जूनियर एशिया कप 2026: पुरुष टीम ने रिकॉर्ड छठी बार, महिला टीम ने हैट्रिक से जीता खिताब
सारांश
मुख्य बातें
भारत की जूनियर पुरुष हॉकी टीम और जूनियर महिला हॉकी टीम ने 13 सितंबर 2026 को एक ऐतिहासिक दिन में जूनियर एशिया कप के दोनों खिताब अपने नाम किए। पुरुष टीम ने दक्षिण कोरिया को 4-1 से रौंदकर रिकॉर्ड छठी बार यह ट्रॉफी जीती, जबकि महिला टीम ने चीन को 1-0 से हराते हुए खिताब की हैट्रिक पूरी की। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने दोनों टीमों को बधाई देते हुए इसे युवा खिलाड़ियों के असाधारण कौशल और दृढ़ संकल्प का प्रमाण बताया।
पुरुष फाइनल: दक्षिण कोरिया पर दबदबा
भारतीय पुरुष टीम ने फाइनल में शुरुआत से ही दक्षिण कोरिया पर पूरी तरह वर्चस्व कायम किया। अजीत यादव ने 9वें मिनट में पहला गोल दागकर भारत को बढ़त दिलाई। अनमोल एक्का ने 13वें मिनट में गोल कर स्कोर 2-0 कर दिया। 21वें मिनट में प्रभदीप ने तीसरा गोल किया और आशु मौर्य ने 50वें मिनट में चौथा गोल करके जीत पर मुहर लगा दी। दक्षिण कोरिया पूरे मैच में केवल एक गोल ही कर सका।
महिला फाइनल: अजेय रक्षा से हैट्रिक
भारतीय महिला टीम ने चीन के खिलाफ फाइनल में मजबूत रक्षात्मक रणनीति से खेल का पूरा नियंत्रण अपने हाथों में रखा। मैच का एकमात्र और निर्णायक गोल सानिका चंद्रकांत ने 17वें मिनट में किया। इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों ने अपना डिफेंस इतना मजबूत रखा कि चीन को बराबरी का एक भी मौका नहीं मिला। गौरतलब है कि महिला टीम ने यह पूरा टूर्नामेंट बिना कोई मैच गँवाए जीता।
उपराष्ट्रपति की बधाई
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दोनों टीमों को बधाई देते हुए लिखा, 'हमारी जूनियर महिला हॉकी टीम को बिना कोई मैच हारे एशिया कप का खिताब सफलतापूर्वक बचाने के लिए, और हमारी जूनियर पुरुष हॉकी टीम को फाइनल में 4-1 की शानदार जीत के साथ एशिया कप जीतने पर हार्दिक बधाई।' उन्होंने यह भी कहा कि ये जीतें भारत के युवा खिलाड़ियों के 'असाधारण हुनर, अनुशासन और दृढ़ संकल्प' को दर्शाती हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय हॉकी का भविष्य जूनियर स्तर पर बेहद मजबूत दिख रहा है। पुरुष टीम का यह छठा जूनियर एशिया कप खिताब उन्हें इस टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे सफल टीम बनाता है। महिला टीम की लगातार तीसरी जीत दर्शाती है कि भारत महिला हॉकी में एशिया की सर्वश्रेष्ठ जूनियर शक्ति के रूप में स्थापित हो चुकी है। इन प्रदर्शनों से यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि आने वाले वर्षों में ये खिलाड़ी सीनियर राष्ट्रीय टीम की रीढ़ बन सकते हैं।