रूस का सुखोई इंजन ऑफर भारतीय वायुसेना के लिए गेमचेंजर, चीन पर सतर्कता ज़रूरी: ब्रिगेडियर महाजन
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) हेमंत महाजन ने 12 सितंबर 2026 को कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा की गई सुखोई विमानों के नए इंजन की पेशकश भारतीय वायुसेना के लिए एक बड़ा रणनीतिक अवसर है। साथ ही उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे को लेकर सतर्क रुख अपनाने और जमीनी ठोस कदमों का इंतज़ार करने की सलाह दी।
सुखोई इंजन ऑफर: क्या है पेशकश
ब्रिगेडियर महाजन ने बताया कि भारतीय वायुसेना के कुल बेड़े का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा सुखोई लड़ाकू विमानों से बना है। उन्होंने कहा, 'रूस की यह पेशकश सुखोई के लिए अधिक शक्तिशाली इंजन की है, जो मौजूदा इंजनों की तुलना में 7 प्रतिशत सस्ता भी है और इससे सुखोई विमान की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि किसी भी आधुनिक लड़ाकू विमान को एवियोनिक्स और इंजन क्षमता के मामले में समय-समय पर उन्नयन की ज़रूरत होती है।
रणनीतिक लाभ: तिब्बत से समुद्र तक पहुंच
महाजन के अनुसार, उन्नत इंजन से लैस सुखोई विमान ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अधिक प्रभावी तरीके से काम कर सकेगा। उन्होंने कहा कि इस अपग्रेड के बाद विमान की पहुंच संभावित रूप से पूरे तिब्बत क्षेत्र तक हो सकती है। इसके अलावा, यह अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम जैसे पर्वतीय क्षेत्रों के साथ-साथ देश के पूर्वी और पश्चिमी तटों के समुद्री क्षेत्रों तथा रेगिस्तानी इलाकों में भी बेहद कारगर रहेगा। उन्होंने जोड़ा कि रूस ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर भी सहमति जताई है और अमेरिकी विमानों की तुलना में यह सौदा काफी किफायती भी है।
शी जिनपिंग दौरे पर सतर्कता की सलाह
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लंबे अंतराल बाद भारत दौरे को लेकर कई विश्लेषक भारत-चीन संबंधों में सुधार की उम्मीद जता रहे हैं, लेकिन ब्रिगेडियर महाजन ने स्पष्ट कहा, 'मैं एक रणनीतिक विश्लेषक के तौर पर इस यात्रा को लेकर सतर्क रहूंगा और जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठने के बाद ही इस पर भरोसा करूंगा।' उन्होंने सीमा विवाद को दोनों देशों के बीच सबसे अहम मुद्दा बताते हुए कहा कि चीन सीमा पर 'स्लाइसिंग' यानी धीरे-धीरे ज़मीन हथियाने की नीति अपनाता है।
व्यापार असंतुलन और आपूर्ति श्रृंखला का हथियारीकरण
आर्थिक मोर्चे पर महाजन ने बताया कि भारत का चीन से आयात 100 अरब डॉलर से अधिक है, जबकि भारत का चीन को निर्यात महज़ 20 अरब डॉलर के आसपास है। यह भारी व्यापार असंतुलन पिछले 7-8 वर्षों के सरकारी प्रयासों के बावजूद बना हुआ है। उन्होंने चेताया कि चीन 'सप्लाई चेन वॉरफेयर' की रणनीति अपनाता है — दुर्लभ खनिज तत्वों (रेयर अर्थ एलिमेंट्स) पर प्रतिबंध, उर्वरकों और इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों की आपूर्ति में अड़चनें, और भारतीय कारोबारियों को वीज़ा देने में दिक्कतें इसके उदाहरण हैं।
संबंध सुधार की शर्तें
महाजन ने कहा कि चीन लगातार पाकिस्तान का समर्थन करता आ रहा है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का विरोध करता है। उनके अनुसार भारत-चीन संबंधों में वास्तविक सुधार तभी संभव है जब चीन सीमा विवाद सुलझाए, व्यापार असंतुलन कम करे, आपूर्ति श्रृंखला को हथियार बनाना बंद करे, और भारत को बराबर का साझेदार माने। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी रक्षा एवं आर्थिक आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की कोशिश कर रहा है।