ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: PM मोदी की 'सरपंच' कूटनीति, SU-57 ऑफर और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर बड़ी बहस
सारांश
मुख्य बातें
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान नई दिल्ली में भारत की रक्षा तैयारियों और विदेश नीति पर व्यापक चर्चा छिड़ी हुई है। रूस द्वारा भारत को एडवांस्ड सुखोई एसयू-57 लड़ाकू विमान का प्रस्ताव दिए जाने की खबरों के बीच, रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिक विश्लेषकों ने भारत की बहु-आयामी विदेश नीति को रेखांकित किया है। साथ ही, ऑस्ट्रेलिया-भारत रणनीतिक गठबंधन के चेयरमैन जगविंदर सिंह विरक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वैश्विक मंच पर 'सरपंच' की भूमिका निभाने वाले नेता के रूप में सराहा है।
SU-57 ऑफर और भारत की रक्षा जरूरतें
रक्षा विशेषज्ञ रंजीत राय ने कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की रक्षा सेनाएं काफी मजबूत हो गई हैं, लेकिन कोई भी देश अपनी उपलब्धियों पर बैठा नहीं रहता। हर देश अपनी सुरक्षा को लगातार बढ़ाता रहता है, क्योंकि कोई नहीं जानता कि कल क्या हो सकता है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को अभी भी लड़ाकू विमानों की सख्त जरूरत है।
रंजीत राय ने बताया कि 114 राफेल विमान पाइपलाइन में हैं, लेकिन कथित तौर पर खबरें आ रही हैं कि फ्रांस उनका सॉफ्टवेयर देने में सक्षम नहीं है। इसी पृष्ठभूमि में रूस के एसयू-57 को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भारत पहले ही इस विमान के संयुक्त विकास में निवेश कर चुका है, इसलिए यह प्रस्ताव पूरी तरह नया नहीं है।
भारत-रूस रक्षा संबंध और रणनीतिक स्वायत्तता
रंजीत राय ने भारत-रूस रक्षा साझेदारी की व्यापकता पर प्रकाश डाला। उनके अनुसार तेल, ऊर्जा, व्यापार, परमाणु पनडुब्बियाँ, एस-400 प्रणाली और एसयू-30 विमान — इन तमाम क्षेत्रों में रूस के सहयोग से भारत को व्यापक लाभ मिला है। साथ ही, भारत ने अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ भी सहयोग जारी रखा है, जिसे 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति कहा जाता है।
गौरतलब है कि इस नीति की प्रासंगिकता अब और बढ़ गई है। रंजीत राय ने बताया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स बैठक के दौरान सीमा विवाद सुलझाने की मंशा जताई। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की हाल की चीन यात्रा और उनके 'अर्ली हार्वेस्ट' के उल्लेख को रंजीत राय ने सकारात्मक संकेत बताया — अर्थात किए गए प्रयासों का फल मिलने की संभावना है।
PM मोदी की 'सरपंच' कूटनीति
जगविंदर सिंह विरक ने कहा, 'भारत हमेशा से युद्ध के खिलाफ रहा है। पीएम मोदी ने हर मंच पर कहा कि हम युद्ध के खिलाफ हैं। भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जिसने हमेशा अपनी रक्षा की है। जहां कहीं भी कुछ हुआ है, भारत ने उसका विरोध किया है और शांति के प्रतीक के रूप में अपनी पहचान बनाए रखी है।'
विरक ने आगे कहा कि 21 देशों के राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों को एक मंच पर एकत्र करना और सामूहिक कार्यभार का आह्वान करना — यह 'सरपंच' की भूमिका है, जो प्रधानमंत्री मोदी ने बखूबी निभाई है। उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि बताया।
महाराष्ट्र का निवेश एजेंडा
महाराष्ट्र के मंत्री आशीष जायसवाल ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के संदर्भ में कहा कि यह देश के विकास के लिए एक अनिवार्य पहल है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में देश का सर्वाधिक निवेश आया है और राज्य की अर्थव्यवस्था देश में सबसे मजबूत है। महाराष्ट्र सरकार ब्रिक्स के अवसरों को भुनाने के लिए एक रोडमैप तैयार कर रही है।
आगे की राह
ब्रिक्स 2026 के संदर्भ में भारत की बहुआयामी रणनीति — एक ओर रूस के साथ रक्षा सहयोग और दूसरी ओर पश्चिमी देशों के साथ साझेदारी — भारत की कूटनीतिक परिपक्वता को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के साथ सीमा वार्ता में 'अर्ली हार्वेस्ट' की संभावना और एसयू-57 पर चर्चाएं आने वाले महीनों में ठोस रूप ले सकती हैं।