13 सितंबर 2026
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: PM मोदी की 'सरपंच' कूटनीति, SU-57 ऑफर और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर बड़ी बहस

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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: PM मोदी की 'सरपंच' कूटनीति, SU-57 ऑफर और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर बड़ी बहस

सारांश

ब्रिक्स 2026 के मंच से भारत की कूटनीति का नया अध्याय — PM मोदी की 'सरपंच' भूमिका की तारीफ, रूस के SU-57 ऑफर पर गंभीर बहस, और चीन सीमा पर 'अर्ली हार्वेस्ट' के संकेत। रंजीत राय और जगविंदर विरक ने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को इस दौर की सबसे बड़ी ताकत बताया।

मुख्य बातें

रक्षा विशेषज्ञ रंजीत राय ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेनाएं मजबूत हुई हैं, लेकिन लड़ाकू विमानों की जरूरत अभी भी बनी हुई है।
रूस ने भारत को एडवांस्ड सुखोई एसयू-57 लड़ाकू विमान का प्रस्ताव दिया है; भारत पहले ही इसके संयुक्त विकास में निवेश कर चुका है।
114 राफेल विमान पाइपलाइन में हैं, लेकिन कथित तौर पर सॉफ्टवेयर हस्तांतरण को लेकर फ्रांस की सीमाएं बताई जा रही हैं।
NSA अजित डोभाल की चीन यात्रा के बाद 'अर्ली हार्वेस्ट' का उल्लेख — सीमा विवाद में सकारात्मक प्रगति के संकेत।
जगविंदर सिंह विरक ने PM मोदी को 21 देशों के नेताओं को एकजुट करने वाले 'सरपंच' के रूप में सराहा।
महाराष्ट्र मंत्री आशीष जायसवाल ने कहा कि राज्य में देश का सर्वाधिक निवेश आया है और सरकार ब्रिक्स के लिए रोडमैप तैयार कर रही है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान नई दिल्ली में भारत की रक्षा तैयारियों और विदेश नीति पर व्यापक चर्चा छिड़ी हुई है। रूस द्वारा भारत को एडवांस्ड सुखोई एसयू-57 लड़ाकू विमान का प्रस्ताव दिए जाने की खबरों के बीच, रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिक विश्लेषकों ने भारत की बहु-आयामी विदेश नीति को रेखांकित किया है। साथ ही, ऑस्ट्रेलिया-भारत रणनीतिक गठबंधन के चेयरमैन जगविंदर सिंह विरक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वैश्विक मंच पर 'सरपंच' की भूमिका निभाने वाले नेता के रूप में सराहा है।

SU-57 ऑफर और भारत की रक्षा जरूरतें

रक्षा विशेषज्ञ रंजीत राय ने कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की रक्षा सेनाएं काफी मजबूत हो गई हैं, लेकिन कोई भी देश अपनी उपलब्धियों पर बैठा नहीं रहता। हर देश अपनी सुरक्षा को लगातार बढ़ाता रहता है, क्योंकि कोई नहीं जानता कि कल क्या हो सकता है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को अभी भी लड़ाकू विमानों की सख्त जरूरत है।

रंजीत राय ने बताया कि 114 राफेल विमान पाइपलाइन में हैं, लेकिन कथित तौर पर खबरें आ रही हैं कि फ्रांस उनका सॉफ्टवेयर देने में सक्षम नहीं है। इसी पृष्ठभूमि में रूस के एसयू-57 को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भारत पहले ही इस विमान के संयुक्त विकास में निवेश कर चुका है, इसलिए यह प्रस्ताव पूरी तरह नया नहीं है।

भारत-रूस रक्षा संबंध और रणनीतिक स्वायत्तता

रंजीत राय ने भारत-रूस रक्षा साझेदारी की व्यापकता पर प्रकाश डाला। उनके अनुसार तेल, ऊर्जा, व्यापार, परमाणु पनडुब्बियाँ, एस-400 प्रणाली और एसयू-30 विमान — इन तमाम क्षेत्रों में रूस के सहयोग से भारत को व्यापक लाभ मिला है। साथ ही, भारत ने अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ भी सहयोग जारी रखा है, जिसे 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति कहा जाता है।

गौरतलब है कि इस नीति की प्रासंगिकता अब और बढ़ गई है। रंजीत राय ने बताया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स बैठक के दौरान सीमा विवाद सुलझाने की मंशा जताई। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की हाल की चीन यात्रा और उनके 'अर्ली हार्वेस्ट' के उल्लेख को रंजीत राय ने सकारात्मक संकेत बताया — अर्थात किए गए प्रयासों का फल मिलने की संभावना है।

PM मोदी की 'सरपंच' कूटनीति

जगविंदर सिंह विरक ने कहा, 'भारत हमेशा से युद्ध के खिलाफ रहा है। पीएम मोदी ने हर मंच पर कहा कि हम युद्ध के खिलाफ हैं। भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जिसने हमेशा अपनी रक्षा की है। जहां कहीं भी कुछ हुआ है, भारत ने उसका विरोध किया है और शांति के प्रतीक के रूप में अपनी पहचान बनाए रखी है।'

विरक ने आगे कहा कि 21 देशों के राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों को एक मंच पर एकत्र करना और सामूहिक कार्यभार का आह्वान करना — यह 'सरपंच' की भूमिका है, जो प्रधानमंत्री मोदी ने बखूबी निभाई है। उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि बताया।

महाराष्ट्र का निवेश एजेंडा

महाराष्ट्र के मंत्री आशीष जायसवाल ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के संदर्भ में कहा कि यह देश के विकास के लिए एक अनिवार्य पहल है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में देश का सर्वाधिक निवेश आया है और राज्य की अर्थव्यवस्था देश में सबसे मजबूत है। महाराष्ट्र सरकार ब्रिक्स के अवसरों को भुनाने के लिए एक रोडमैप तैयार कर रही है।

आगे की राह

ब्रिक्स 2026 के संदर्भ में भारत की बहुआयामी रणनीति — एक ओर रूस के साथ रक्षा सहयोग और दूसरी ओर पश्चिमी देशों के साथ साझेदारी — भारत की कूटनीतिक परिपक्वता को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के साथ सीमा वार्ता में 'अर्ली हार्वेस्ट' की संभावना और एसयू-57 पर चर्चाएं आने वाले महीनों में ठोस रूप ले सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि ब्रिक्स जैसे बहुध्रुवीय मंच पर भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को कितनी दूर तक व्यावहारिक परिणामों में बदल पाता है। SU-57 पर चर्चाएं और राफेल के सॉफ्टवेयर विवाद एक साथ सामने आना यह दर्शाता है कि भारत की रक्षा खरीद नीति में विविधीकरण की जरूरत अभी भी अधूरी है। चीन के साथ 'अर्ली हार्वेस्ट' का संकेत उत्साहजनक है, लेकिन गलवान के बाद से विश्वास-निर्माण की प्रक्रिया धीमी रही है — एक बैठक में जताई गई मंशा और ज़मीनी बदलाव के बीच की खाई को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स 2026 में PM मोदी की 'सरपंच' कूटनीति क्या है?
जगविंदर सिंह विरक के अनुसार, PM मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में 21 देशों के राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों को एकजुट करते हुए 'सरपंच' की भूमिका निभाई — यानी एक ऐसे मध्यस्थ की जो सामूहिक निर्णय और सहयोग की दिशा तय करे। भारत की यह शांतिदूत छवि विश्व मंच पर उसकी बहुध्रुवीय कूटनीति का विस्तार है।
रूस ने भारत को SU-57 विमान का ऑफर क्यों दिया है?
रक्षा विशेषज्ञ रंजीत राय के अनुसार, भारत को लड़ाकू विमानों की सख्त जरूरत है और राफेल के सॉफ्टवेयर हस्तांतरण को लेकर कथित अड़चनें सामने आई हैं। चूँकि भारत पहले ही एसयू-57 के संयुक्त विकास में निवेश कर चुका है, इसलिए रूस का यह प्रस्ताव पूरी तरह नया नहीं है और इसकी व्यावहारिक संभावना मजबूत मानी जा रही है।
भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का क्या अर्थ है?
रणनीतिक स्वायत्तता का अर्थ है कि भारत किसी एक देश या गुट पर निर्भर हुए बिना, अपने राष्ट्रीय हित के आधार पर विभिन्न शक्तियों के साथ संबंध बनाता है। इसी नीति के तहत भारत ने रूस से एस-400, एसयू-30 और ऊर्जा सहयोग लिया है, साथ ही अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ भी रक्षा और व्यापार साझेदारी बनाए रखी है।
NSA अजित डोभाल की चीन यात्रा और 'अर्ली हार्वेस्ट' का क्या मतलब है?
रक्षा विशेषज्ञ रंजीत राय के अनुसार, NSA अजित डोभाल की हाल की चीन यात्रा के दौरान 'अर्ली हार्वेस्ट' का उल्लेख हुआ, जिसका अर्थ है कि सीमा विवाद सुलझाने के लिए किए गए प्रयासों का ठोस परिणाम जल्द मिलने की संभावना है। इसके साथ ही ब्रिक्स बैठक में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी सीमा मुद्दे को हल करने की मंशा जताई।
ब्रिक्स 2026 में महाराष्ट्र की क्या भूमिका है?
महाराष्ट्र के मंत्री आशीष जायसवाल ने बताया कि राज्य में देश का सर्वाधिक निवेश आया है और महाराष्ट्र सरकार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अवसरों का लाभ उठाने के लिए एक विशेष रोडमैप तैयार कर रही है। उन्होंने महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को देश में सबसे मजबूत बताया।
राष्ट्र प्रेस
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