिसका सभ्य समाज में कोई स्थान नहीं। कई कुकी और नागा विधायकों के साथ ही कैमाई विलेज अथॉरिटी सहित कई संगठनों ने भी इस हमले की निंदा की और निष्पक्ष जाँच कर दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार करने की माँग की।

संवेदनशील तारीख: 'साहनीत नी' (ब्लैक डे) पर हमला

यह हिंसा ऐसे दिन हुई जब मणिपुर में कुकी समुदाय 13 सितंबर को 'साहनीत नी' यानी ब्लैक डे मनाता है। यह दिन 1990 के दशक में हुए कुकी-नागा संघर्ष में मारे गए लोगों की स्मृति में मनाया जाता है। इस तारीख का चयन आलोचकों के अनुसार समुदायों के बीच विभाजन गहरा करने की सोची-समझी कोशिश हो सकती है।

मणिपुर संकट की व्यापक पृष्ठभूमि

यह ताज़ा हिंसा ऐसे समय में सामने आई है जब मणिपुर में शांति बहाल करने के प्रयास जारी हैं। मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा में अब तक 306 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 49 लोग अब भी लापता हैं और हजारों लोग विस्थापित हैं। गौरतलब है कि यह घटना राज्य में संघर्षविराम और बातचीत की कोशिशों के बीच हुई है, जो शांति प्रक्रिया की नाज़ुकता को उजागर करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इसे सांकेतिक रूप से और भी गंभीर बनाता है। मणिपुर में मई 2023 से 306 से अधिक मौतें हो चुकी हैं, फिर भी राज्य में स्थायी शांति की कोई ठोस रूपरेखा सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। राजनीतिक निंदाएँ नियमित हो चली हैं, लेकिन जवाबदेही और दोषियों की गिरफ्तारी के आँकड़े अभी भी धुंधले हैं। असली सवाल यह है कि क्या केंद्र और राज्य सरकार की शांति-वार्ता की रणनीति ज़मीन पर कारगर है — या यह हमले उसकी विफलता की गवाही दे रहे हैं।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर में 13 सितंबर 2026 को क्या हुआ?
मणिपुर के तामेंगलोंग और नोनी जिलों में संदिग्ध उग्रवादियों ने दो अलग-अलग हमलों में कुकी समुदाय के चार लोगों की हत्या कर दी, जिनमें दो महिलाएँ भी शामिल हैं। पुलिस ने इन हमलों की पुष्टि की है और सुरक्षाबल घटनास्थल पर पहुँच गए।
टोलेन गाँव हमले में कौन मारे गए?
टोलेन कुकी गाँव में संदिग्ध उग्रवादियों ने ल्हिंगंगाई सिंगसित के घर पर हमला किया, जिसमें उनकी मौत हो गई। उनके पति सेइनेह सिंगसित की अस्पताल ले जाते समय मौत हुई; दोनों का शिशु पुत्र भी हमले में घायल हुआ।
मणिपुर में 'साहनीत नी' या ब्लैक डे क्या है?
कुकी समुदाय हर वर्ष 13 सितंबर को 'साहनीत नी' (ब्लैक डे) मनाता है। यह दिन 1990 के दशक में हुए कुकी-नागा संघर्ष में मारे गए लोगों की याद में मनाया जाता है। इसी संवेदनशील तारीख पर हुए हमले को कई संगठनों ने सोची-समझी साज़िश बताया है।
मणिपुर में जातीय हिंसा कब से चल रही है और कितने लोग प्रभावित हुए हैं?
मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा में अब तक 306 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। 49 लोग अभी भी लापता हैं और हजारों लोग विस्थापित हैं।
इन हमलों पर मणिपुर सरकार की क्या प्रतिक्रिया रही?
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने हमलों की कड़ी निंदा की और इसे 'कायरतापूर्ण हिंसा' करार दिया। पूर्व मुख्यमंत्री व BJP नेता एन. बीरेन सिंह ने एक्स पर पोस्ट कर इसे हृदयविदारक बताया और कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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